स्तम्भ
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भारत शक्ति उपासना में आनंदमगन है
विज्ञान प्रकृति में पदार्थ और ऊर्जा देख चुका है। पदार्थ और ऊर्जा भी अब दो नहीं रहे। समूची प्रकृति एक…
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वैदिक परंपरा है प्रश्न और जिज्ञासा
हृदयनारायण दीक्षित : प्रश्न और जिज्ञासा वैदिक परंपरा है। भारतीय इतिहास के वैदिक काल में सामाजिक अन्तर्विरोध कम थे। तब…
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प्रत्यक्ष मानवीय गुण है पितरों का आदर
हृदयनारायण दीक्षित : श्रद्धा भाव है और श्राद्ध कर्म। श्रद्धा मन का प्रसाद है और प्रसाद आंतरिक पुलक। पतंजलि ने…
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राष्ट्रीय अस्मिता का सामूहिक सत्य है ‘भारत बोध’
बोध आसान नहीं। शोध आसान है। शोध के लिए प्रमाण, अनुमान, पूर्ववर्ती विद्वानों द्वारा सिद्ध कथन और प्रयोग पर्याप्त हैं।…
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क्या कर्मफल की इच्छा दोषपूर्ण अभिलाषा है, अनासक्त कर्म ही क्यों श्रेष्ठ है?
हम सब कर्मशील प्राणी हैं। कर्म की प्रेरणा है कर्मफल प्राप्ति की इच्छा। कर्मफल प्राप्ति की अभिलाषा के कारण ही…
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हम सभी स्वतंत्र भारत के परतंत्र नागरिक हैं…
हम सभी स्वतंत्र भारत के परतंत्र नागरिक हैं…यह वाक्य पढ़ने में बिल्कुल गलत लगा न? कड़वा तो ऐसा है जैसे कच्ची…
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रामराज्य : आशुतोष राणा की क़लम से..{भाग_६}
स्तम्भ: कैकेयी के स्वर ने राम में अपार ऊर्जा का संचार किया। एक हल्के से विराम के बाद राम ने कहा-…
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रामराज्य : आशुतोष राणा की कलम से..{भाग ५}
स्तम्भ: मंथरा के जाने के बाद कैकेयी मंथरा के विचारों का सूक्ष्म अवलोकन करने लगीं, मनुष्य स्वभाव से ही महत्वाकांक्षी…
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रामराज्य : आशुतोष राणा की कलम से..{.भाग_४}
स्तम्भ: अयोध्या पीछे छूट चुकी थी, जनशून्य क्षेत्र आरम्भ हो चुका था। कैकेयी इस सत्य को जानती थीं कि जब…
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वासुदेव_कृष्ण : आशुतोष राणा की कलम से.. {भाग_१}
स्तम्भ: वे अपने महल के विशाल कक्ष में बेचैनी से चहल क़दमी कर रहे थे, मृत्यु के मुख पर खड़े…
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वासुदेव_कृष्ण : आशुतोष राणा की कलम से..{भाग_२]
स्तम्भ : कंस ने लगभग डाँटते हुए कहा- मुझे बहलाओ मत कृष्ण। मैं गोकुल की गोपी नहीं हूँ, जो तुम्हारे…
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वासुदेव_कृष्ण : आशुतोष राणा की कलम से.. {भाग_३}
स्तम्भ : कृष्ण अपने हृदय की आत्मीयता को कंस पर उड़ेलते हुए बोले- मुक्त होने के लिए रिक्त होना पड़ता…
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वासुदेव_कृष्ण : आशुतोष राणा की कलम से… {भाग_४}
स्तम्भ : कृष्ण, मेरी माँ पवनरेखा अनिंद्य सुंदरी थी, अपने पति उग्रसेन के प्रति पूर्णतः समर्पित। किंतु किसी भी स्त्री…
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वासुदेव_कृष्ण :आशुतोष राणा की कलम से स्तम्भ {भाग_५]
स्तम्भ: मेरा अनुभव है कृष्ण, कि #दुर्भाग्य व्यक्ति को #अपने_पास_बुलाता_है, किंतु #सौभाग्य व्यक्ति तक #स्वयं ही पहुँच जाता है। कंस…
