नेपाल-भारत के रिश्तों में दरार,रद्द किया दौरा, राजदूत को वापस बुलाया

एंजेंसी/ नई दिल्ली। भारत और नेपाल के रिश्तों में बड़ी दरार सामने आयी है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली की सरकार ने राष्ट्रपति के भारत के दौरे को रद्द कर दिया है। यही नहीं अपने राजदूत को भी दिल्ली से वापस बुला लिया है। ओली सरकार का यह फैसला उस वक्त आया है जब सरकार अपने साथियों, माओ का समर्थन प्राप्त कर लिया है। ऐसे में सरकार का संकट खत्म होने के साथ ही बड़ा फैसला सामने आया है।
हालांकि नेपाल सरकार का इस पर कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है। लेकिन माना जा रहा है कि नेपाल ने यह फैसला इसलिए लिया है कि भारत नेपाल की सरकार को अस्थिक करना चाहता था। वहीं भारत के राजनयिक सूत्रों की मानें तो यह बात निर्ऱथक है। नेपाल के अंदरूनी मामलों में भारत किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं करता। नेपाल के राष्ट्रपति बिद्या भंडारी को 9 मई को भारत के पांच दिवसीय दौरे पर आना था। वह मध्य प्रदेश के उज्जैन में कुंभ मेले में भी शामिल हो सकते थे। लेकिन शुक्रवार को नेपाल के विदेश मंत्री कमल थापा ने इस दौरे को रद्द करने का फैसला लिया है। बुधवार को माओ के चेयरमैन प्रचंड ने सरका से समर्थन वापस लेकर खुद सरकार बनाने का फैसला लिया था। विपक्ष ने भी उन्हें समर्थन देने का फैसला लिया था, लेकिन तभी प्रचंड ने अपना फैसला टाल दिया और ओली सरकार से समझौता कर लिया। माओ नेता प्रचंड और ओली सरकार के बीच समझौता हुआ कि युद्ध के समय पकड़े माओं पर कार्यवाही नहीं चलेगी। माना जा रहा था कि माओ नेता के सरकार बनाने के पीछे भारत की ताकत थी जिसके चलते दोनों देशों के संबंधों में खटास आयी है।