विज्ञान प्रकृति में पदार्थ और ऊर्जा देख चुका है। पदार्थ और ऊर्जा भी अब दो नहीं रहे। समूची प्रकृति एक…
Read More »साहित्य
हृदयनारायण दीक्षित : प्रश्न और जिज्ञासा वैदिक परंपरा है। भारतीय इतिहास के वैदिक काल में सामाजिक अन्तर्विरोध कम थे। तब…
Read More »हृदयनारायण दीक्षित : श्रद्धा भाव है और श्राद्ध कर्म। श्रद्धा मन का प्रसाद है और प्रसाद आंतरिक पुलक। पतंजलि ने…
Read More »बोध आसान नहीं। शोध आसान है। शोध के लिए प्रमाण, अनुमान, पूर्ववर्ती विद्वानों द्वारा सिद्ध कथन और प्रयोग पर्याप्त हैं।…
Read More »हम सब कर्मशील प्राणी हैं। कर्म की प्रेरणा है कर्मफल प्राप्ति की इच्छा। कर्मफल प्राप्ति की अभिलाषा के कारण ही…
Read More »हम सभी स्वतंत्र भारत के परतंत्र नागरिक हैं…यह वाक्य पढ़ने में बिल्कुल गलत लगा न? कड़वा तो ऐसा है जैसे कच्ची…
Read More »स्तम्भ: कैकेयी के स्वर ने राम में अपार ऊर्जा का संचार किया। एक हल्के से विराम के बाद राम ने कहा-…
Read More »स्तम्भ: मंथरा के जाने के बाद कैकेयी मंथरा के विचारों का सूक्ष्म अवलोकन करने लगीं, मनुष्य स्वभाव से ही महत्वाकांक्षी…
Read More »स्तम्भ: अयोध्या पीछे छूट चुकी थी, जनशून्य क्षेत्र आरम्भ हो चुका था। कैकेयी इस सत्य को जानती थीं कि जब…
Read More »वाराणसी, 06 सितम्बर। डी.ए.वी. पीजी काॅलेज के हिन्दी विभाग के तत्वावधान में गुरूवार को मुंशी प्रेमचन्द्र के उपन्यास ‘सेवासदन’ के…
Read More »स्तम्भ: वे अपने महल के विशाल कक्ष में बेचैनी से चहल क़दमी कर रहे थे, मृत्यु के मुख पर खड़े…
Read More »स्तम्भ : कंस ने लगभग डाँटते हुए कहा- मुझे बहलाओ मत कृष्ण। मैं गोकुल की गोपी नहीं हूँ, जो तुम्हारे…
Read More »स्तम्भ : कृष्ण अपने हृदय की आत्मीयता को कंस पर उड़ेलते हुए बोले- मुक्त होने के लिए रिक्त होना पड़ता…
Read More »स्तम्भ : कृष्ण, मेरी माँ पवनरेखा अनिंद्य सुंदरी थी, अपने पति उग्रसेन के प्रति पूर्णतः समर्पित। किंतु किसी भी स्त्री…
Read More »स्तम्भ: मेरा अनुभव है कृष्ण, कि #दुर्भाग्य व्यक्ति को #अपने_पास_बुलाता_है, किंतु #सौभाग्य व्यक्ति तक #स्वयं ही पहुँच जाता है। कंस…
Read More »स्तम्भ : मेरी माँ पवनरेखा जब अपने पितृगृह पहुँची तब वह अपने पति से विरह और हृदय की वेदना से…
Read More »अध्यात्म : भगवान् को प्राप्त करने का अभियान भगवद्जन के लिए जितना सरल और सरस है विषयी व्यक्ति के लिए उतना…
Read More »अध्यात्म : संसार में हाथ, दो पैर वाले जीवों की भरमार है। सामान्यतया उन्हें ‘मनुष्य’ कहते है। लेकिन ‘मनुष्य’ ये…
Read More »अध्यात्म : सुतीक्ष्ण जी अगस्त्य मुनि के शिष्य थे। शिक्षा प्राप्त कर लेने के पश्चात् सुतीक्ष्ण ने गुरुजी से दक्षिणा हेतु…
Read More »स्तम्भ: कैकेयी को सुमित्रा के शब्द सुनाई दिए वे कह रही थीं- जीजी, परमात्मा ने महाराज दशरथ और हम सबके भाग्य…
Read More »स्तम्भ: कैकेयी ने आश्चर्य से सुमित्रा को अपने कंठ से अलग करते हुए कहा- शत्रुघन का कहीं पता नहीं है…
Read More »स्तम्भ: भरत नंदीग्राम में ही रुक गए, उन्होंने निर्णय सुना दिया था कि प्रभु श्रीराम के अयोध्या वापस लौटने तक…
Read More »इतिहास भूत होता है। इसमें जोड़ घटाव उचित नहीं होता। जैसा घटित हुआ, वैसा ही इतिहास बना। हम चाहकर भी…
Read More »भाव का केन्द्र हृदय है और ज्ञान का केन्द्र बुद्धि। बुद्धि का आधार स्मृति है। हम प्रत्यक्ष जगत का विवेचन…
Read More »नई दिल्ली : प्रसिद्ध जैन मुनि तरुण सागर महाराज की हालत गंभीर बनी हुई है| मैक्स अस्पताल की ओर से…
Read More »नई दिल्ली : 26 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाएगा। यह त्योहार भाई-बहन के आपसी रिश्तों को मजबूत बनाने…
Read More »संजय सक्सेना हिंदी साहित्यकार, शिक्षक एवं कवि सम्मेलनों के मंचों पर काव्य वाचक एवं फिल्मों के गीत लेखक गोपाल दास…
Read More »मुंबई: बॉलीबुड और हॉलीबुड दोनों जग़ह अपना कैरियर बनाने वाली “प्रियंका चोपड़ा” बीते रोज़ अपने मंगेतर निक जोनास और पूरे…
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