भाजपा का हिन्दी प्रेम

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ज्ञानेन्द्र शर्मा : प्रसंगवश

bjpएक बार तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह के साथ मैं रूस की यात्रा पर गया था। यात्रा के समापन पर दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन किया जिसमें रूसी विदेश मंत्री अपनी भाषा यानी रूसी में बोल रहे थे और एक राजनयिक उनके भाषण का तत्काल अंग्रेजी रूपांतर करता चल रहा था। बीच में हुआ यह कि रूसी विदेश मंत्री को अपने एक वाक्य का अनुवाद पसंद नहीं आया और उन्होंने अंग्रेजी में बोल रहे राजनयिक को टोककर उसमें संशोधन कराया। मतलब यह रूसी विदेश मंत्री अंग्रेजी भलीभंति जानते थे, लेकिन उन्होंने अंग्रेजी में बोलने के बजाय अपने देश की भाषा में बोलना पसंद किया था। यह था अपने देश से, अपने देश की भाषा से उनके प्रेम का अद्भुत नजारा, लेकिन अपने देश के नेताओं/मंत्रियों से कोई यह अपेक्षा नहीं कर सकता कि वे हिन्दी में बोलें। हां, यह जरूर है कि जहां हिन्दी की राजनीति करनी हो, वे हिन्दी भाषा में बोलते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी में भाषण दिया। सबको अच्छा लगा। मगर वे जब अपने देश में होते हैं तो अंग्रेजी में बोलने लगते हैं। अपने देश में रहते हुए वे लगातार अंग्रेजी में अपने भाषण दे रहे हैं। और तो और केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह तक अंग्रेजी में बोलने लग गए हैं। हाल ही में जयपुर में एक सम्मेलन में वे अंग्रेजी में बोले। मोदी जी तो लगातार बोल ही रहे हैं। अभी मुम्बई में मेक इन इंडिया कार्यक्रम में वे अंग्रेजी में बोले। दिक्कत इतनी भर नहीं है। अंग्रेजी जानने वाले देशवासियों की समस्या यह है कि उन्हें इन नेताओं से पूरी तरह विकृत अंग्रेजी में भाषण सुनने पड़ रहे हैं। वे इस तरह की अंग्रेजी बोलते हैं कि अंग्रेजी पढ़ने वाले बच्चे उन्हें सुन लें तो उनकी अंग्रेजी खराब हो जाय।
आखिर क्या मजबूरी है कि इन नेताओं को अपने ही देश में अंग्रेजी में भाषण देना पड़ रहा है और क्या मजबूरी है कि संघ परिवार अपने हिन्दी के कथित प्रेम के बावजूद इस पर चुप है? तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ईरान के अपने दौरे के समय वहां की संसद में हिन्दी में भाषण दिया था। लोगों को आनंद की अनुभूति हुई, लेकिन वे भी अपने देश की धरती पर अंग्रेजी में बोलने से बाज नहीं आते थे। मैंने उनसे पूछा था कि आप विदेश में होते हैं तो हिन्दी में बोलते हैं, लेकिन जब अपने देश में होते हैं तो अंग्रेजी में, ऐसा क्यों? कोई सटीक जवाब उनके पास नहीं था, सो वे बोले- आप तो खोजी पत्रकार हैं, पता करिए। !

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