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नरगिस के बालों पर लगा बेसन देख फिदा हो गए थे राज कपूर

जब 1948 में राज कपूर की नरगिस से पहली मुलाकात हुई तब वो बीस साल की थीं और तब तक वो आठ फिल्मों में काम कर चुकी थीं। राज कपूर की उम्र उस समय बाइस साल थी और अभी तक उन्हें कोई फिल्म निर्देशित करने का मौका नहीं मिला था। उस मुलाकात की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है। राज कपूर को अपनी पहली फिल्म के लिए एक स्टूडियो की तलाश थी। उन्हें पता लगा कि नरगिस की मां जद्दन बाई फेमस स्टूडियो में रोमियो एंड जूलिएट की शूटिंग कर रही हैं। वो जानना चाहते थे कि वहां किस तरह की सुविधाएं हैं? जब राज कपूर उनके घर पहुंचे तो नरगिस ने खुद दरवाजा खोला। वो रसोई से दौड़ती हुई आईं थीं, जहां वो पकौड़े तल रही थीं.बेख़्याली में उनका हाथ उनके बालों से छुल गया और उसमें लगा बेसन उनके बालों में लग गया। नरगिस की इस अदा पर राज कपूर उन पर मर मिटे।

हालांकि बाद में नरगिस के भाई अख़्तर हुसैन ने जोर दिया कि उनकी बहन का मेहनताना बढ़ा कर चालीस हजार रुपये कर दिया जाए, जो कि किया गया।’आग’ की शूटिंग खंडाला में हुई थी और नरगिस की शक्की मां जद्दन बाई भी उनके साथ वहां गई थीं।जब राज कपूर ने अपनी फिल्म ‘बरसात’ की शूटिंग कश्मीर में करनी चाही तो जद्दन बाई ने साफ इंकार कर दिया।बाद में महाबलेश्वर को ही कश्मीर बना कर फिल्म की शूटिंग हुई। उधर कपूर खानदान में भी इस रोमांस को ले कर काफी तनाव था।पृथ्वीराज कपूर ने अपने बेटे को समझाने की कोशिश की, लेकिन राज कपूर का इस पर कोई असर नहीं हुआ।’आवारा’ के फ़्लोर पर जाते जाते नरगिस की मां का निधन हो गया। उसके बाद उनपर रोकटोक लगाने वाला कोई नहीं रहा।
‘बरसात’ फिल्म बनते बनते नरगिस राज कपूर के लिए पूरी तरह से कमिट हो गईं थीं। मधु जैन अपनी किताब, ‘फर्स्ट फैमिली ऑफ इंडियन सिनेमा- द कपूर्स’ में लिखती हैं, “नरगिस ने अपना दिल, अपनी आत्मा और यहा तक कि अपना पैसा भी राज कपूर की फिल्मों में लगाना शुरू कर दिया। जब आर के स्टूडियो के पास पैसों की कमी हुई तो नरगिस ने अपने सोने के कड़े तक बेच डाले। उन्होंने आरके फिल्म्स के कम होते खजाने को भरने के लिए बाहरी प्रोड्यूसरों की फिल्मों जैसे अदालत, घर संसार और लाजवंती में काम किया।’ बाद में राज कपूर ने उनके बारे में एक मशहूर लेकिन संवेदनहीन वकतव्य दिया, ‘मेरी बीबी मेरे बच्चों की मां है, लेकिन मेरी फिल्मों की मां तो नरगिस ही हैं।”राज कपूर के छोटे भाई शशि कपूर बताते हैं, ‘नरगिस आरके फिल्म्स की जान थीं। उनका कोई सीन न होने पर भी वो सेट्स पर मौजूद रहती थीं।’
जब राज कपूर नासिक के पास एक झील पर ‘आह’ फ़िल्म की शूटिंग कर रहे थे तो उन्होंने अपने चचेरे भाई कर्नल राज खन्ना को शूटिंग देखने के लिए बुलाया। राज कपूर की बेटी रितु नंदा अपनी किताब ‘राज कपूर स्पीक्स’ में लिखती हैं, ‘कर्नल राज खन्ना ने मुझे बताया कि उन दिनों शूटिंग के बाद हम लोग रोज शिकार खेलने जाते थे। नरगिस हमारे पीछे जीप में बैठी होतीं थीं और हम लोगों को सैंडविचेस और ड्रिंक्स पकड़ाती रहती थीं। हम लोग रात को तीन या चार बजे वापस लौटते थे। इसके बाद नरगिस मैदान में लगे तंबुओं के चारों ओर घूमती थीं और उन में सो रहे लोगों को डांटती थीं कि अब तक जेनरेटर क्यों चल रहे हैं। नरगिस किसी भी तरह की बरबादी के सख़्त खिलाफ थीं।’राज कपूर के जीवन की ये विडंबना थी कि वो नरगिस से उनकी पहली मुलाकात उनकी शादी होने के सिर्फ चार महीने बाद हुई। उनके धर्म भी अलग अलग थे।
