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अब तीन लाख किसानों के बच्चों को मिलेगा कृषि उद्योगों का प्रशिक्षण

मुंबई.मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि प्रदेश में तीन लाख किसानों के बच्चों को खेती और कृषि आधारित उद्योगों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।
अब तीन लाख किसानों के बच्चों को मिलेगा कृषि उद्योगों का प्रशिक्षण
– रविवार को मुख्यमंत्री के राज्य के सूचना एवं प्रचार महानिदेशालय (डीजीआईपीआर) के कार्यक्रम मी मुख्यमंत्री बोलतोय (मैं मुख्यमंत्री बोल रहा हूं) का विद्यार्थियों से संवाद के दूसरे अंक का प्रसारण हुआ।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि रोजगार और स्वंरोजगार के लिए कौशल्य विकास जरूरी है। इसके लिए अप्रेंटिस के कानून में बदलाव किया है। इससे महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा अप्रेंटिस बन रहे हैं। अप्रेंटिस के पदों के उम्मीदवारों को ट्रेनिंग दी जा रही है।

– राज्य में पहले साल 69 हजार अप्रेंटिस हुए। जबकि पिछले साल एक लाख अप्रेंटिस थे। आने वाले समय में अप्रेंटिस की संख्या में बढ़ोतरी होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि विभिन्न उद्योग समूहों से 24 सामंजस्य करार हुए हैं। अभी तक 8 लाख युवकों को विशेष कौशल्य प्रशिक्षण देने का काम शुरू हो गया है।
– मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व बाजार की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अब पुस्तक के ज्ञान के साथ-साथ कंपनियों में जाकर प्रत्यक्ष काम के बारे में जानकारी हासिल करना महत्वपूर्ण हो गया है।
– उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एविएशन क्षेत्र में करियर के लिए बड़े अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कहा कि आगामी सालों में औरंगाबाद की पहचान ऑटो क्लस्टर के रूप में होगी।
 
हर पांच साल में पाठ्यक्रमों की समीक्षा आवश्यक
– मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों के विकास प्रारूप को हर दस साल में तैयार किया जाता है। उसी तर्ज पर बदली परिस्थिति और शिक्षा जगत में होने वाले संभावित बदलाव को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रमों का हर पांच साल में समीक्षा करना आवश्यक है।
– उन्होंने कहा कि नए विश्वविद्यालय कानून के अनुसार विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रमों की प्रासंगिकता जानकर उसमें बदलाव करना संभव है। विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों और उद्योग समूहों की आवश्यकता में समन्वय रखने की जरूरत है।
 
खेल को भी चुना जा सकता है करियर
– मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह से पढ़ाई में अच्छे होने पर विद्यार्थी बेहतर करियर बना सकते हैं उसी तरह से खेल कूद में भी रूचि लेकर छात्र खेल के क्षेत्र को करियर के रूप में अपना सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अच्छे खिलाड़ी बन सके। इसके लिए सरकार प्रोत्साहन दे रही है।

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– शिक्षा कानून के अनुसार सभी स्कूलों में खेल का मैदान अनिवार्य किया गया है। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सफलता पाने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरियों में समावेश किया जा रहा है।

– मुख्यमंत्री ने कहा कि महाविद्यालयों को स्वायत्ता दिए जाने पर अच्छी तरह से विकास हो सकता है। उन्होंने कहा कि बिट्स पिलानी जैसी शैक्षणिक संस्था को स्वायत्त दर्जा है। इस कारण वह संस्था विकास कर सकी है।

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