हिमाचल में सियासी संग्राम तेज! कांग्रेस का BJP पर गंभीर आरोप, कहा- अधिकारियों और कर्मचारियों को दी जा रही धमकियां

शिमला: हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राज्य सरकार के मंत्रियों अनिरुद्ध सिंह और राजेश धरमानी ने भारतीय जनता पार्टी पर सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नकारात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष राजनीतिक दबाव बनाकर अधिकारियों को डराने और प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है।
‘भाजपा का कर्मचारी-विरोधी चेहरा फिर उजागर’
विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर और भाजपा नेताओं के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्रियों ने कहा कि भाजपा का कर्मचारी-विरोधी चेहरा एक बार फिर सामने आया है। उनका कहना है कि सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के हितों की रक्षा करने में भाजपा लगातार नाकाम रही है। चाहे पुरानी पेंशन योजना का मुद्दा हो या कर्मचारियों की सेवा से जुड़े अन्य विषय, भाजपा ने कभी कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता नहीं दी।
मंत्रियों ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता अब सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को भविष्य में परिणाम भुगतने की सार्वजनिक चेतावनी देकर उन्हें अपनी वैधानिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इस तरह की राजनीति को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है।
‘अपराध मामलों पर फैसला अदालतें करती हैं, राजनीतिक दल नहीं’
मंत्रियों ने कहा कि किसी भी आपराधिक मामले की वैधता तय करने का अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी तरह कानून के दायरे में संचालित हो रही है और किसी भी मामले में निर्णय तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही लिया जाता है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं द्वारा मामलों की वैधता पर टिप्पणी करना उचित नहीं है, क्योंकि यह न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास माना जा सकता है। मंत्रियों के अनुसार, कानून अपना काम कर रहा है और सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के तहत आगे बढ़ रही हैं।
जय राम ठाकुर की टिप्पणियों पर उठाए सवाल
मंत्रियों ने जय राम ठाकुर के बयानों पर सवाल खड़े करते हुए पूछा कि क्या भाजपा सरकार के कार्यकाल में मामले दर्ज नहीं होते थे और क्या उस समय कानून का शासन किसी अलग तरीके से संचालित किया जाता था। उन्होंने कहा कि कानून के तहत की जा रही कार्रवाई पर सवाल उठाने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए।



