अद्धयात्मजीवनशैली

मंगला गौरी व्रत की शाम करें ये 4 उपाय, धन से जुड़ी परेशानियां होंगी दूर, घर में आएगी सुख-समृद्धि

नई दिल्ली: आज 11 अगस्त 2026 को सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है। इस बार मंगला गौरी व्रत के साथ सावन शिवरात्रि का भी संयोग बताया जा रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सावन के मंगलवार को किए जाने वाले इस व्रत से अखंड सौभाग्य और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है। ज्योतिष शास्त्र में शाम के समय किए जाने वाले कुछ उपायों को भी सुख-शांति और आर्थिक समृद्धि के लिए शुभ माना गया है।

मुख्य द्वार पर जलाएं घी का दीपक

मंगला गौरी व्रत की शाम घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शाम के समय भगवान शिव और माता पार्वती पृथ्वी लोक पर भ्रमण के लिए निकलते हैं। ऐसे में घर के बाहर घी का दीपक जलाना उनके स्वागत का प्रतीक माना जाता है।

मान्यता है कि इस उपाय से घर के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और भगवान शिव-माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है। इससे आर्थिक उन्नति और घर में खुशहाली आने की मान्यता है।

मां पार्वती को सिंदूर करें अर्पित

मंगला गौरी व्रत की शाम पूजा के दौरान माता पार्वती को सिंदूर अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। सुहाग की सामग्री के रूप में सिंदूर अर्पित करने की परंपरा है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां पार्वती को सिंदूर अर्पित करने से भगवान शिव और माता पार्वती प्रसन्न होते हैं। इससे अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलने और जीवन में सुख-शांति तथा आर्थिक खुशहाली आने की मान्यता है।

तुलसी के सामने जलाएं घी का दीपक

हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। मंगला गौरी व्रत के दिन तुलसी के पौधे के सामने सुबह और शाम घी का दीपक जलाने की परंपरा है।

मान्यता है कि नियमित रूप से तुलसी के सामने दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि और बरकत आती है। शाम के समय दीपक जलाकर तुलसी की पूजा करने से सकारात्मक वातावरण बनाए रखने की भी मान्यता है।

सुहाग सामग्री, अन्न और धन का करें दान

हिंदू धर्म में दान को विशेष महत्व दिया गया है। मंगला गौरी व्रत के दिन जरूरतमंदों को सुहाग सामग्री, अन्न और धन का दान करना शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन चीजों का दान करने से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-संपन्नता बनी रहती है। दान हमेशा अपनी सामर्थ्य के अनुसार और श्रद्धापूर्वक करने की परंपरा है।

Related Articles

Back to top button