स्वास्थ्य

पेंसिल या चॉक खाने का करता है मन! समझ लें खून की है कमी

कल्पना अय्यर का वजन 82 किलोग्राम है और उम्र 44 साल. बिजनेस एग्जिक्यूटिव कल्पना थकान से चूर रहती थीं. उन्हें सांस लेने में तकलीफ होती थी और कभी-कभी सीने में दर्द की शिकायत भी रहती थी. ऐन्जाइना (दिल में दर्द) की आशंका से घबराकर वे एक कार्डियोलॉजिस्ट के पास गईं.

डॉक्टर ने उनके दिल को तंदुरुस्त पाया और कुछ दूसरा ही मामला सामने आया. डॉक्टर ने सारे टेस्ट कराए और पता चला कि उनका हीमोग्लोबिन (एचबी) काउंट 7 g/dl था, जबकि किसी भी सामान्य औरत के लिए यह काउंट 12 g/dl होना चाहिए. आगे की जांच से मालूम हुआ कि अय्यर को हमेशा कुछ-न-कुछ खाने की इच्छा बनी रहती है.

इसे मेडिकल की भाषा में पीआइसीए कहा जाता है. इसमें उन्हें कच्चा चावल, बर्फ के टुकड़े यहां तक कि पेंसिल और चॉक खाने का मन करता रहता है. पिछले पांच साल से पीरियड के दौरान उन्हें काफी ज्यादा ब्लीडिंग होती है. उनके शरीर में आयरन की जबरदस्त कमी थी.

ऐसी ही परेशानी से 18 वर्षीय कॉलेज के छात्र अमोल नाईक भी परेशान थे. उनकी तबीयत अकसर खराब रहती और उनकी रंगत पीली नजर आती थी. उन्होंने जब अपने पारिवारिक डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने गौर किया कि उनके नाखून टूटे-फूटे थे और उनसे चमक नदारद थी. जांच से पता चला कि उनका हीमोग्लोबीन काउंट 4 g/dl था जबकि एक सामान्य पुरुष के लिए यह 14 g/dl होता है.

डॉक्टरों के सामने इस तरह के मामले हर दूसरे-तीसरे दिन आते रहते हैं. हमारे देश में 30 से 50 फीसदी आबादी एनीमिया, (खून की कमी) की शिकार है जिसकी मुख्य वजह आयरन और फोलिक एसिड तथा विटामिन बी12 की कमी है. ये शरीर में खून बनाने के लिए अहम भूमिका निभाते हैं.

आयरन आसानी से मिलने वाला तत्व है, लेकिन रोजाना के आहार में पर्याप्त मात्रा में उसे पाना उतना ही मुश्किल है. हमें रोज करीब 1 मिलीग्राम आयरन की जरूरत होती है. आहार से मिल रहे कुल आयरन का 10 फीसदी आंत (इंटेस्टाइन) अवशोषित कर लेती है. लिहाजा हमें कम-से-कम 10 मिलीग्राम आयरन चाहिए, यानी 2,000 कैलोरी रोज लेना आवश्यक है.

अवशोषण की इस प्रक्रिया में कुछ तत्व या खाद्य पदार्थ रुकावट डालने का काम करते हैं. इनमें सबसे अहम है गेहूं और चावल से बने आहार जो हमारे भोजन के मुख्य अंग हैं. चाय और कॉफी अधिक पीना भी नुकसानदायक है, क्योंकि इनमें टैनिक एसिड होता है जो शरीर में आयरन के अवशोषण में  बाधा पैदा करता है. तंबाकू भी आयरन और विटामिन बी-12 के अवशोषण की राह में रोड़े डालता है.

इसके अलावा, सब्जियों से मिलने वाला आयरन आसानी से नहीं पचता. एक बार जब आपके शरीर में आयरन की कमी हो जाती है तो भोजन से मिलने वाले पोषण से कोई फायदा नहीं हो सकता, दवा लेनी ही पड़ती है. सिरप और कैप्सूल के रूप में ओरल आयरन खुराक मेडिकल स्टोर में उपलब्ध हैं.

इन्हें चार से छह महीनों तक दिन में दो बार लेना होता है. करीब 30 फीसदी लोग पेट से जुड़ी दिक्कतों की वजह से आयरन की गोलियां नहीं ले पाते हैं.

ऐसे में आयरन के इंजेक्शन का विकल्प मौजूद है. इन्हें इंट्रामस्क्युलर दिया जाता है और इसमें बहुत दर्द होता है और इंजेक्शन की जगह पर त्वचा की रंगत खराब हो जाती है. लेकिन हाल में ही एक बहुत सुरक्षित इंट्रावीनस आयरन खुराक तैयार की गई है जिसमें पूरी खुराक एक ही बार में दे दी जाती है. इसमें सिर्फ 15 मिनट लगते हैं और आयरन की कमी को काफी हद तक दूर कर दिया जाता है.

सिर्फ भोजन से ही आयरन की कमी पूरी करना संभव नहीं है फिर भी इसकी उपयोगता है. पत्तेदार सब्जियां, खजूर, सूखे मेवे और मीट आयरन के सबसे अच्छे स्रोत माने जाते हैं.

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