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स्पेन में एक दिन में 688 लोगों की मौत, सरकार के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन

बर्सिलोना (एजेंसी): स्पेन में कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप लगातर बढ़ता जा रहा है। पिछले 24 घंटे में देश में 688 लोगों की मौत हुई है। वहीं, 1787 नए मामले सामने आए हैं। यह पिछले छह दिनों में एक दिन का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे पहले सात दिन में यहां कुल 619 मौतें हुई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि एक दिन पहले यहां 593 मामले आए थे और 52 मौतें हुई थीं। 

वहीं, विपक्षी पार्टी फार-राइट वॉक्स ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। विपक्षी पार्टी सरकार के खिलाफ कारों से प्रदर्शन कर रही है। राजधानी मैड्रिड में प्रदर्शनकारियों के काफिले ने अपनी कारों के ऊपर स्पेनिश झंडे लहराए और प्रधानमंत्री पेड्रो सेंचेज के इस्तीफे की मांग की। स्पेन ने 14 मार्च को यूरोप में अन्य देशों के मुकाबले सबसे कड़े प्रतिबंध लगाए थे।

स्पेन ने हाल के सप्ताहों में प्रतिबंधों में ढील दी है, लेकिन मैड्रिड और बार्सिलोना में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए अभी भी कड़ा प्रतिबंध जारी है। लेकिन, शनिवार को फार-राइट वॉक्स पार्टी के प्रदर्शनकारियों ने सरकार से लॉकडाउन हटाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इसका नौकरियों और अर्थव्यवस्था पर गलत प्रभाव पड़ रहा है। स्पेन में 11 मई को लॉकडाउन खोला गया था। इसके तहत बार, रेस्तरां खुल गए थे। अधिकतम 10 लोगों को एक समूह में मुलाकात करने की अनुमति दी गई थी। लॉकडाउन खुलने के बाद स्पेन में तीसरी बार एक दिन में 1500 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। स्पेन में अब तक 2,81,904 मामले आए हैं। 28,628 मौतें हुई हैं।

दुनिया के प्रमुख 10 कोरोना प्रभावित देशों में अमेरिका अब भी सबसे ऊपर है। इस सूची में यूरोप के छह और मध्य-पूर्व के दो देश शामिल हैं। उधर, यूरोपीय संघ की कोविड-49 रिस्पॉन्स टीम की डायरेक्टर एंड्रिया एमॉन ने कहा है कि यूरोप को कोरोना की दूसरी लहर के लिए तैयार रहना चाहिए।

रूस सबसे ज्यादा कोरोना प्रभावित देशों में दूसरे स्थान पर है। 24 घंटे में रूस और ब्राजील में टक्कर रही। बाद में 3,35,882 मामलों के साथ ब्राजील से रूस आगे हो गया। रूस में 3,388 मौतें हो चुकी हैं। यहां एक दिन में सबसे ज्यादा 150 मौतें भी हुई हैं। रूस में मौतों की दर अन्य सबसे ज्यादा संक्रमित देशों से कम है।

रूस के संक्रामक रोग विभाग की प्रमुख डॉ. एलीना मैलिनिकोवा का कहना है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि संक्रमण का सही समय पर पता चल रहा है। लोग लक्षण दिखते ही इलाज करा रहे हैं।

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