स्तम्भ
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वासुदेव_कृष्ण : आशुतोष राणा की कलम से..{भाग_२]
स्तम्भ : कंस ने लगभग डाँटते हुए कहा- मुझे बहलाओ मत कृष्ण। मैं गोकुल की गोपी नहीं हूँ, जो तुम्हारे…
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वासुदेव_कृष्ण : आशुतोष राणा की कलम से.. {भाग_३}
स्तम्भ : कृष्ण अपने हृदय की आत्मीयता को कंस पर उड़ेलते हुए बोले- मुक्त होने के लिए रिक्त होना पड़ता…
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वासुदेव_कृष्ण : आशुतोष राणा की कलम से… {भाग_४}
स्तम्भ : कृष्ण, मेरी माँ पवनरेखा अनिंद्य सुंदरी थी, अपने पति उग्रसेन के प्रति पूर्णतः समर्पित। किंतु किसी भी स्त्री…
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वासुदेव_कृष्ण :आशुतोष राणा की कलम से स्तम्भ {भाग_५]
स्तम्भ: मेरा अनुभव है कृष्ण, कि #दुर्भाग्य व्यक्ति को #अपने_पास_बुलाता_है, किंतु #सौभाग्य व्यक्ति तक #स्वयं ही पहुँच जाता है। कंस…
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वासुदेव_कृष्ण :आशुतोष राणा की कलम से.. {भाग ६}
स्तम्भ : मेरी माँ पवनरेखा जब अपने पितृगृह पहुँची तब वह अपने पति से विरह और हृदय की वेदना से…
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संसार भगवान की छाया, भगवान मिल जाए तो छाया के लिए प्रयास करने की क्या जरूरत
अध्यात्म : भगवान् को प्राप्त करने का अभियान भगवद्जन के लिए जितना सरल और सरस है विषयी व्यक्ति के लिए उतना…
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वासुदेव_कृष्ण : आशुतोष राणा की कलम से..{भाग_७}
स्तम्भ : काम का ज्वर उतरते ही पवनरेखा की देह पर आरूढ़ उग्रसेन ने भी अपनी दृष्टि की कोर से…
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रामराज्य : रामकथा आशुतोष राणा की कलम से..भाग ३
स्तम्भ: कैकेयी को सुमित्रा के शब्द सुनाई दिए वे कह रही थीं- जीजी, परमात्मा ने महाराज दशरथ और हम सबके भाग्य…
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रामराज्य : रामकथा आशुतोष राणा की कलम से…( भाग-2)
स्तम्भ: कैकेयी ने आश्चर्य से सुमित्रा को अपने कंठ से अलग करते हुए कहा- शत्रुघन का कहीं पता नहीं है…
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रामराज्य : रामकथा आशुतोष राणा की कलम से (भाग-1)
स्तम्भ: भरत नंदीग्राम में ही रुक गए, उन्होंने निर्णय सुना दिया था कि प्रभु श्रीराम के अयोध्या वापस लौटने तक…
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हमारी नस-नस में हैं इतिहास के महानायक श्रीकृष्ण
इतिहास भूत होता है। इसमें जोड़ घटाव उचित नहीं होता। जैसा घटित हुआ, वैसा ही इतिहास बना। हम चाहकर भी…
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भाव और विचार एक नहीं होते
भाव का केन्द्र हृदय है और ज्ञान का केन्द्र बुद्धि। बुद्धि का आधार स्मृति है। हम प्रत्यक्ष जगत का विवेचन…
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थक कर न बैठ, ऐ मंजिल के मुसाफिर!
