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माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए कैसे मिलती है अनुमति? जानें नियम और लाखों में खर्च का पूरा गणित

नई दिल्ली: दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर पहुंचना हर पर्वतारोही का सपना होता है, लेकिन यह सपना पूरा करना इतना आसान नहीं है। केवल साहस या शारीरिक क्षमता के दम पर कोई भी व्यक्ति इस चोटी पर नहीं चढ़ सकता। इसके लिए सरकार की अनुमति, तय प्रक्रिया और कई सख्त नियमों का पालन अनिवार्य है। पर्वतारोहियों को पहले न सिर्फ प्रशासनिक मंजूरी लेनी होती है, बल्कि अपनी फिटनेस और अनुभव भी साबित करना होता है।

बिना परमिट नहीं चढ़ाई संभव
माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए सबसे पहले संबंधित देश की सरकार से परमिट लेना जरूरी होता है। नेपाल की तरफ से चढ़ने वाले पर्वतारोहियों को नेपाल सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है, जबकि तिब्बत की ओर से चढ़ाई करने वालों को चीन की संबंधित संस्था से मंजूरी प्राप्त करनी होती है। नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति सीधे आवेदन नहीं कर सकता, इसके लिए सरकार से मान्यता प्राप्त पर्वतारोहण या ट्रैकिंग एजेंसी के माध्यम से ही प्रक्रिया पूरी की जाती है। यही एजेंसियां गाइड, शेरपा, बीमा और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी संभालती हैं।

पहाड़ चढ़ने का अनुभव अनिवार्य
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नेपाल सरकार ने नियम और भी सख्त कर दिए हैं। अब एवरेस्ट पर चढ़ने की अनुमति उन्हीं लोगों को मिलती है, जिनके पास 7000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले किसी पर्वत पर चढ़ने का अनुभव हो। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्वतारोही अत्यधिक ऊंचाई, कम ऑक्सीजन और कठिन मौसम जैसी परिस्थितियों का सामना करने में सक्षम हों।

फिटनेस और मेडिकल जांच जरूरी
एवरेस्ट अभियान के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह फिट होना अनिवार्य है। हर आवेदक को मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करना होता है। डॉक्टर यह जांचते हैं कि व्यक्ति का हृदय, फेफड़े और शरीर अत्यधिक ऊंचाई पर कम ऑक्सीजन और खराब मौसम की परिस्थितियों को सहन कर सकते हैं या नहीं। बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के किसी भी आवेदन को मंजूरी नहीं मिलती।

कितना आता है खर्च
माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई एक बेहद महंगा अभियान माना जाता है। विदेशी पर्वतारोहियों को केवल परमिट के लिए ही करीब 15,000 अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 12 से 13 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। वहीं नेपाली नागरिकों के लिए यह शुल्क लगभग 75,000 नेपाली रुपये निर्धारित है। इन खर्चों के अलावा गाइड, उपकरण, बीमा और अन्य व्यवस्थाओं पर भी भारी राशि लगती है, जिससे यह अभियान केवल साहस ही नहीं बल्कि बड़े आर्थिक निवेश का भी प्रतीक बन जाता है।

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