‘CM’ बनने का सपना टूटा, अब शंकर सिंह वाघेला उठा सकते हैं बड़ा कदम

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वाघेला ने कहा कि मेरी प्रस्तावित जनसभा से ही कांग्रेस डर गई थी, इसीलिए उसने मुझे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया। शंकर सिंह वाघेला ने अपने समर्थकों से कहा,’कांग्रेस पार्टी ने मुझे 24 घंटे पहले ही पार्टी से निकाल दिया, ये सोच कर कि पता नहीं मैं क्या कहता। ‘विनाश काले, विपरीत बुद्धि”।
Congress party ne mujhe 24 ghante pehle nikal diya yeh soch ke ki pata nahi main kya kehta; Vinaash kal vipreet buddhi: Shankersinh Vaghela pic.twitter.com/FNN5sM1RIt
— ANI (@ANI_news) July 21, 2017
शंकर सिंह वाघेला ने गांधीनगर में जन्मदिन सम्मेलन के दौरान कहा कि मुझे सत्ता की लालसा कभी नहीं रही। मैं आरएसएस से जुड़ा रहा हूं। भगवान शिव मेरे प्रेरणास्रोत हैं। भगवान शिव ने मुझे विषपान सिखाया है। वाघेला की रैली में उनके समर्थकों का हुजूम उमड़ा था। ऐसा माना जा रहा था कि वाघेला आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में खुलकर सामने आना चाहते थे, पर गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी के तीखे विरोध की वजह से पार्टी हाईकमान उनपर दांव नहीं खेलना चाहती थी। यही वजह है कि वाघेला ने अपने जन्मदिन पर सम्मेलन के आयोजन की घोषणा की, तो कांग्रेस ने आनन-फानन में उन्हें निकालने का फैसला कर लिया।
गौरतलब है कि शंकर सिंह वाघेला की 40 साल की राजनीति में वे देश की दोनों बड़ी पार्टियों से जुड़े रहे हैं। करीब 6 बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके वाघेला 1977 में पहली बार सांसद बने थे। साल 1995 के गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत में वाघेला ने अहम रोल निभाया, पर उन्हें सीएम नहीं बनाया गया। इस बात से नाराज वाघेला ने बीजेपी छोड़कर 1995 में अपनी अलग पार्टी राष्ट्रीय जनता पार्टी बना ली थी। और कांग्रेस के समर्थन से गुजरात के मुख्यमंत्री बने। पर कुछ समय बाद ही उन्हें पद से हटना पड़ा और उन्होंने साल 1997 में राष्ट्रीय जनता पार्टी का कांग्रेस में विलय कर लिया। और खुद को गुजरात कांग्रेस के प्रमुख चेहरे के तौर पर स्थापित कर लिया। मौजूदा समय तक वोे वाघेला गुजरात विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे।
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शंकर सिंह वाघेला ने कहा कि वो कांग्रेस से निकाले जाने के बाद किसी पार्टी में शामिल नहीं होंगे।
Mai apne aap Congress ko apne se mukt karta hoon. I am not going to join any political party: Shankersinh Vaghela pic.twitter.com/zzdOa0mmRF
— ANI (@ANI_news) July 21, 2017
शंकर सिंह वाघेला की इस घोषणा से उम्मीद जताई जा रही है कि वो पार्टी बनाने की जगह कई पार्टियों को बनाकर गैर कांग्रेसी-गैर भाजपाई मोर्चा बना सकते हैं। ऐसे में वो एनसीपी, जेडीयू के साथ ही गुजरात सरकार की नाक में दम कर देने वाले गुजरात के 3 युवा नेताओं हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकुर और जिग्नेश मेवानी को साथ ला सकते हैं। हालांकि उन्होंने सक्रिय राजनीति से सन्यास ले लिया है, पर वो पर्दे के पीछे अपनी भूमिका निभाते रहेंगे।
शंकर सिंह वाघेला के राजनीति से संन्यास को अमित शाह की नजदीकी से जोड़कर भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पर्दी के पीछे हुई डील के तहत वाघेला के बेटे को बीजेपी राज्यसभा या किसी सुरक्षित पद पर भेज सकती है। इसके बदले वो गुजरात में कमजोर होती दिख रही बीजेपी के लिए नई मुसीबत नहीं खोलेंगे।