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आईपीएस संजीव भट्ट के आशियाने पर चला सरकारी हथौड़ा , जाने क्या है वजह

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से पंगा ले चुके आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट के बंगले को तोड़ने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। जबकि कुछ घंटो बाद ही अहमदाबाद नगर निगम एएमसी के अधिकारियों ने उनके बंगले के अवैध हिस्से पर हथौड़ा चलाना शुरू कर दिया। जिसे एएमसी के अधिकारियों और मजदूरों ने बंगले का अवैध निर्माण सोमवार की दोपहर को ढहाना शुरू किया और रात इसे पूरा कर लिया।

एएमसी अधिकारियों ने बताया कि शीर्ष अदालत ने भट्ट की पत्नी श्वेता ने अवैध निर्माण ढहाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। भट्ट का दोमंजिला बंगला शहर के पॉश इलाके गुरुकुल में सुशील पार्क हाउसिंग सोसायटी में है। इससे पहले सहायक निगम आयुक्त विशाल खनामा ने बताया कि बंगले के कुल 92 वर्गमीटर क्षेत्र में अवैध निर्माण किया गया है, और इसे ढहाया जाएगा। अवैध निर्माण आवास के खाली हिस्से में भूतल तथा दो मंजिल ऊपर तक किया गया है। भट्ट के बंगले के पीछे ही प्रवीणचंद्र पटेल का बंगला है और उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट में 2012 में एएमसी को भट्ट के अनधिकृत निर्माण को ढहाने का आदेश जारी करने की गुहार लगाई थी। एनआरआई पटेल ने आरोप लगाया था कि भट्ट से खाली जगह छोड़ने का अनुरोध किया था लेकिन उन्होंने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जिस कारण उन्हें हाईकोर्ट में याचिका दायर करनी पड़ी। वहीं पटेल के भाई जयंत पटेल ने बताया कि हमारे हाते की एक ही दीवार है। हालांकि यह साझा दीवार नहीं है क्योंकि हमने अपनी जमीन पर इसे बनाया है। भट्ट ने जब इस दीवार का इस्तेमाल करते हुए ऊपरी मंजिलें बनानी शुरू की और कोई जगह नहीं छोड़ी, तो हमने आपत्ति दर्ज कराई। हालांकि उन्होंने तब हमें कहा था कि जो कुछ संभव होगा वह करेंगे। हाईकोर्ट के एकल जज की पीठ ने 2016 में जब अवैध हिस्से को ढहाने का आदेश जारी किया तो भट्ट की पत्नी ने डिवीजन बेंच में याचिका दायर की। लेकिन चीफ जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी और जस्टिस वीएम पंचोली की खंडपीठ ने भी यह अपील खारिज कर दी और निगम अधिकारियों को निर्माण ढहाना जारी रखने का आदेश दिया। इसके बाद ही श्वेता भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी भट्ट को सेवा से ‘अनधिकृत रूप से अनुपस्थित’ रहने के आधार पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अगस्त 2015 में बर्खास्त कर दिया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया था कि वह गांधीनगर स्थित मोदी के आवास पर 27 फरवरी 2002 को आयोजित बैठक में शामिल थे। इसमें उन्होंने दावा किया था कि बैठक में मुख्यमंत्री ने सभी शीर्ष पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया था कि, गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगाने की घटना के बाद आक्रोशित हिंदुओं को अपना बदला पूरा करने दें। हालांकि शीर्ष अदालत ने उनके दावे को खारिज कर गोधरा के बाद हुए दंगों की जांच के लिए विशेष जांच टीम गठित कर दी थी|

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