लखनऊ : विचार ही व्यक्ति को महान बनाते हैं और विचार ही उसे नीचे भी गिराते हैं। जो व्यक्ति अपने…
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समय मिले तो नेहरू, वाजपेयी और इंदिरा से आगे निकलेंगे नरेंद्र मोदी
है नरेंद्र मोदी के वुजूद पर हिंदोस्तां को नाज कहते हैं उसे अहल-ए-नजर ही इमाम-ए-पदक हम जब भी किसी मामले…
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नैनीताल, माल रोड के 140 मीटर हिस्से पर भी मडराय खतरा, जाने पूरा मामला
नई दिल्ली : 18 अगस्त को लोअर माल रोड का एक हिस्सा टूटकर नैनी झील में समा गया था।…
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प्रभु का स्मरण करने का रास्ता भी एक है तथा मंजिल भी एक है!
लखनऊ : विश्व में जो धर्म के नाम पर लड़ाई-झगड़ा हो रहा है, उसके पीछे एकमात्र कारण हमारा अज्ञान है।…
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मधुमय शब्द प्रयोग के जादूगर थे ‘अटल’
भारत के अवनि-अम्बर शोक ग्रस्त हैं। भारत रत्न और तमाम असम्भवों का संभवन अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे। वे एक…
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लखनऊ: 1858 में ही लिखी जा चुकी थी इबारत, फिरंगी महल में ठहरे महात्मा गांधी: जाने इतिहास
लखनऊ : असहयोग आंदोलन भले ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अगुवाई में परवान चढ़ा हो, लेकिन राजधानी के फिरंगी महल…
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अटल बिहारी वाजपेयी होने का मतलब
लखनऊ : अटल बिहारी वाजपेयी यानि एक ऐसा नाम जिसने भारतीय राजनीति को अपने व्यक्तित्व और कृतित्व से इस तरह…
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स्वतंत्र, स्वभाव, स्वराज और स्वाभिमान
‘स्वतंत्र’ का अर्थ गहरा है। स्व का अर्थ सुस्पष्ट है। स्व यानी मैं। मेरा अन्तःक्षेत्र। हमारी अपनी अनुभूति। प्रत्येक व्यक्ति…
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निर्माणों के पावन युग में हम चरित्र निर्माण न भूलें : डाॅ. जगदीश गाँधी
नया शैक्षिक सत्र चरित्र निर्माण का वर्ष हो बच्चों को भौतिक के साथ ही सामाजिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा भी दें…
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‘हम भारत के लोग’ : हृदयनारायण दीक्षित
‘हमारे पूर्वजों ने धरती को माता और आकाश को पिता बताया’ ‘हम भारत के लोग’ हैं। यही हमारा मूल परिचय…
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अंधविश्वासी नहीं है भारतीय चिंतन
‘दर्शन’ का मूल उद्देश्य संसार को समझना और विश्व को आनंद से भरना है संसार हमारा आश्रय है। हम संसार…
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हम लाये हैं तूफान से किश्ती निकाल के, इस देश को रखना मेरे बच्चों सम्भाल के!
लखनऊ : भारत के लाखों स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपनी कुर्बानियाँ देकर ब्रिटिश शासन से 15 अगस्त 1947 को अपने…
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एक हाथ में कुरान हो, एक में कम्प्यूटर : नरेंद्र मोदी
मोदी सरकार को आज चार साल हो चुके हैं और पांचवें में थोड़ा ही समय रहता है। विपक्ष के बहुत…
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भारत की संस्कृति को सामाजिक संस्कृति कहते हैं : हृदयनारायण दीक्षित
दर्शन और विज्ञान का जन्म जिज्ञासा से हुआ। ऐसी जिज्ञासा ऋग्वेद में है। ऋग्वेद का रचनाकाल प्राचीन यूनानी दर्शन से…
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देश में करोड़ों वृद्ध परिजनों से पीड़ित : हृदयनारायण दीक्षित
जीवन की सांझ आ रही है। श्रम गीत मद्धिम हो रहे हैं। गहन विश्राम की तैयारी है, लेकिन अपने परिजन…
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भारतीय दर्शन के मूल स्रोत हैं उपनिषद्
उपनिषद् पूर्वाग्रह मुक्त हैं। इनमें पहले से बने बनाए विचारों का गहन विवेचन है। अंधविश्वासी कर्मकाण्ड का विरोध है। ये…
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