मथुरा जेल में बंद डॉ. कफील पर लगा रासुका

लखनऊ : सीएए को लेकर एएमयू के छात्रों को भड़काने वाले गोरखपुर के डॉ. कफील की फिलहाल रिहाई संभव नहीं। दो दिन से परवाना न पहुंचने से उन्हें मथुरा जेल से बाहर नहीं निकाला गया था। शुक्रवार की सुबह परवाना पहुंचने के कुछ देर बाद ही रासुका लगाने की जानकारी दी गई। इससे उनकी रिहाई रोक दी गई है। अहम बात यह है कि डॉ.कफील के परिजन व रिश्तेदार रिहाई को लेकर मथुरा पहुंच गए थे। साथ ही मीडिया भी सक्रिय रहा, लेकिन ऐन वक्त पर परिजनों को रासुका लगाने की जानकारी दी गई। डीएम की संस्‍तुति पर शुक्रवार को थाना सिविल लाइन में डॉ कफील के खिलाफ रासुका के तहत मुकदमा दर्ज हो गया है। 12 दिसम्बर को एएमयू में बाबे सैयद पर सभा में डॉ. कफील ने छात्रों में सांप्रदायिक भावना भड़काते हुए दूसरे समुदाय के प्रति घृणा उत्पन्न करने वाला बयान दिया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भी टिप्पणी की थी। 13 दिसंबर को पुलिस ने डॉ. कफील के खिलाफ 153 आइटी एक्ट के तहत सिविल लाइंस थाने में मुकदमा दर्ज किया। 29 जनवरी को यूपी एसटीएफ ने डॉ. कफील को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया था। उसे अलीगढ़ लाया गया, जहां माहौल को देखते हुए एक घंटे के अंदर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में मथुरा जेल भेज दिया था। डॉ. कफील ने सीजेएम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की। अधिवक्ता इरफान गाजी ने बताया कि कोर्ट ने जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। उनसे 60 हजार के दो बॉंड भी भरवाए गए हैैं। एसीएम द्वितीय रंजीत सिंह के कोर्ट से छात्र नेताओं के खिलाफ जारी किए शांतिभंग के एक लाख के मुचलकों को जब्त करने के नोटिस जारी करने के मामले में विरोध शुरू हो गया है।

एएमयू छात्र नेता हम्जा सूफियान ने इसका विरोध किया है। सूफियान ने कहा है कि वह 15 दिसंबर की घटना के दिन शहर से बाहर थे। पिछले दिनों राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की टीम और अपराध शाखा के विवेचक को भी लिखित बयान देकर स्पष्ट कर दिया है। जिला प्रशासन और पुलिस के पास इसके सीसीटीवी फुटेज भी हैं, लेकिन इसके बाद भी प्रशासन बिना पक्ष सुने ही कार्रवाई कर रहा है। अब एसीएम द्वितीय के यहां से एक लाख के मुचलकों को जब्त करने का फैसला हुआ है। यह पूरी तरह गलत है। जिला प्रशासन अपने अधिकारों का दुुरुपयोग कर रहा है। किसी मासूम को फंसाया जा रहा है। एसीएम द्वितीय रंजीत सिंह के मुताबिक, शांतिभंग तोडऩे पर चार छात्र नेताओं की पहले की जमानत को निरस्त कर नया नोटिस जारी किया जा रहा है।