श्री श्री, बाबा और आई लव यू

- in प्रसंगवश
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ज्ञानेन्द्र शर्मा

प्रसंगवश
क्या आपको याद पड़ता है कि आपने कब से अपनी पत्नी से-‘आई लव यू’ नहीं कहा?
उत्तर 1: आज तक कभी नहीं कहा।
उत्तर 2: शादी के बाद से नहीं कहा।
उत्तर 3: शादी की सालगिरह पर कहा था।
उत्तर 4: पत्नी की बर्थडे पर कहा था।
उत्तर 5: अब तो कहने में शर्म सी आती है।
उत्तर 6: यह भी कोई सवाल हुआ? और कुछ नहीं है पूछने को?
उत्तर 7: यह तो ऐसे ही हुआ कि कोई पूछे कि आपने पत्नी को कबसे नहीं चूमा?
उत्तर 8: क्यों बताएं? यह सीक्रेट है।
उत्तर 9: कहने की जरूरत क्या है, यह तो अंडरस्टुड है।
उत्तर 10: अरे भैया, पिटवाओगे क्या?

आपको कौन सा उत्तर ठीक लगा? आप शायद यही कहेंगे कि उत्तर नम्बर 9 ही ठीक है। यानी पत्नी को ‘आई लव यू’ कहने की जरूरत क्या है, यह तो अंडरस्टुड है यानी मानी हुई बात है कि मैं अपनी पत्नी से प्रेम करता हूं। आखिरकार जिन लोगों ने कभी अपनी पत्नी से आई लव यू नहीं कहा तो इसका मतलब यह थोड़े ही है कि उन्हें प्यार नहीं है या कि वे नफरत करते हैं अपनी पत्नी से। फिर जिन्होंने शादी की सालगिरह पर या बर्थडे पर कहा तो लगेगा यह तो एक फार्मेल्टी यानी औपचारिकता भर थी। यह भी ध्यान देने की बात है जिक्र पत्नी का हो रहा है, गर्लफ्रेण्ड का नहीं। गर्लफ्रेण्ड से तो सुबह-शाम दसियों बार आई लव यू कहने की जरूरत होती है। आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर कहते हैं जिन्हें देश से प्रेम नहीं, वे देश से बाहर चले जायें। अब यही सवाल अगर देश के संदर्भ में पूछे जायं तो कैसा रहेगा? आखिर यह कैसे पता लगेगा कि किसी को देश से प्रेम है या नहीं। वैसे तो आप किसी से भी चलते चलाते ही पूछ लें कि आपको देश से प्रेम है तो यही उत्तर मिलेगा- हां है लेकिन अब बात श्री श्री ने कही है तो उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। लेकिन एक समस्या है- इस बारे में हम किसी से सवाल करें तो आखिर क्या करें? चलिए कोशिश करते हैं।
प्रश्न: आपको देश से प्रेम है?
उत्तर: बिल्कुल है।
प्रश्न: कैसे पता लगेगा कि आपको देशप्रेम है?
उत्तर: किसी को बताने की क्या जरूरत है, हमें देश प्रेम है तो है।
shri shriप्रश्न: श्री श्री रविशंकर कहते हैं कि जिन्हें देश से प्रेम नहीं है, वे देश से बाहर चले जाएं। यह बयान उन्होंने 6 अप्रैल 2016 को ऋषिकेश में दिया था। तो फिर कैसे तय होगा कि देश से बाहर किसको भेजना है? किस किस के पासपोर्ट जब्त करने हैं (माल्या व ललित मोदी के अलावा)? किसको देश निकाला देना है, किसकी नागरिकता छीननी है, किस-किस को एक्सपोर्ट कर देना है? कैसे तय होगा?
उत्तर: एक तरीका है। लाटूर चले जाइए, बुन्देलखण्ड के महोबा इलाके में चले जाइए। वहां लोगों को पीने को पानी नहीं मिलता। जो थोड़ा सा मिलता है यह ऐसा कि आप शहर के लोग उसे पीना तो दूर छूना भी पसंद नहीं करेंगे। उनसे पूछिए उन्हें देश प्रेम है?
दूसरा उत्तर: देवेन्द्र फड़नवीस भी तो कहते हैं कि जो भारत माता की जय नहीं बोलता, उसे देश में रहने का हक नहीं, तो उनके राज्य के मराठवाड़ा में चले जाइए, जहां लोगों को रोटी नहीं मिलती। उनकी भारत माता तो रोटी ही है। उनसे ये सवाल करिए तो देखिए वे क्या उत्तर देते हैं।
