जीवनशैली

अगर समाज लड़कों को वैसे ट्रीट करने लगे जैसे लड़कियों को करता है तो क्या होगा ?

लड़कियों और लड़कों में यूं तो कोई अंतर नहीं होता, आज के वक्त में लड़कियां भी खुद को साबित कर रही हैं और कईं मायनों में लड़कों को भी पछाड़ते हुए आगे बढ़ चुकी हैं। लेकिन फिर भी समाज ने कईं ऐसे दायरे बनाए हुए हैं जो लड़कियों के लिए अलग है और लड़कों के लिए काफी हद तक अलग है या यूं कहे कि ना के बराबर हैं।

समाज के इन दोहरे मापदंडों के संजीदा पहलू पर ना जाते हुए फिलहाल आज मैं आपको ये बताने जा रही हूं कि अगर समाज लड़कों को वैसे ट्रीट करने लगे जैसे लड़कियों को करता है तो क्या होगा !

जी हां, ये शीर्षक पढ़ना आपके लिए जितना रोचक रहा है, यकीन मानिए जब आप इस पूरे आर्टिकल को पढ़ेंगे तो आप भी हंसने पर मजबूर हो जाएंगे। वैसे, अगर आप लड़की हैं तो आपको ये लेख पसंद आएगा, इस बात में कोई शक नहीं है और अगर आप लड़के हैं तो ज़रा एक मिनट रूक कर ज़रूर सोचिए कि लड़कियों को क्या महसूस होता है?

1- रात में घर से बाहर जाना, ना बाबा ना-

ज़रा सोचिए अगर लड़कों को लड़कियों की तरह ट्रीट किया जाने लगे तो रात में जब लड़कें घर से बाहर जाने के लिए मम्मी से परमिशन मांगेंगे तो या तो वो मना कर देंगी या फिर कहेंगी कि अपनी बहन को साथ लेकर जाओ ! आखिर सेफ्टी भी तो ज़रूरी है ना

2- कपड़ों को लेकर होंगी कुछ ऐसी बातें-

अगर ऐसा होने लगे तो लड़कियां तो आराम से बिकनी और शॉर्ट ड्रेस में एज्वॉय कर पाएंगी लेकिन लड़कों को स्लीवलेस और शॉर्ट्स पहनते वक्त कईं सवालों का जवाब देना होगा।

3- घर का काम भी तो सीखों –

लड़कों को गाहे बगाहे ये सुनने को मिल ही जाएगा कि क्या करना इतना पढ़ कर, घर के कुछ काम सीखो वरना क्या होगा तुम्हारा !

4- दोस्तों के साथ नाइटआउट, नॉट अलॉउड-

बिल्कुल, अगर समाज में लड़कों से वो बर्ताव किया जाने लगे जो लड़कियों के साथ होता है तब लड़कों को पता चलेगा कि नाइटआउट की परमिशन लेने के लिए कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं !

5- बिदाई में रोते हुए कैसे लगेंगे लड़कें-

अरे हां ! अगर सब कुछ पलट ही जाएगा तो फिर बारात लेकर लड़कियां आएंगी और लड़के बिदाई में रोते हुए अपने बाबुल का घर छोड़ेंगें। और फिर फिल्मों के टाइटल कुछ ऐसे होंगे ‘दूल्हा हम ले जाएंगे’

6- थोड़ा तो एडजस्ट करो-

लड़कियों को तो अक्सर ये सुनने को मिल ही जाता है तो फिर अगर लड़के, लड़कियों के स्थान पर होंगे तो उन्हे भी ये सुनना ही पड़ेगा।

7- ज़रा संभल के ! दुपट्टा ना सरक जाए-

दुपट्टा सरकने पर जब हर तरफ से लड़कियों की नज़रें आपको ऊपर से नीचे घूंरेंगी तब समझेंगे आप कि लड़कियों को कैसा लगता है जनाब ।

उम्मीद है कि आपको ये आर्टिकल पंसद आया होगा। ये बातें यूं तो बहुत छोटी हैं लेकिन असल में ये कुछ बदलावों के बारे में बताती हैं जिनका अब आना बहुत ज़रूरी है।

जब लड़कों और लड़कियों के बीच में हम फर्क करना बंद करेंगे,सड़कों पर लड़कियां बिना किसी डर और घबराहट के साथ चल सकेंगी, जब कपड़ें किसी लडकी का कैरेक्टर तय नहीं करेंगे, असल बदलाव तब आएगा ।

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