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बड़ी खबर : सैन्य संकट से जूझ रहा अमेरिका, जंग हुई तो चीन, रूस से हार सकता है

वॉशिंगटन : अमेरिका की एक संसदीय पैनल ने चेतावनी दी कि अमेरिका सुरक्षा और सैन्य संकट से जूझ रहा है। अगर जंग हुई तो अमेरिका, चीन और रूस से हार सकता है। कांग्रेस (संसद) ने नेशनल डिफेंस स्ट्रैटजी कमीशन को डोनाल्ड ट्रम्प की नेशनल डिफेंस स्ट्रैटजी (एनडीएस) का अध्ययन करने को कहा था। एनडीएस से ही अमेरिका का चीन और रूस से शक्ति संतुलन तय होता है। स्ट्रैटजी कमीशन में कई पूर्व डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन अफसर हैं। उनके मुताबिक, अमेरिकी सेना के बजट में कटौती की जा रही है। सैनिकों को मिलने वाली सुविधाओं में भी कमी की गई है। वहीं चीन और रूस जैसे देश अमेरिका की ताकत कम करने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका की सेना ही उसे दुनिया में सबसे शक्तिशाली बनाती है। लेकिन अब सैन्य ताकत में ही गिरावट आ रही है। 21वीं सदी में अमेरिका का फोकस आतंकरोधी अभियानों पर ज्यादा है। लिहाजा हमारा मिसाइल डिफेंस, साइबर-स्पेस ऑपरेशन, जमीन और पनडुब्बी से होने वाले हमले को रोकने की क्षमता कम हुई है।

सक्षम प्रतिद्वंद्वियों खासकर चीन और रूस के खिलाफ सैन्य अभियानों के लिए योजना बनाने और उनके संचालन के लिए कौशल की जरूरत है, लेकिन अमेरिका इसमें कमजोर पड़ रहा है। दोनों बड़ी पार्टियों (डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन) ने रणनीति पर कुछ खास काम नहीं किया। 2011 से ही सैन्य बजट में कटौती होने लगी। नेशनल डिफेंस स्ट्रैटजी के मुताबिक, पेंटागन सही दिशा में काम कर रहा है। हालांकि पैनल की रिपोर्ट में कहा गया है कि अब भी बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका दुश्मनों की तरफ से मिल रही चुनौतियों से कैसे निपटेगा? पूरे एशिया, यूरोप में अमेरिकी प्रभाव में कमी आई है। सैन्य संतुलन भी बदला है, इसके चलते जंग का जोखिम बढ़ गया है। आने वाली लड़ाइयों अमेरिकी सेना को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है। रूस-चीन के साथ जंग में अमेरिका की जीत भी हो सकती है, वह हार भी सकता है। अमेरिका को दो या तीन मोर्चों पर एक साथ लड़ना भी पड़ सकता है। इस साल पेंटागन ने सेना के लिए 700 बिलियन डॉलर (करीब 50 लाख करोड़ रुपए) के बजट का ऐलान किया है। यह रूस और चीन के सम्मिलित बजट से ज्यादा है। अमेरिका को अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए यह बजट अभी भी काफी कम है।

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