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आज ताजमहल और लाल किला का दीदार करने आगरा आ रहे अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति…

महान साहित्यकार रवींद्र नाथ टैगोर की अमर कहानी काबुलीवाला में भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों का बेहतरीन वर्णन था। आज ताजमहल और लाल किला का दीदार करने आगरा आ रहे अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति...

अब एक गैर सरकारी पहल के जरिए दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। खास बात यह है कि इसकी इबारत खुद अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ताज नगरी आगरा में लिखेंगे। 

करजई की यह यात्रा अमर उजाला और गैर सरकारी संस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ पीस एंड कॉनिफक्ट स्टडीज (आईपीसीएस) की संयुक्त विचार श्रृंखला लिविंग हिस्ट्री की पहली कड़ी के तहत आयोजित की गई है।

आईपीसीएस के निमंत्रण पर हामिद करजई 20 अप्रैल को दिल्ली पहुंचे। शनिवार को वह आगरा पहुंचकर पूर्व राजनयिकों के साथ ताजमहल और आगरा किला का दीदार करेंगे। 

अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई इसके बाद 22 अप्रैल को अमर उजाला-आईपीसीएस की लिविंग हिस्ट्री श्रृंखला की पहली कड़ी को संबोधित करेंगे। 

इस दौरान दोनों देशों के रिश्तों के महत्व और दक्षिण एशिया में शांति स्थापना में दोनों की भूमिका पर विचार रखेंगे। श्रोताओं से संवाद भी करेंगे। 

भारत का दोस्त माना जाता है।

इसके साथ ही अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में भारत के योगदान पर भी विचार-विर्मश होगा। अगले दिन आगरा के सेंटपीटर्स स्कूल में बच्चों के साथ संवाद कार्यक्रम के बाद दिल्ली लौट जाएंगे। अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई को दक्षिण एशिया की राजनीति में कद्दावर राजनेता माना जाता है।

12 सालों तक सत्ता में रहने के बाद भी उन्होंने भारत-अफगान रिश्तों और दक्षिण एशिया में शक्ति के हस्तक्षेप जैसे मुद्दों पर अपनी सक्रियता बनाए रखी। उन्हें भारत का दोस्त माना जाता है। उनकी शिक्षा शिमला में ही हुई है। 

 
 
 

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