

चेन्नई के राघवेंद्र हॉल में रजनीकांत ने कहा कि लोकतंत्र की स्थिति अभी ठीक नहीं है. दूसरे राज्य हमारा (तमिलनाडु) मजाक उड़ा रहे हैं. अगर मैं अभी यह फैसला नहीं लेता तो मुझे दोषी जैसा महसूस होता. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के नाम पर राजनेताओं ने हमारे ही पैसे और जमीन को लूटा है. हमें आधार से बदलाव लाने की जरूरत है. रजनीकांत ने कहा कि मैं नाम, पैसे या शोहरत के लिए राजनीति में नहीं आ रहा.
Truth ,work and growth will be the three mantras of our party: #Rajinikanth pic.twitter.com/y0SLMaE5EZ
— ANI (@ANI) December 31, 2017
रजनीकांत के राजनीति में आने के ऐलान के बाद उनके फैंस ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है. उधर, सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि रजनीकांत ने केवल राजनीति में आने की घोषणा की है. कोई विस्तृत जानकारी और दस्तावेज नहीं दिए. वे अशिक्षित हैं. ये मीडिया के जरिए किया गया प्रचार है. तमिलनाडु की जनता समझदार है. स्वामी ने कहा कि रजनीकांत को अपने पार्टी का नाम और उम्मीदवारों का ऐलान करने दीजिए, उसके बाद मैं उन्हें बेनकाब करूंगा.
Let him announce political party name and candidates and then I will expose him: Subramanian Swamy,BJP on #Rajinikanth pic.twitter.com/7rgIFvj1Ky
— ANI (@ANI) December 31, 2017
तमिल फिल्म उद्योग के इतिहास पुरुष कहे जाने वाले 67 वर्षीय इस करिश्माई अभिनेता ने राजनीति में प्रवेश करने को लेकर लग रही अटकलों के बीच अपने रुख की घोषणा 31 दिसंबर को करने को कहा था. रजनीकांत तमिल फिल्म उद्योग पर चार दशक से राज कर रहे हैं.
वर्ष 1996 में रजनीकांत ने जयललिता के खिलाफ रुख अपनाया था जिसके बाद से ही राजनीति में उनके प्रवेश की चर्चाएं चलनी शुरू हो गई थी. तमिलनाडु में जयललिता के निधन के कारण पैदा हुए राजनीतिक शून्य और द्रमुक अध्यक्ष एम करुणानिधि की गिरती सेहत के कारण कम हुई उनकी सक्रियता को देखते हुए रजनी के राजनीति में प्रवेश का मुद्दा फिर उठने लगा था.