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वह दिन दूर नहीं, जब जन्म से पहले ही शुरू हो जाएंगे एडमिशन

मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्कूलों में बच्चों के एडमिशन को लेकर तल्ख टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा कि भविष्य में जब बच्चा अपनी मां के पेट में रहेगा, तभी से ही उसके एडमिशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी, क्योंकि आज के माहौल में बच्चों का स्कूल में प्रवेश अभिभावकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। हाईकोर्ट ने यह बात मुंबई के बालमोहन विद्या मंदिर स्कूल द्वारा शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत प्रवेश न दिए जाने के निर्णय के विरोध में एक अभिभावक की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कही। हाईकोर्ट में संगीता कुंचीकोरवे व अफरीन खान ने याचिका दायर कर कहा कि वे गरीब हैं, इसलिए उनके बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।
क्या कहा मनपा ने?
सुनवाई के दौरान मनपा के वकील अनिल साखरे ने भी स्कूल के रुख का विरोध किया। उन्होंने कहा कि स्कूल को दस्तावेजों के बजाय बच्चे के एडमिशन को ज्यादा प्राथमिकता देनी चाहिए। साखरे ने कहा कि आरटीई के तहत 25 प्रतिशत सीटें गरीब बच्चों के लिए रखी गई हैं। इसको लागू करने के लिए मनपा ने प्रभावी व्यवस्था बनाई है।
सुनवाई के दौरान मनपा के वकील अनिल साखरे ने भी स्कूल के रुख का विरोध किया। उन्होंने कहा कि स्कूल को दस्तावेजों के बजाय बच्चे के एडमिशन को ज्यादा प्राथमिकता देनी चाहिए। साखरे ने कहा कि आरटीई के तहत 25 प्रतिशत सीटें गरीब बच्चों के लिए रखी गई हैं। इसको लागू करने के लिए मनपा ने प्रभावी व्यवस्था बनाई है।
आपसी चर्चा कर हल निकालने का आदेश
मामले से जुड़े तथ्य पर गौर करने के बाद न्यायमूर्ति भूषण गवई व न्यायमूर्ति रियाज छागला की खंडपीठ ने मामले से जुड़े सभी पक्षकारों को आपसी चर्चा के बाद प्रकरण का हल निकालने का कहा है और स्कूल के प्रतिनिधि व अभिभावकों को शिक्षा अधिकारी के सामने उपस्थित रहने का निर्देश दिया है और मामले की सुनवाई बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी है।
मामले से जुड़े तथ्य पर गौर करने के बाद न्यायमूर्ति भूषण गवई व न्यायमूर्ति रियाज छागला की खंडपीठ ने मामले से जुड़े सभी पक्षकारों को आपसी चर्चा के बाद प्रकरण का हल निकालने का कहा है और स्कूल के प्रतिनिधि व अभिभावकों को शिक्षा अधिकारी के सामने उपस्थित रहने का निर्देश दिया है और मामले की सुनवाई बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी है।
स्कूल प्रबंधन की दलील
स्कूल के वकील ने अदालत से कहा कि अभिभावकों द्वारा एडमिशन के लिए दिए गए दस्तावेज फर्जी हैं क्योंकि आवेदन में कुछ नाम लिखा है और जन्म प्रमाणपत्र में कुछ और नाम है। उन्होंने आरोप लगाया कि अभिभावकों का पता भी सही नहीं है। स्कूल ने तर्क दिया कि अभिभावकों का घर स्कूल से एक किलोमीटर से अधिक दूर है। इसलिए वे आरटीई के तहत एडमिशन के लिए पात्र नहीं हैं।