8 साल पहले बिके ‘माल’ पर नजर और खुल गया 500 करोड़ का हवाला

कटनी से रुमनी घोष। कटनी के कोयला कारोबारी सरावगी बंधुओं के हवाला कारोबार के जो तार अभी सामने आया है उसका सिरा दो-तीन साल पहले ही आयकर विभाग के हाथ लग गया था। कुछ बेनामी खातों से अचानक हुए बड़े लेन-देन पर दिल्ली में बैठी फाइनेंशियल इंटेलिजेंट यूनिट की नजर पड़ी और पटकथा लिखा जाना शुरू हो गया था। अनजाने में शुरू हुई एक छोटी सी जांच दिल्ली से शुरू होकर कटनी में चल रहे 100 से ज्यादा बेनामी खातों के पोल खोल गए।
आयकर विभाग ने खुलासा किया 2008-09 से 2015-16 के बीच 500 करोड़ का हवाला कारोबार हुआ। आयकर विभाग के मुताबिक दिल्ली स्थित फाइनेंशियल इंटेलिजेंट यूनिट देशभर के खातों पर नजर रखती है। किसी सुप्त (नॉन एक्टिव) खातों में अचानक हुए बड़ा या अनुपातहीन लेन-देन होते ही यह जांच के घेरे में ले लेती है। एसके मिनरल्स के मामले में जांच की शुरुआत भी यहीं से हुई। लंबे समय तक नजर रखने के बाद 21 मार्च 2016 को इंदौर से आए 55 आयकर अधिकारियों की टीम ने सरावगी बंधुओं के घर और घंटाघर स्थित दफ्तर में दबिश दी थी।
इसी दौरान एक ओर कोयला व्यापारी नरेश पोद्दार के घर और दफ्तर में भी छापा पड़ा था। यहां से 20 से ज्यादा खाते जप्त हुए। दस्तावेजों के आधार पर पता चला कि लेन-देन के रिकार्ड में बड़े पैमाने पर बदलाव किया गया है।
8 महीने पहले नोटिस घर पहुंचने के बाद सामने आया रजनीश
जब्त खातों की जांच जब कटनी आयकर विभाग को भेजी गई तो विभाग ने खातेदारों के नोटिस जारी करना शुरू किया। यहीं से जारी एक कुर्की नोटिस जब कटनी के माधवगढ़ स्थित रजनीश तिवारी के घर पहुंचा। यहां से 500 करोड़ के हवाले की परतें खुलना शुरू हुई।
आयकर विभाग की जांच निशाने पर जा लगी
पुलिस के मुताबिक खाताधारकों को निर्देश था कि लिफाफा सीधे सरावगी बंधुओं को दे दिया जाए लेकिन 30 मार्च 2016 को जब माधवनगर स्थित रजनीश तिवारी के घर आयकर भाग के कुर्की का आदेश पहुंचा तो डरकर रजनीश ने पुलिस के पास पहुंचा। तत्कालीन एसपी ने इसे आयकर का ममला बताकर जांच से इंकार कर दिया। जुलाई 2016 को वो चार महीने बाद वो फिर थाने गया तो एसपी गौरव तिवारी ने मामले में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
बर्मन के पकड़े जाते ही रातों रात ट्रांसफर हो रही थी फाइलें
रजनीश के मामले की जांच करते हुए पुलिस संदीप बर्मन तक पहुंची। 5 जनवरी एक बेनामी खातेदार संदीप बर्मन और सरकारी गवाह बना संजय तिवारी के पकड़े जाते ही खलबली मची। 6 जनवरी की रात पुलिस ने लोडर में गुपचुप ढंग से कहीं ले जाई जा रही फाइलें जब्त कर ली गईं। इन फाइलों में 42 फर्मों के नाम दर्ज हैं। एसके मिनरल्स के अलावा इनमें मिले फर्मों से कितना लेन-देन हुआ है, यह जांच होना बाकी है।
42 में से 4 फर्म ही कटनी सेल्स टैक्स विभाग में रजिस्टर्ड
कटनी के कोतवाली थाने में जप्त रिकार्ड में से पुलिस ने 42 फर्मों की सूची दी है। सेल्स टैक्स विभाग के सीटीओ वीके मिश्रा के अनुसार सिर्फ चार फर्म महाकालेश्वर, बालाजी, कान्हा कमर्शियल और आकांक्षा मिनरल्स के नाम से ही खाते सिर्फ कटनी में रजिस्टर्ड है। हालांकि कंपनियां प्रदेशभर में कहीं भी फर्म रजिस्टर्ड करवा सकती है। सेल्स टैक्स अधिकारी अब खातों के खरीदी बिक्री की जांच कर यह पता लगा सकती है कि सेल्स टैक्स की चोरी तो नहीं हुई?
दाल के नाम पर बेनामी खातों से हवाला
– इन बेनामी खातों से देश के 15 राज्यों समेत गल्फ कंट्री तक के व्यापारियों का दो नंबर का पैसा हवाला के जरिए भेजा जाता था।
– उदाहरण के तौर पर यूपी के एक व्यापारी ने कटनी के व्यापारी को दाल या कोई भी माल बेचा। टैक्स बचाने के लिए यूपी का व्यापारी ऐसे बेनामी खाताधारकों को संचालित करने वाले फर्मों से सांठगाठ करता है।
– यह फर्म व्यापारी से अच्छी खासी रकम वसूल कर बेनामी खातों के जरिए लेन-देन दिखाकर संबंधित व्यापारियों तक पहुंचा देता है।
बेनामी खाते मिले तो बढ़ सकता है आंकड़ा
100 से ज्यादा बेनामी खातों से आठ सालों में 500 करोड़ का हवाला काराबोर हुआ है। यदि और बेनामी खाते मिलते हैं तो यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। -आरके पालीवाल, प्रिंसिपल डायरेक्टर, इनकम टैक्स इनवेस्टिगेशन विंग (मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़)
सांगली के हवाला कारोबार से मिलता जुलता है कटनी का हवाला कारोबार
कटनी के हवाला काराबोर की तुलना सांगली के हवाला कारोबार से किया जा रहा है। इस जांच में शामिल रहे एक आयकर अधिकारी के मुताबिक सांगली हवाला कांड देश के उन बड़े हवाला कांडों में से एक है जिसमें आयकर विभाग केस को साबित कर आरोपियों से जुर्माना बतौर 5 करोड़ से ज्यादा वसूलने में कामयाब रही। जबकि सेल्स टैक्स विभाग ने इसमें आपराधिक मामला दर्ज किया था।