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वासुदेव_कृष्ण :आशुतोष राणा की कलम से.. {भाग ६}
स्तम्भ : मेरी माँ पवनरेखा जब अपने पितृगृह पहुँची तब वह अपने पति से विरह और हृदय की वेदना से…
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संसार भगवान की छाया, भगवान मिल जाए तो छाया के लिए प्रयास करने की क्या जरूरत
अध्यात्म : भगवान् को प्राप्त करने का अभियान भगवद्जन के लिए जितना सरल और सरस है विषयी व्यक्ति के लिए उतना…
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वासुदेव_कृष्ण : आशुतोष राणा की कलम से..{भाग_७}
स्तम्भ : काम का ज्वर उतरते ही पवनरेखा की देह पर आरूढ़ उग्रसेन ने भी अपनी दृष्टि की कोर से…
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रामराज्य : रामकथा आशुतोष राणा की कलम से..भाग ३
स्तम्भ: कैकेयी को सुमित्रा के शब्द सुनाई दिए वे कह रही थीं- जीजी, परमात्मा ने महाराज दशरथ और हम सबके भाग्य…
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रामराज्य : रामकथा आशुतोष राणा की कलम से…( भाग-2)
स्तम्भ: कैकेयी ने आश्चर्य से सुमित्रा को अपने कंठ से अलग करते हुए कहा- शत्रुघन का कहीं पता नहीं है…
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रामराज्य : रामकथा आशुतोष राणा की कलम से (भाग-1)
स्तम्भ: भरत नंदीग्राम में ही रुक गए, उन्होंने निर्णय सुना दिया था कि प्रभु श्रीराम के अयोध्या वापस लौटने तक…
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हमारी नस-नस में हैं इतिहास के महानायक श्रीकृष्ण
इतिहास भूत होता है। इसमें जोड़ घटाव उचित नहीं होता। जैसा घटित हुआ, वैसा ही इतिहास बना। हम चाहकर भी…
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भाव और विचार एक नहीं होते
भाव का केन्द्र हृदय है और ज्ञान का केन्द्र बुद्धि। बुद्धि का आधार स्मृति है। हम प्रत्यक्ष जगत का विवेचन…
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थक कर न बैठ, ऐ मंजिल के मुसाफिर!
लखनऊ : विचार ही व्यक्ति को महान बनाते हैं और विचार ही उसे नीचे भी गिराते हैं। जो व्यक्ति अपने…
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समय मिले तो नेहरू, वाजपेयी और इंदिरा से आगे निकलेंगे नरेंद्र मोदी
है नरेंद्र मोदी के वुजूद पर हिंदोस्तां को नाज कहते हैं उसे अहल-ए-नजर ही इमाम-ए-पदक हम जब भी किसी मामले…
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नैनीताल, माल रोड के 140 मीटर हिस्से पर भी मडराय खतरा, जाने पूरा मामला
नई दिल्ली : 18 अगस्त को लोअर माल रोड का एक हिस्सा टूटकर नैनी झील में समा गया था।…
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प्रभु का स्मरण करने का रास्ता भी एक है तथा मंजिल भी एक है!
लखनऊ : विश्व में जो धर्म के नाम पर लड़ाई-झगड़ा हो रहा है, उसके पीछे एकमात्र कारण हमारा अज्ञान है।…
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मधुमय शब्द प्रयोग के जादूगर थे ‘अटल’
भारत के अवनि-अम्बर शोक ग्रस्त हैं। भारत रत्न और तमाम असम्भवों का संभवन अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे। वे एक…
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लखनऊ: 1858 में ही लिखी जा चुकी थी इबारत, फिरंगी महल में ठहरे महात्मा गांधी: जाने इतिहास
लखनऊ : असहयोग आंदोलन भले ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अगुवाई में परवान चढ़ा हो, लेकिन राजधानी के फिरंगी महल…
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