अन्तर्राष्ट्रीय

भारत और पोलैंड ने रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई

नई दिल्ली ( दस्तक डेस्क) : भारत और पोलैंड ने रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री टस्‍क ने आज नई दिल्ली में पारस्परिक हित के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। वार्ता के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों, साइबर सुरक्षा और रक्षा नवाचार में भारत-पोलैंड सहयोग को मजबूत करने के महत्व पर बल दिया।

उन्होंने विश्व के लिए विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के साझा लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करने पर भी सहमति व्यक्त की।

दोनों नेताओं ने आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के सभी रूपों, जिनमें सीमा पार आतंकवाद भी शामिल है, की स्पष्ट रूप से निंदा की। उन्होंने पिछले वर्ष अप्रैल में जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की और आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ मजबूत और समन्वित कार्रवाई का आह्वान किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने सभी देशों से आतंकवादी सुरक्षित ठिकानों और बुनियादी ढांचे को समाप्त करने और आतंकवाद वित्तपोषण नेटवर्क को बाधित करने की दिशा में निरंतर काम करने का भी आह्वान किया।

हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति सुरक्षा पर बल :

दोनों नेताओं ने एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्व और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की पुष्टि की। उन्होंने नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के महत्व पर जोर दिया। भारत ने पोलैंड को हिंद-प्रशांत महासागर पहल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।

सहयोग के भिन्न भिन्न क्षेत्र:

दोनों नेताओं ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को रणनीतिक साझेदारी का एक प्रमुख तत्व माना और मजबूत संस्थागत और उद्योग-स्तरीय जुड़ाव को प्रोत्साहित किया। उन्‍होंने पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग के ठोस क्षेत्रों की पहचान करने के प्रयासों का स्वागत किया। दोनों नेताओं ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में घनिष्ठ सहयोग के अवसरों का उल्‍लेख किया। दोनों प्रधानमंत्रियों ने विशेष रूप से बैटरी पुनर्चक्रण और दुर्लभ खनिज शोधन परचक्रीय अर्थव्यवस्था और पुनर्चक्रण उद्योग में सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने भूविज्ञान, खनन और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों में घनिष्ठ सहयोग के अवसरों का उल्‍लेख किया। इस संबंध में एक समझौता ज्ञापन पर बातचीत चल रही है।

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