भारत की ‘चिली कैपिटल’ है ये शहर, यहीं लगती है एशिया की सबसे बड़ी सूखी लाल मिर्च मंडी

नई दिल्ली: भारतीय खाने में तीखापन बढ़ाने वाली लाल मिर्च लगभग हर रसोई का अहम हिस्सा है। दाल हो, सब्जी या मसालेदार व्यंजन, लाल मिर्च के बिना स्वाद अधूरा लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाजार में मिलने वाली इस मिर्च के कारोबार का एक बड़ा केंद्र दक्षिण भारत में है? आंध्र प्रदेश का गुंटूर शहर अपनी लाल मिर्च की खेती और बड़े पैमाने पर होने वाले कारोबार के लिए जाना जाता है। इसे भारत की ‘चिली कैपिटल’ कहा जाता है। यहां स्थित गुंटूर मिर्ची यार्ड में देश के अलग-अलग हिस्सों से मिर्च पहुंचती है और यहां से घरेलू बाजारों के साथ विदेशी बाजारों तक इसकी आपूर्ति की जाती है।
आखिर क्यों चिली कैपिटल कहलाता है गुंटूर?
आंध्र प्रदेश का गुंटूर लाल मिर्च की खेती और व्यापार के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। यहां मिर्च की कई किस्मों का उत्पादन और कारोबार होता है। स्थानीय स्तर पर होने वाली खेती के साथ-साथ आसपास के कृषि क्षेत्रों से भी मिर्च मंडी तक पहुंचती है। यहां से लाल मिर्च की आपूर्ति देश के विभिन्न राज्यों के अलावा दूसरे देशों में भी की जाती है। इसी व्यापक कारोबार के कारण गुंटूर को भारत की ‘चिली कैपिटल’ के रूप में पहचान मिली है।
एशिया की सबसे बड़ी सूखी लाल मिर्च मंडियों में शामिल है गुंटूर मिर्ची यार्ड
गुंटूर की सबसे बड़ी पहचान यहां स्थित मिर्ची यार्ड है। यह मंडी करीब 50 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली बताई जाती है। यहां किसानों, व्यापारियों और खरीदारों के बीच बड़े पैमाने पर लाल मिर्च का कारोबार होता है। मंडी में मिर्च की आवक, उसकी गुणवत्ता और मांग के आधार पर कीमतों में बदलाव आता है। गुंटूर का यह बाजार सूखी लाल मिर्च के कारोबार के लिए देश ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
लाल मिर्च में पाया जाता है कैप्साइसिन
लाल मिर्च का तीखापन उसमें मौजूद कैप्साइसिन नामक यौगिक के कारण होता है। इसकी मात्रा के आधार पर मिर्च का तीखापन कम या ज्यादा हो सकता है। लाल मिर्च में आयरन, मैग्नीशियम और पोटेशियम जैसे खनिज भी कुछ मात्रा में पाए जाते हैं। हालांकि, इन पोषक तत्वों की मात्रा मिर्च की किस्म और उसकी उत्पादन परिस्थितियों पर निर्भर करती है। गुंटूर और आसपास के क्षेत्रों की मिट्टी तथा जलवायु मिर्च की खेती के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
गुंटूर सन्नम मिर्च की देश-विदेश में खास पहचान
गुंटूर की प्रमुख किस्मों में गुंटूर सन्नम का नाम खास तौर पर लिया जाता है। इसे एस4 के नाम से भी जाना जाता है। सन्नम शब्द तेलुगु भाषा से जुड़ा है, जिसका अर्थ पतला होता है। इस किस्म का इस्तेमाल मसालों और खाद्य पदार्थों में तीखापन बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसकी मांग घरेलू बाजार के साथ निर्यात बाजार में भी रहती है।
गुंटूर सन्नम मिर्च को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई पहचान भी मिली हुई है। यह पहचान किसी उत्पाद को उसके खास भौगोलिक क्षेत्र से जोड़ती है और उसकी विशिष्ट पहचान को दर्ज करती है।
किसानों से लेकर निर्यात कारोबार तक अहम है लाल मिर्च
गुंटूर में लाल मिर्च का कारोबार किसानों, मंडी व्यापारियों, प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यातकों के लिए आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। मिर्च की खरीद-बिक्री से जुड़े इस नेटवर्क के जरिए कृषि उपज देश के विभिन्न हिस्सों और विदेशों तक पहुंचती है। यही वजह है कि गुंटूर की पहचान केवल एक शहर के रूप में नहीं, बल्कि भारत के प्रमुख लाल मिर्च व्यापार केंद्र के रूप में भी बनी हुई है।



