जीवनशैली

रोजाना दो बॉडी पार्ट्स का व्यायाम करती हैं नेहा धूपिया

नेहा जिम में एक्सरसाइज करके घंटों पसीना बहाती हैं। नेहा जिम एक्सरसाइज के साथ ही योगा व अन्य तरह के व्यायाम भी करती हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री नेहा धूपिया अपनी बॉडी को फिट रखने के लिए जिम एक्सरसाइज करती हैं। नेहा जिम में एक्सरसाइज करके घंटों पसीना बहाती हैं। नेहा जिम एक्सरसाइज के साथ ही योगा व अन्य तरह के व्यायाम भी करती हैं। नेहा के मुताबिक वे अपनी फिटनेस के लिए हफ्ते में पांच दिन वर्कआउट करती हैं। वे हर दिन शरीर के दो हिस्सों के लिए व्यायाम करती हैं जैसे चेस्ट और बैक, कंधे और टांगे, ट्राईसेप्स और बाईसेप्स की एक्सरसाइज के लि अलग-अलग दिन निर्धारित करके एक्सरासाइज करती हैं। इसके अलावा नेहा रोजाना कम से कम 20मिनट साइक्लिंग व कार्डियो एक्सरसाइज करती हैं। नेहा हफ्ते में एक दिन योगा और तीन दिन पिलेट्स करती हैं। उन्हें स्वीमिंग और स्क्वैश खेलने का भी शौक है। शहर से बाहर शूटिंग के लिए जाते समय वे स्नीकर्स और योगा मैट हमेशा अपने साथ रखती हैं।

नेहा का खानपान –
नाश्ता : अंडे, बादाम, दूध, कॉर्नफ्लेक्स, इडली और वेजीटेबल सूप
लंच : रोटी, दाल, चावल, सब्जी व दही
डिनर : सूप, सलाद, ग्रिल्ड सब्जी

इसमें कैल्शियम, सिलीनियम, मैगनीशियम, पोटेशियम, फॉस्फोरस जैसे खनिजों के साथ-साथ विटामिन ई और बी कॉम्प्लेक्स भी पाए जाते हैं। जिन लोगों को कब्ज की समस्या रहती है, उन्हें गेहूं की चोकर युक्त रोटी खानी चाहिए। चोकर की रोटी पानी ज्यादा सोखती है और पेट में मल को सूखने नहीं देती। दरअसल गेहूं के चोकर में अघुलनशील फाइबर होता है, जिसे सैल्यूलोज कहते हैं। इसमें कैल्शियम, सिलीनियम, मैगनीशियम, पोटेशियम, फॉस्फोरस जैसे खनिजों के साथ-साथ विटामिन ई और बी कॉम्प्लेक्स भी पाए जाते हैं। चोकर आंतों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ कैंसर से भी रक्षा करता है। यह अमाशय के घाव को ठीककर टीबी से भी रक्षा करता है। चोकर हृदय रोग से बचाने के साथ-साथ कोलेस्ट्रोल की समस्या नहीं होने देता। नहाने के पानी में आधा कटोरी चोकर मिलाकर स्नान करने से चर्मरोग में भी राहत मिलती है।

ऐसे करें प्रयोग –
गेहूं के एक किलो आटे में 100 ग्राम चोकर मिला लें और इस आटे की रोटी बनाकर खाएं। इससे खाना न पचने की समस्या दूर होगी और आपको कब्ज से छुटकारा मिलेगा। 5 कप पानी में 25 ग्राम चोकर, तुलसी के 10-11 पत्ते व मुनक्के के 10-11 दाने डालकर अच्छी तरह उबालें। मीठा करने के लिए इसमें शक्कर डाल लें। चोकर वाली स्वादिष्ट चाय लाभ देगी। जितना चोकर लें, उससे दोगुना पानी डालकर एक घंटे के लिए रखे दें। नहाने से पहले इसे पूरे शरीर पर मसलने से त्वचा मुलायाम व चमकदार होगी। इन तरीकाें काे अपनाने के बाद बदल जाएगी आपकी जिंदगी, ऊर्जा से भरा रहेगा आपका दिन, नहीं हाेगी थकान कई लोग अक्सर शिकायत करते हैं कि यार मैं तो थक गया। बार-बार और बिना काम के ही होने वाली थकान से बचना चाहते हैं तो इन बातों पर ध्यान दें :-

  1. शारीरिक ऊर्जा को बरकरार रखने के लिए प्रोटीन युक्त नाश्ता जरूरी होता है। प्रोटीनयुक्त व रेशेदार नाश्ते से ब्लड शुगर संतुलित रहता है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। सुबह का नाश्ता अच्छा हो तो दिन की शुरुआत भी अच्छी होती है।
  2. दिन भर थोड़ा-थोड़ा पानी या कोई भी तरल पदार्थ पीते रहें। पानी शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालकर शारीरिक प्रणाली में नई ऊर्जा भरता है। शर्बत, फलों का रस, छाछ व नारियल पानी आदि पीना चाहिए।
  3. कार्बोहाइड्रेट से शरीर को ऊर्जा मिलती है। ऐसे फल जरूर खाएं, जिसमें ग्लूकोज पर्याप्त मात्रा में हो, जैसे संतरा, मौसमी, लीची आदि। चीनी का प्रयोग न करें। दूध में शहद डालकर पिएं या फिर केले का शेक पीना भी बेहतर विकल्प है। दिन में कम से कम 10 मिनट तक टहलना सेहत के लिए बहुत जरूरी होता है।
  4. 7-8 घंटे की नींद जरूर लें ताकि अगले दिन के लिए आपको पर्याप्त ऊर्जा मिले। जब भी थकान महसूस हो तो 15-20 मिनट की झपकी जरूर लें। नींद पूरी न होने से वजन भी बढ़ता है और थकान भी जल्दी होती है।
  5. महिलाओं की तुलना में पुरुष दर्द के प्रति ज्यादा संवेदनशील हाेते हैं एक शोध में ये बात सामने आर्इ
  6. पुरुषों की तुलना में महिलाएं सहन किए गए ज्यादा दर्द को जल्दी भूल जाती हैं। चूहे व मानव पर किए गए एक शोध में इसकी पुष्टि हुई है।
  7. कनाडा की टोरंटो मिसिसॉगा विश्वविद्यालय (यूटीएम) के शोधकर्ताओं के शोध में पता चला है कि महिला व पुरुष पूर्व के कष्टदायी अनुभवों को अलग-अलग तरीके से याद रखते हैं।
  8. पुरुष पूर्व के कष्टदायी अनुभवों स्पष्ट तौर पर याद रखते हैं, जबकि महिलाएं दर्द के प्रति बेपरवाह रवैया अपनाती हैं। इसी तरह के परिणाम नर व मादा चूहों में देखने को मिले।
  9. पुरुष जब दर्द का अनुभव दोबारा करने पर अतिसंवेदनशील रवैया दिखाते हैं, लेकिन महिलाएं अपने दर्द के पूर्व अनुभव से तनाव नहीं लेती हैं।
  10. यूटीएम के सहायक प्रोफेसर लोरेन मार्टिन ने कहा, ”अगर दर्द की याद, दर्द के लिए प्रेरक का कार्य करती है और हम समझते हैं कि दर्द को कैसे याद रखा जाए तो यादाश्त पर क्रियाविधि का इस्तेमाल करके हम कुछ पीड़ितों की मदद करने में समर्थ हो सकते हैं।’

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