देहरादून में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड दौरा एक बार फिर चर्चा में है। यह उनका 28वां दौरा है और हर बार की तरह इस बार भी विकास और पहचान दोनों को नई दिशा देने की बात सामने आई है। एक्सप्रेसवे के जरिए जहां दिल्ली और देहरादून के बीच सफर अब ढाई घंटे में सिमट जाएगा, वहीं यह परियोजना राज्य की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और उद्योग के लिए गेमचेंजर मानी जा रही है।
हर दौरे में विकास की नई सौगात
प्रधानमंत्री के उत्तराखंड दौरे केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहे, बल्कि हर बार कोई न कोई बड़ी परियोजना या पहल सामने आई है। सड़कों, धार्मिक पर्यटन और कनेक्टिविटी को लेकर उठाए गए कदमों ने राज्य की आधारभूत संरचना को मजबूत किया है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे भी इसी कड़ी का हिस्सा है, जो राज्य को राष्ट्रीय राजधानी से तेज और सुगम कनेक्टिविटी देगा।
संस्कृति को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की पहल
उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर तक पहुंचाने में भी प्रधानमंत्री की भूमिका अहम रही है। पारंपरिक पहाड़ी टोपी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहनकर उन्होंने राज्य की विरासत को नई पहचान दी। खासतौर पर ब्रह्मकमल अंकित काली टोपी ने देश ही नहीं, विदेशों में भी लोगों का ध्यान खींचा।
विदेशी दौरों में भी दिखी उत्तराखंड की झलक
प्रधानमंत्री के विदेश दौरों में भी उत्तराखंड की झलक लगातार दिखाई दी है। इजरायल यात्रा के दौरान पहाड़ी टोपी में उनकी मौजूदगी चर्चा का विषय बनी, वहीं अमेरिका में उत्तराखंड के चावल भेंट कर उन्होंने राज्य के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। इससे स्थानीय उत्पादों की मांग और पहचान दोनों में वृद्धि हुई है।
उपहारों से भी बढ़ा ‘ब्रांड उत्तराखंड’
राज्य सरकार और केंद्र के बीच मुलाकातों के दौरान भी उत्तराखंड के उत्पादों को विशेष स्थान मिला है। मुनस्यारी की शॉल, पुरोला के लाल चावल, अल्मोड़ा के तांबे के बर्तन, पहाड़ी शहद और बदरी गाय का घी जैसे उत्पाद राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं। धार्मिक स्थलों की प्रतिकृतियां भी राज्य की आध्यात्मिक विरासत को मजबूती से प्रस्तुत कर रही हैं।
पर्यटन से आगे बढ़कर वैश्विक पहचान की ओर
उत्तराखंड अब केवल पर्यटन राज्य नहीं रह गया है, बल्कि सांस्कृतिक और जैविक उत्पादों के वैश्विक ब्रांड के रूप में उभर रहा है। पहाड़ी टोपी से लेकर पारंपरिक कृषि उत्पादों तक, राज्य की पहचान अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से दर्ज हो रही है। प्रधानमंत्री के लगातार प्रयासों से ‘ब्रांड उत्तराखंड’ को नई उड़ान मिली है।