हालांकि नरगिस के पिता डॉक्टर मोहन बाबू, हिंदू थे, लेकिन उनका पालन पोषण एक मुस्लिम की तरह हुआ था। नरगिस राज कपूर से ज़्यादा पढ़ी लिखी थीं।उन्होंने क्वींस मेरी कॉन्वेंट से बीए पास किया था। राज कपूर ने कभी स्कूल की अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की और हमेशा कॉमिक्स ही पढ़ते रहे। राज कपूर जिस भी फिल्म समारोह में जाते नरगिस को अपने साथ ले जाते।देवानंद अपनी आत्मकथा, ‘रोमांसिंग विद लाइफ’ में लिखते हैं, ‘मैंने राज कपूर को अच्छी तरह तब जाना जब हम रूस में छह हफ़्तों तक एक साथ रहे। हम लोग पार्टियों में साथ साथ जाते। नरगिस और वो एक ही कमरे में रहते थे। जहां भी हम जाते रूसी प्यानो पर ‘आवारा हूं’ की धुन बजाते। कभी कभी राज कपूर इतनी शराब पी लेते कि बिस्तर से उतरने का नाम ही नहीं लेते। हम लोग नीचे उनका इंतेजार कर रहे होते और तब नरगिस उन्हें नीचे लाने की कोशिश करतीं।’
लेकिन कुछ समय बाद जैसा कि स्वाभाविक था, नरगिस पत्नी, मां और श्रीमती राज कपूर बनने के ख़्वाब देखने लगीं।मधु जैन लिखती हैं, ‘नरगिस की ये इच्छा इतनी बलवती हुई कि कि उन्होंने मुंबई के तत्कालीन गृह मंत्री मोरारजी देसाई तक से इस बारे में सलाह ले डाली कि वो किस तरह कानूनी रूप से राज कपूर से शादी कर सकती हैं?’नरगिस की दोस्त नीलम ने बाद में बनी रयूबेन को बताया कि राज कपूर नरगिस से हमेशा कहा करते थे कि एक दिन वो उनसे शादी जरूर करेंगे। लेकिन उनका धैर्य तब जवाब दे गया जब उन्हें महसूस हुआ कि राज कपूर अपनी पत्नी को कभी नहीं छोड़ेंगे।राज कपूर के जीवन से नरगिस का प्रस्थान शांतिपूर्ण और ‘अंतिम’ था।
सामान्यत: वो आरके बैनर के बाहर की कोई फिल्म साइन करने से पहले राज कपूर से सलाह जरूर करती थीं लेकिन जब उन्होंने ‘मदर इंडिया’ साइन की तो सब को अंदाजा हो गया कि दोनों की प्रेम कहानी अपने अंतिम चरण में है। 1986 में सुरेश कोहली को दिए गए इंटरव्यू में राज कपूर ने बताया था, ‘नरगिस ने मुझे एक बार फिर धोखा दिया जब उसने एक बूढ़ी औरत का रोल करने से इंकार कर दिया। वो स्क्रिप्ट मैंने राजिंदर सिंह बेदी से खरीदी थी। उसने कहा कि इससे उसकी इमेज खराब होगी। लेकिन अगले ही दिन उसने ‘मदर इंडिया’ साइन कर ली जिसमें उसका बूढ़ी औरत का रोल था।’1958 में नरगिस ने सुनील दत्त से शादी कर ली।ये शादी तब तक गुप्त रखी गई जब तक ‘मदर इंडिया’ रिलीज नहीं हुई, क्योंकि इस फिल्म में सुनील दत्त नरगिस के बेटे का रोल निभा रहे थे।
अगर इस बात का लोगों को पता चल जाता तो शायद फिल्म उतनी नहीं चलती। राज कपूर को इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि नरगिस उन्हें छोड़ने जा रही हैं।मधु जैन लिखती हैं, ‘जब उन्हें पता चला कि नरगिस ने सुनील दत्त से शादी कर ली है तो राज कपूर अपने दोस्तों और साथियों के सामने फूट फूट कर रोए। कहा तो यहां तक जाता है कि राज कपूर अपने आप को सिगरेट बटों से जलाते, ये देखने के लिए कि कहीं वो सपना तो नहीं देख रहे।’नरगिस के जीवनीकार टीजेएस जॉर्ज लिखते हैं, ‘इसके बाद से ही राज कपूर ने बेइंतहा शराब पीनी शुरू कर दी। उन्हें जो भी कंधा मिलता, उस पर सिर रख कर वो बच्चों की तरह रोते।