कुछ और लोगों से ये सवाल करके देखिए:-
प्रश्न: आपने भारत माता की जय कब से नहीं बोली?
उत्तर: बोलने की क्या जरूरत, यह तो अन्डरस्टुड है।
प्रश्न: तो फिर कैसे तय होगा कि किसे भारत से बाहर भेजना है?
उत्तर: यह तो श्री श्री से ही पूछना चाहिए।
बात ठीक भी है लेकिन श्री श्री के मुंह से बात निकली है तो उसमें दम तो होगा ही। 2014 के लोकसभा चुनाव के समय उन्होंने नरेन्द्र मोदी के पक्ष में अपील जारी की थी और मोदी जी जीत गए। 2014 में उन्हें जो 31 प्रतिशत देशवासियों के वोट मिले थे, उसमें कुछ प्रतिशत तो श्री श्री की वजह से मिले होंगे। अब श्री श्री से यह तो कोई पूछेगा नहीं कि देश प्रेमी किसे माना जाएगा? क्या केवल उसे जो भारतमाता की जय बोले? जो जय हिंद बोले, उसे नहीं? लव यू इंडिया कहे, उसे नहीं? सटीक जवाब दिए हैं बाबा रामदेव ने और दारुल उलूम ने। बाबा रामदेव ने ऐसा बयान दे दिया कि पूछिए मत। वे भारत माता न बोलने वालों के सिर काटने की बात कह रहे हैं। ऐसी हिंसक बातें करने वाले बाबा रामदेव के बारे में अपने प्रधानमंत्री और उनके अनुयायी चुप हैं। पता नहीं क्यों? यह जरूर है कि श्री श्री की तरह बाबा ने भी 2014 के चुनाव में मोदी जी की मदद की थी। वैसे बाबा रामदेव सुर्खियों के बिना रह भी नहीं पाते। एक बार जरूर चूक गए थे। रामलीला मैदान में उन्होंने एक जलसा किया था और जब पुलिस ने उनकी घेराबंदी की तो उन्होंने वहां से चुपचाप भाग निकलने के लिए किसी लड़की की सलवार कमीज पहन ली थी। उसका कोई सटीक जवाब वे आज तक नहीं दे पाए। एक बार वे लंदन गए तो हीथ्रो हवाई अड्डे पर उनसे 6 घंटे तक पूछताछ की गई। क्यों हुई, वे रामलीला मैदान की घटना की तरह कोई ठीक उत्तर नहीं दे पाए। उन्होंने यह जरूर कहा कि भारत में बैठी विदेशी महिला के कहने पर ये हुआ। लेकिन बाबा रामदेव की बात पर भी यह देखना होगा कि यदि बाबा को मौका मिल जाय तो किस-किस की गर्दन काटना पसंद करेंगे? वे कैसे तय करेंगे कि कौन कौन देश भक्त नहीं है? वे कैसे पता लगाएंगे कि कौन-कौन ऐसा है तो भारत माता की जय जानबूझकर नहीं बोलना चाहता? उधर दारुल उलूम देवबंद ने रही सही कसर पूरी कर दी। उसने कम विवादों से भरा काम नहीं किया है।
उन्होंने एक फतवा ही जारी कर दिया और कह दिया कि मुसलमानों को भारत माता की जय कहने की इस्लाम इजाजत नहीं देता। उन्होंने कह दिया कि इस्लाम अनुयायिओं के लिए भारत माता की जय बोलना जायज नहीं है। क्यों? उनका उत्तर है कि बेशक हम हिन्दुस्तान को अपना मादरेवतन मानते हैं परन्तु भारत माता की जय बोलना यानी उसे देवी मानना, नहीं हो सकता। अब कोई किसको क्या समझाए? हैं सब समझदार वरना यह सवाल तो पूछा ही जा सकता था कि अब भारत देश मादरेवतन है तो उसकी जय बोलने में क्या हर्ज है? अगर भारत मदर इंडिया है तो उसकी जय बोलना अपराध है? हां अगर वे यह कहते कि जबरन उनसे न बुलवाया जाय तो शायद बात जायज लगती। लेकिन सबको अपनी अपनी सुर्खियां पैदा करनी हैं, सो वे करने में लगे हुए हैं। ’

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