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पंजाब के बाद हरियाणा में फैल रही नशे की जड़ें, शोध में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

पंजाब के बाद हरियाणा में नशे की जड़ें गहरी होती जा रही हैं। वर्तमान में नशा करने वाले 15 फीसद युवा ऐसे हैं, जिन्हें बार-बार नशे की जरूरत होती है। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय हिसार (जीजेयू) की मनोवैज्ञानिक विभाग की एक शोधार्थी के शोध में सामने आया है कि नशे की शुरुआत के पीछे सबसे बड़ा कारण अभिभावकों या माता-पिता का अपने बच्चों के साथ संवाद कम होना है।

अभिभावकों द्वारा बच्चों को समय नहीं दिए जाने के कारण बच्चे अपने दोस्तों के प्रभाव में आ जाते हैं और बहकावे में आकर गलत निर्णय ले लेते हैं। युवा सोचने लगते हैं कि दोस्ती के लिए नशा जरूरी है। वहीं जो युवा सकारात्मक गतिविधियों जैसे किसी भी तरह के खेल, शौक को पूरा करने, सांस्कृतिक व सामाजिक गतिविधियों में शामिल हैं, उनमें नशे की लत काफी कम पाई गई।

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पंजाब के बाद हरियाणा में फैल रही नशे की जड़ें, शोध में सामने आए चौंकाने वाले तथ्ययुवाओं में हैं गलत अवधारणा

गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिक विभाग के चेयरमैन डॉ. संदीप राणा के मुताबिक युवाओं के मन में तरह तरह की अवधारणाएं होती हैं, जिनके आधार पर वे नशा करते हैं, लेकिन शोध में उनकी सभी अवधारणाएं गलत साबित हुई हैं। विभाग की शोधार्थी पुष्पा द्वारा किए गए इस शोध में प्रदेश भर से कुल 600 युवाओं से बातचीत की गई, जो विभिन्न संस्थानों में पढ़ते हैं, जिनमें से 300 लड़कियां थी। कुल 600 युवाओं में से 15 फीसद यानि 90 युवा ऐसे थे जिन्हें बार-बार नशे की जरूरत होती थी। इन 90 युवाओं में 70 लड़के और 20 लड़कियां शामिल थी।

युवाओं में अवधारणाएं और उनकी हकीकत 
अवधारणा : युवा सोचते हैं कि नशे से तनाव व चिंता दूर होती है।
हकीकत : नशे के आदी युवाओं में चिंता, तनाव, अवसाद बढ़ता है और स्वयं को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाने का व्यवहार बढ़ जाता है।

अवधारणा : कभी-कभी करने से कोई फर्क नहीं पड़ता।
हकीकत : एक बार नशा करने से मस्तिष्क में बदलाव होने लगता है, जो दोबारा नशा करने के लिए प्रेरित करने लगता है और धीरे-धीरे शारीरिक जरूरत बन जाता है।

अवधारणा : दोस्तों के साथ के लिए नशा जरूरी है।
हकीकत : नशे की आदत के बाद व्यक्ति अकेला पड़ जाता है। उसके दोस्त व परिवार उसका साथ देना छोड़ देते हैं और दोनों एक दूसरे से दूर हो जाते हैं।

अवधारणा : आत्मविश्वास बढ़ेगा व ध्यान केंद्रित करने में मदद होगी।
हकीकत : नशे से दोनों का नुकसान होता है। इससे मस्तिष्क के सभी केंद्रों पर प्रभाव पड़ता है, जिनकी वजह से धीरे धीरे आत्मविश्वास कमजोर पड़ता जाता है।

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अवधारणा : एक बार आजमाने से कुछ नहीं होता।
हकीकत : एक बार नशा करने से ही शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक लेवल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और लत लगने के चांस बढ़ जाते हैं।
वो कारक जिनके कारण अधिकांश युवा नशा नहीं करते

– जो युवा तनाव प्रबंधन के बारे में थोड़ा बहुत जानते थे।
– स्पोट्र्स फिजिकल आदि गतिविधियों में भाग लेने वाले।
– जिनकी खाना खाने की आदत सही थी।
– शौक, सामाजिक दायित्वों आदि पर ध्यान देने वाले।
– जिन लोगों ने लक्ष्य तय किया हुआ था और उसी के लिए मेहनत कर रहे थे।
– जहां परिवार या माता- पिता से बच्चों का संवाद अच्छा था।

पारिवारिक संवाद नहीं होने सहित कई कारणों से युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है। इसलिए हमें पारिवारिक व शैक्षिक स्तर पर उन्हें बेहतर विकल्प उपलब्ध करवाने की जरूरत है। इसी से युवाओं को नशे के प्रति बढ़ते आकर्षण से दूर किया जा सकता है। माता-पिता का भी अपने बच्चों के साथ संवाद करते रहना जरूरी है।

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