

फेसबुक पोस्ट में बुरहान की मौत पर अफसोस जाहिर करते हुए उसने अर्जेंटीना के मार्क्सवादी चे ग्वेरा का उदाहरण देते हुए लिखा, कि ‘अगर मैं मर जाऊं तो कोई और मेरी बंदूक उठा ले और गोलियां चलाता रहे’। बुरहान वानी के भी यही शब्द हो सकते थे।
उमर ने आगे लिखा कि बुरहान को मौत का खौफ नहीं था। उसे अधीनता का डर था, उसे इससे घृणा थी। वह आजाद होकर रहा और आजाद होकर ही मरा। उसने कहा कि, बदनसीब भारत सरकार उस आदमी को कैसे हरा सकती है, जिसने खुद खौफ को हरा दिया हो। तुम हमेशा कश्मीर के एकजुट लोगों के दिलों में रहोगे बुरहान। उमर ने आतंकी बुरहान को श्रद्धांनजलि दी है। उमर ने अपनी फेसबुक पोस्ट में बुरहान की सरहाना करते हुए सरकार और राष्ट्रवाद पर भी निशाना साधा है।