अजब-गजब

क्या आप जानते है इस मंदिर में आकर मृत व्यक्ति भी हो जाता है जिंदा, जानें हैरान कर देने वाला रहस्य

प्राचीन काल से भारत को अनेक धार्मिक और रहस्यमय तीर्थ स्थलों के लिए जाना जाता है। यहां पर हर धर्म के लिए अलग-अलग मंदिर,तीर्थ स्थल उपलब्ध हैं, जिनका भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। यहां लोगों में भगवान के प्रति आराधना, पूजा-पाठ करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। घर में सुख-समृद्धि के लिए तो कोई अपने भाग्य को बदलने के लिए भगवान की आराधना करते हैं। हजारों सालों से लोग भारत में स्थित तीर्थ स्थानों की यात्रा करते आ रहे हैं। भक्त यहां अपनी मनोकामनाओं को लेकर हजारों मील की यात्रा तय करके भगवान के दर्शन के लिए जाते हैं। जिससे कि उनकी मुरादें पूरी हों। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे चमत्कारी स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं यहां पर मृत व्यक्ति भी फिरसे जीवित हो जाता है। आइये जानते हैं इस रहस्यमयी स्थान के बारे में।

चमत्कारी शिवलिंग
जन्म और मृत्यु दोनों ही भगवान के अधीन हैं अगर भगवान चाहे तो प्रक्रृति को भी उनके चमत्कार के आगे झुकना पड़ता है। क्योंकि भगवान किसी भी नियम को बदल सकते हैं। ऐसी ही आश्चर्यजनक और रोचक मान्यता है देहरादून से 128 कि.मी की दूरी पर खूबसूरत प्रकृति की वादियों में स्थित लाखामंडल गांव के चमत्कारी शिवलिंग को लेकर, ये मंदिर समुद्रतट से करीब 1372 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। ये जगह प्राचीन गुफाएं और शिव मंदिर के प्राचीन अवशेषों से घिरी है, यहां दुखाई के दौरान अलग-अलग प्रकार के प्राचीन काल के हजारों शिवलिंग भी मिले हैं।

इस चमत्कारी शिवलिंग मंदिर के सामने ही पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके दो द्वारपाल खड़े हैं। मान्यता है कि इस शिवलिंग मंदिर में किसी मृत व्यक्ति को इन द्वारपालों के सामने रखने के बाद मंदिर का पुजारी उस शव पर पवित्र जल छिड़कता है तो कुछ समय के लिए उस शव में फिरसे जान आ जाती है। वह इंसान फिरसे जिंदा होने के बाद भगवान का नाम लेता है। उसके बाद उस व्यक्ति को गंगाजल पिलाया जाता है। गंगाजल ग्रहण करने के तुरंत बाद उस व्यक्ति की आत्मा फिरसे शरीर को त्याग देती है। इसके पीछे का रहस्य क्या है, लोग आज तक इससे अनजान हैं।

महामंडलेश्वर शिवलिंग
आज इस चमत्कारी शिवलिंग को महामंडलेश्वर शिवलिंग के नाम से जाना जाता है। इस शिवलिंग में जाने से मृत व्यक्ति भी जीवित हो जाता है इसके साथ ही इस शिवलिंग से कुछ और चमत्कारी रहस्य भी जुड़े हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। मान्यता है कि जो महिला पुत्र प्राप्ति के उद्देश्य से महाशिवरात्रि की रात को भगवान शिव का व्रत करके इस मंदिर के सामने मुख्य द्वार पर बैठकर शिवलिंग के दीपक को एकटक देखने के साथ शिवमंत्र का जाप करती है, तो उस महिला को पुत्र की प्राप्ति होती है।

जब आप इस चमत्कारी शिवलिंग पर जलाभिषेक सकते हैं तो इस शिवलिंग में आपको अपने चेहते की आकृति साफ दिखाई देती है। वहीं स्थानीय लोगों की मान्यता है कि इस मंदिर में आने वाला कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं जाता। इस मंदिर में आकर भगवान शिव की आराधना करने से आपको सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

निर्माण
इस चमत्कारी शिवलिंग का संबंध महाभारत काल से है। महाभारत के समय पाडंवों के चचेरे भाई कौरवों ने उनको जिंदा आग के हवाले करने के लिए यहीं पर लाक्षागृह बनवाया गया था। मान्यता है कि अपने अज्ञातवास के समय युधिष्ठर ने खुद यहां पर शिवलिंग की स्थापना की थी। आज ये शिवलिंग महामंडेश्वर के नाम से प्रसिद्ध है। युधिष्ठिर ने इस स्थान पर शिवलिंग की स्थापना के साथ-साथ एक अद्भुत मंदिर का निर्माण भी कराया था। इस मंदिर में शिवलिंग के सामने पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके दो द्वारपाल खड़े हुए हैं। जो इस मंदिर की सुरक्षा करते हैं। जिसमें से एक द्वारपाल का एक हाथ कटा हुआ है। इस मंदिर से अनेक रहस्य जुड़े हुए हैं जिनमें से एक है, मृत व्यक्ति का फिरसे जीवित होने का रहस्य जिसके बारे में आजकत कोई भी जान नहीं सका।

कैसे पहुंचें
रेल मार्ग- देहरादून के रेलवे स्टेशन से लाखामंडल गांव के लिए रेल मार्ग जाता है। लाखामंडल गांव पहुंचने के लिए देहरादून से आपको आसानी से बस मिल जाएगी। देहरादून से लाखामंडल गांव की दूरी 128 कि.मी है। सड़क मार्ग- लाखामंडल गांव देहरादून से 128 कि.मी की दूरी पर स्थित है। लाखामंडल गांव जाने के लिए देहरादून से सड़क मार्ग जाता है।

वायु मार्ग– लाखामंडल गांव पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा देहरादून है। देहरादून, लाखामंडल गांव से 128 कि.मी की दूरी पर स्थित है। देहरादून हवाई अड्डे से बस लेकर आसानी से लाखामंडल गांव पहुंच सकते हैं।

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