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RBI-सरकार के बीच महंगाई के आंकड़ों पर टकराव

रिजर्व बैंक और केंद्र सरकार के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. बुधवार को आरबीआई के मौद्रिक नीति समीक्षा के ऐलान के बाद मतभेद सामने आ गए. बैंक ने महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते रेपो रेट में बदलाव नहीं किया. दरें ना घटने से वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम निराश नजर आए.

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RBI-सरकार के बीच महंगाई के आंकड़ों पर टकराव

उन्होंने कहा है कि महंगाई पूरी तरह कंट्रोल में है और महंगाई को आरबीआई कुछ ज्यादा ही बढ़ाचढ़ाकर पेश कर रहा है. हालांकि अरविंद सुब्रमण्यम ने आरबीआई की अगली क्रेडिट पॉलिसी में दरों में कटौती की उम्मीद जताई है.

इससे पहले रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने पत्रकारों को बताया कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्‍यों ने वित्‍त मंत्रालय की बैठक में जाने से इनकार कर दिया था. पटेल ने बताया, ‘जहां तक वित्त मंत्रालय द्वारा एमपीसी सदस्यों को बैठक के लिए दिए गए आमंत्रण का सवाल है. तो एमपीसी के सभी सदस्यों ने वित्त मंत्रालय के अनुरोध को ठुकरा दिया.’ हालांकि पटेल ने यह नहीं बताया कि वित्त मंत्रालय से यह आमंत्रण कब मिला था.

पटेल से पूछा गया कि क्या मंत्रालय ने आरबीआई की स्वतंत्रता और स्वायत्तता पर हमला किया था. इस पर उनका जवाब था, ‘समिति ने इस आमंत्रण को स्वीकार नहीं किया.’ बता दें कि वित्त मंत्रालय में एक मॉनिटरी पॉलिसी ग्रुप बना है और इसमें वित्त मंत्रालय के बड़े अफसर शामिल किए गए हैं.

इस ग्रुप में मुख्य आर्थिक सलाहकार और प्रधान आर्थिक सलाहकार भी शामिल हैं. इस ग्रुप ने एक रिपोर्ट तैयार की थी और इस रिपोर्ट में दरों में कटौती के पत्र में दलीलें थी. रिपोर्ट में आरबीआई के महंगाई पर अनुमान को गलत बताया गया था. मॉनिटरी पॉलिसी ग्रुप की एक जून को अहम बैठक होनी थी. ये बैठक एमपीसी और वित्त मंत्रालय के बीच होनी थी, लेकिन आखिरी वक्त पर बैठक को रद्द किया गया.

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दो जून को मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम मॉनिटरी पॉलिसी ग्रुप की रिपोर्ट लेकर मुंबई जाने वाले थे. मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम, मॉनिटरी पॉलिसी ग्रुप की रिपोर्ट को खुद एमपीसी के सामने पेश करना चाहते थे, लेकिन कमिटी के सदस्यों ने इसकी इजाजत नहीं दी. लिहाजा आखिरी वक्त पर मुख्य आर्थिक सलाहकार का मुंबई दौरा रद्द करना पड़ा. आखिरकार मॉनिटरी पॉलिसी ग्रुप की रिपोर्ट ई-मेल के जरिए आरबीआई भेजी गई.

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