अद्धयात्म

ASI के फरमान पर हिंदू संगठन की भौंहें चढ़ीं, म.प्र. सरकार की चुनौती बढ़ी

dhar-bhojshala_650x400_61454569587दस्तक टाइम्स एजेन्सी/ इंदौर: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई – ASI) ने धार जिले के विवादास्पद स्मारक भोजशाला में 12 फरवरी को बसंत पंचमी के मौके पर अलग-अलग अंतराल में पूजा और नमाज संपन्न कराने का आदेश दिया है। लेकिन एक पक्ष इस आदेश के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बसंत पंचमी पर पूरे दिन पूजा करने की मांग पर अड़ गया है।

हिंदू संगठन ‘भोज उत्सव समिति’ के संरक्षक विजय सिंह राठौर ने कहा, “हमारी मांग है कि हमें बसंत पंचमी पर भोजशाला में सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक लगातार पूजा की अनुमति दी जाये। धार में कानून-व्यवस्था बनाये रखने की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की है। इसके मद्देनजर वह बसंत पंचमी पर एएसआई का आदेश मानने के लिये बाध्य नहीं है।”

ASI की जिम्मेदारी केवल संरक्षण की…
उन्होंने दावा किया, “एएसआई की जिम्मेदारी भोजशाला परिसर के संरक्षण भर की है और उसे धार्मिक परंपराओं के पालन को लेकर फरमान जारी करने का कोई हक नहीं है।” राठौर ने भोजशाला मसले में राज्य की भाजपा सरकार के पाले में गेंद डालते हुए कहा, ‘अगर राज्य सरकार इस मसले का स्थायी हल चाहती है, तो उसे इच्छाशक्ति दिखाते हुए बसंत पंचमी की पूजा को लेकर समय रहते उचित फैसला करना होगा।”

एएसआई के आदेश के मुताबिक हिन्दू समुदाय के लोग 12 फरवरी को बसंत पंचमी पर पूजा के लिये दो अंतरालों में, सूर्योदय से दोपहर 12 बजे तक और दोपहर 3:30 बजे से सूर्यास्त तक भोजशाला में प्रवेश कर सकेंगे। जबकि बसंत पंचमी पर मुस्लिम समुदाय के लोगों को दोपहर एक से 3 बजे तक इस विवादास्पद स्मारक में नमाज के लिये दाखिल होने की अनुमति होगी।

भोजशाला मसले पर सरकार सतर्क
बहरहाल, हिंदू संगठन के एएसआई के फरमान के विरोध में उतरने से प्रदेश सरकार के सामने धार में बसंत पंचमी पर कानून-व्यवस्था बनाये रखने की चुनौती बढ़ गयी है। पिछले महीने धार जिले के बाग और मनावर कस्बों में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं सामने आयी हैं। नतीजतन प्रदेश सरकार भोजशाला मसले को लेकर और सतर्क हो गयी है।

बसंत पंचमी पर धार में कानून.व्यवस्था बनाये रखने की चुनौती के बारे में मीडिया के पूछे जाने पर प्रदेश के गृह मंत्री बाबूलाल गौर ने एक फरवरी को इंदौर में संक्षिप्त जवाब में कहा था, “भोजशाला के मामले में नियमानुसार कदम उठाये जायेंगे। वहां बसंत पंचमी पर नियमों के मुताबिक पूजा और इबादत की अनुमति दी जायेगी।”

मंदिर बनाम मस्जिद विवाद
उल्लेखनीय है कि हिंदुओं का मानना है कि भोजशाला वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर है, जबकि मुस्लिम समुदाय इस एएसआई संरक्षित स्मारक को कमाल मौला की मस्जिद बताता है। एएसआई की ओर से आमतौर पर जारी व्यवस्था के मुताबिक हिंदुओं को प्रत्येक मंगलवार भोजशाला में पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुस्लिमों को हर शुक्रवार इस जगह नमाज अदा करने की इजाजत है। संयोग से इस बार बसंत पंचमी शुक्रवार (12 फरवरी) को पड़ रही है।

इससे पहले भी जब-जब बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ी है, धार शहर में तनाव उत्पन्न होता रहा है। इससे सबक लेते हुए प्रदेश सरकार हरसंभव कोशिश कर रही है कि शहर में इस पर्व पर भोजशाला मसले को लेकर कोई अप्रिय स्थिति पैदा न हो।

 

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