
IIT कानपुर के रिटायर्ड अफसर को ED का डर दिखाकर 5 दिन डिजिटल अरेस्ट, बेटी की हत्या की धमकी देकर 16.55 लाख ठगे
कानपुर: साइबर ठगों ने आईआईटी कानपुर के 71 वर्षीय रिटायर्ड सुपरिंटेंडेंट अजय कुमार को कथित तौर पर प्रवर्तन निदेशालय का अधिकारी बनकर निशाना बनाया। जालसाजों ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने की धमकी दी और करीब पांच दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। इस दौरान वीडियो कॉल पर सुप्रीम कोर्ट की फर्जी सुनवाई भी दिखाई गई। जेल भेजने और उनकी इकलौती बेटी की हत्या करने की धमकी देकर ठगों ने उनसे 16 लाख 55 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए।
गांधी नगर निवासी अजय कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह आईआईटी कानपुर में ऑफिस सुपरिंटेंडेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उनकी इकलौती बेटी अवंतिका बेंगलुरु की एक सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी में काम करती हैं। वर्ष 2021 में पत्नी के निधन के बाद से अजय कुमार अकेले रह रहे हैं।
30 जुलाई को आया था ठगों का फोन
अजय कुमार के मुताबिक, 30 जुलाई को उनके मोबाइल पर एक फोन आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को प्रवर्तन निदेशालय का अधिकारी बताया और उनका नाम मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जोड़ दिया। इसके बाद उन्हें लगातार धमकाया गया और पांच दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया।
ठगों ने उन्हें कथित मामले में जेल भेजने की धमकी देने के साथ उनकी इकलौती बेटी को भी नुकसान पहुंचाने की बात कही। डर का माहौल बनाने के लिए जालसाजों ने वीडियो कॉल पर सुप्रीम कोर्ट की फर्जी सुनवाई भी दिखाई। इसके बाद अलग-अलग तरीके से दबाव बनाकर उनसे 16 लाख 55 हजार रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए गए।
पुलिस ने शुरू की मामले की जांच
थाना प्रभारी अभय सिंह ने बताया कि आईआईटी के रिटायर्ड अधिकारी के साथ साइबर ठगी का मामला सामने आया है। उनकी शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। पुलिस ठगों द्वारा इस्तेमाल किए गए फोन नंबर, बैंक खातों और अन्य डिजिटल माध्यमों की जानकारी जुटा रही है।
लखनऊ में प्लॉट के नाम पर 2.35 करोड़ से ज्यादा की ठगी
इसी बीच लखनऊ के आशियाना क्षेत्र से भी धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां एक कारोबारी को प्लॉट दिलाने का झांसा देकर 2 करोड़ 35 लाख रुपये से अधिक की रकम हड़पने का आरोप है। शिकायत के मुताबिक, आरोपी खुद को आवास विकास परिषद का कर्मचारी और बड़े अधिकारियों का करीबी बताता था।
आरोपी ने कारोबारी का भरोसा जीतने के लिए कथित तौर पर फर्जी आवंटन पत्र, कब्जा पत्र और सरकारी मुहरों का इस्तेमाल किया। मामला सामने आने के बाद पीजीआई थाने में रायबरेली निवासी यशवंत सिंह, पूजा एंटरप्राइजेज और समरेश यादव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट के जरिए हुई थी आरोपी से पहचान
आशियाना के रुचि खंड-1 निवासी अविहर्ष शुक्ला के मुताबिक, वर्ष 2023 में उनकी मुलाकात चार्टर्ड अकाउंटेंट अक्षय गुप्ता के माध्यम से यशवंत सिंह से हुई थी। यशवंत ने खुद को आवास विकास परिषद से जुड़ा बताया और दावा किया कि वह अपने प्रभाव के जरिए प्लॉट का आवंटन करा सकता है।
शिकायत के अनुसार, आरोपी अक्सर आवास विकास परिषद के मुख्यालय के आसपास ही मुलाकात करता था। इससे कारोबारी का उस पर भरोसा बढ़ता गया। बाद में इसी भरोसे का फायदा उठाकर उससे बड़ी रकम ले ली गई। पुलिस अब इस मामले में दस्तावेजों और लेनदेन से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है।



