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ईरान की अमेरिका को दो टूक, ‘यूरेनियम का एक ग्राम भी बाहर नहीं जाएगा’, आसिम मुनीर की यात्रा के बीच सख्त संदेश

नई दिल्ली: अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने को लेकर ईरान ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। तेहरान ने साफ कहा है कि वह अपने यूरेनियम का एक ग्राम भी देश से बाहर नहीं भेजेगा। ईरान ने बातचीत आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका से पहले विश्वास बहाली के ठोस कदम उठाने और अपनी सभी शर्तें पूरी करने की मांग की है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की ईरान यात्रा के बीच आए इस बयान से दोनों देशों के बीच बातचीत बहाल करने की राह में मौजूद चुनौतियां सामने आई हैं।

ईरान ने अमेरिका के सामने रखी विश्वास बहाली की शर्त

ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि यूरेनियम को देश से बाहर भेजने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि अमेरिका को पहले भरोसा बहाल करने के लिए कदम उठाने होंगे। इसके साथ ही ईरान की सभी शर्तों को पूरा करने की प्रक्रिया भी शुरू करनी होगी। रेजाई के मुताबिक, इन कदमों के बिना बातचीत आगे बढ़ाना संभव नहीं है।

रेजाई ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ हुई बैठक में भी ईरान का यही रुख दोहराया। मुनीर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने तथा दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने के प्रयासों के तहत तेहरान पहुंचे हैं।

राष्ट्रपति पेजेश्कियन और संसद स्पीकर से मिले आसिम मुनीर

ईरानी मीडिया के मुताबिक, मंगलवार को राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने तेहरान में आसिम मुनीर के साथ मुलाकात की। इस बैठक में क्षेत्रीय हालात और अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिशों पर चर्चा हुई।

समाचार एजेंसी नूरन्यूज के अनुसार, मुनीर ने ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कलीबाफ से भी मुलाकात की। पाकिस्तान इन बैठकों के जरिए दोनों देशों के बीच मतभेद दूर करने और बातचीत की संभावनाएं तलाशने में जुटा है।

अमेरिका के सामने रखीं सात शर्तें

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कलीबाफ ने कहा है कि अमेरिका तब तक ईरान का विश्वास नहीं जीत सकता, जब तक वह पिछले महीने तेहरान की ओर से रखी गई सात शर्तों को पूरा नहीं करता।

इन शर्तों का संबंध होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने से है। ईरान की प्रमुख मांगों में तीन बातें शामिल हैं। पहली, ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नाकाबंदी समाप्त की जाए। दूसरी, ईरान के तेल निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध हटाए जाएं। तीसरी, क्षेत्र के सभी मोर्चों पर शत्रुता खत्म की जाए।

ईरान का कहना है कि इन मांगों पर अमेरिका को ठोस कार्रवाई करनी होगी। तेहरान ने संकेत दिया है कि शर्तें पूरी हुए बिना बातचीत को आगे बढ़ाना मुश्किल होगा।

हथियार बनाने के स्तर के करीब पहुंचा यूरेनियम भी नहीं भेजेगा ईरान

मोहसेन रेजाई ने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के रुख के अनुसार, हथियार बनाने के स्तर के करीब पहुंच चुके यूरेनियम को भी देश से बाहर नहीं भेजा जाएगा। इस बयान से स्पष्ट है कि परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान फिलहाल अपने रुख में ढील देने के लिए तैयार नहीं दिख रहा है।

ईरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका के साथ किसी भी संभावित समझौते में बड़ी बाधा बना हुआ है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसी महीने की शुरुआत में कहा था कि ईरान को अपनी यूरेनियम संवर्धन क्षमता में उल्लेखनीय कमी करनी होगी। उन्होंने इसे अमेरिका की प्रमुख मांगों में शामिल बताया था। अमेरिका का मानना है कि इस मुद्दे पर प्रगति से दोनों देशों के बीच आठ महीने से जारी युद्ध समाप्त करने के प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

60 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धन पर अमेरिका को आपत्ति

अमेरिका, इजरायल और कई पश्चिमी देश लंबे समय से ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने की कोशिश करने का आरोप लगाते रहे हैं। इन चिंताओं की एक प्रमुख वजह ईरान का यूरेनियम संवर्धन स्तर 60 प्रतिशत तक पहुंचना है।

यह स्तर सामान्य नागरिक परमाणु उपयोग के लिए आम तौर पर जरूरी संवर्धन स्तर से काफी अधिक है। वहीं, हथियार-ग्रेड यूरेनियम के लिए सामान्यतः करीब 90 प्रतिशत संवर्धन स्तर का उल्लेख किया जाता है।

ईरान लगातार परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करने के आरोपों को खारिज करता रहा है। परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन की सीमा को लेकर दोनों देशों के बीच जारी मतभेद किसी समझौते तक पहुंचने में बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बहाल कराने में जुटा पाकिस्तान

पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रयास कर रहा है। इससे पहले पाकिस्तान की मध्यस्थता से जून में अंतरिम शांति समझौता हुआ था, लेकिन कुछ ही सप्ताह बाद दोनों देशों के बीच दोबारा लड़ाई शुरू हो गई और समझौता टूट गया।

आसिम मुनीर की मौजूदा ईरान यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने और बातचीत बहाल कराने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि, यूरेनियम देश से बाहर नहीं भेजने और वार्ता से पहले सभी शर्तें पूरी करने पर ईरान के जोर से मध्यस्थता की राह आसान नहीं दिख रही है।

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