दस्तक-विशेष

कहानी- बंदरों की कबड्डी

लेखक-जंग हिंदुस्तानी

जंगल के बीचो बीच में एक बड़ी सरकारी कालोनी बसी हुई है। लोग बताते हैं कि पहले यहां पर बंदरों की दो बड़ी-बड़ी टोलियां थी। एक का नाम जबर टोली तो दूसरा का नाम गदर टोली था। कॉलोनी के एक तरफ गदर टोली के बंदर रहते थे तो दूसरी तरफ जबर टोली के बंदर रहते थे। हालांकि एक दूसरे के क्षेत्र में भी आते जाते रहते थे। लेकिन जब उन में मुलाकात होती थी तो दुआ सलाम के बजाय गाली गलौज होता रहता था। उनकी भाषा में कोई संयम नहीं था और बात बात में एक दूसरे की जान लेने पर उतारू रहते थे ।

एक दिन जब कॉलोनी के बीच स्कूल के मैदान में दोनों आमने-सामने थे तो इसी बीच उन्हें बाघ दिखाई पड़ा। बाघ को देखते ही आपसी झगड़ा भूल कर के दोनों टीम के लोगों ने बाघ को दौड़ा लिया। बाघ को यह बात बुरी लगी लेकिन चुपचाप बाघ जंगल की ओर भागता रहा और बंदर पीछे से हल्ला मचाते हुए उसका पीछा कर रहे थे। अचानक बाघ रुका और उसने कहा कि आप लोग क्यों बिलावजह हमारे पीछे पड़े हुए हैं। बंदरों ने कहा कि आप हमारी कॉलोनी के बीच से होकर क्यों निकले? इस पर बाघ ने कहा कि “आप सभी को मालूम है कि हम जंगल में लोकतंत्र के लिए काम कर रहे हैं, आपको हमारा साथ देना चाहिए। लेकिन आप लोग तो हमारे ही पीछे पड़े हुए हैं। मैं बूढ़ा हो गया हूं । मैं चाहता हूं कि आप लोगों के बीच से कोई बंदर इस जंगल का शासक बने। मैंने जानबूझकर कभी कोई बंदर को नुकसान पहुंचाया है क्या? वैसे भी अब मैं शाकाहारी हो चुका हूं। अब तो आप लोगों को खतरा नहीं होना चाहिए।” बाघ ने घास उखाड़ कर के मुंह में डालकर खाते हुए दिखाया।

अब दोनों टोली के बंदर शांत बैठकर बाघ का भाषण सुनते रहे। बाघ अपने मन की बात कहता ही जा रहा था। बाघ ने कहा कि आप लोगों का आपस में लड़ना अच्छी बात नहीं है। आप चाहे तो एक अच्छी कबड्डी की टीम तैयार कर सकते हैं जो जीत जाए, उसका इस पूरे जंगल पर राज हो सकता है। मैं खुद उसका राजतिलक करूंगा और कबड्डी के खेल में मैं रेफरी बनने के लिए तैयार हूं। बंदरों के सरदार को यह बात अच्छी लगी। उनमें से एक एकनेत्र बंदर ने कहा कि हम तैयार हैं लेकिन आज नहीं। जंगल के बीच के मैदान में कल सुबह से मिलेंगे।

अगली सुबह जंगल के मैदान में दोनों टोली के लोग अपने अपने खिलाड़ियों के साथ पहुंचे। बाघ वहां पहले से ही इंतजार कर रहा था । बाघ ने बारी-बारी से दोनों टोलियां का स्वागत किया और हाथ मिलाकर हर खिलाडी से उस का परिचय पूछा। उसके बाद खेल के नियम बताते हुए बाघ ने कहा कि दोनों टोली के जवान अपने-अपने दायरे में रहेंगे। एक टोली का जवान जब दूसरी टोली में प्रवेश करेगा तो वह जिनको भी छू लेगा, वह मर जाएंगे और दूर जाकर झाड़ी के पीछे बैठ जाएंगे। इसके बाद अगर कबड्डी बोलने के लिए आए खिलाडी को पकड़ लिया और उसे पाला छूने नहीं दिया तो वह खिलाड़ी मर जाएगा और दूर जाकर पीछे दूसरी तरफ की झाड़ियों में बैठ जाएगा।फिर एकनेत्रीय बंदर ने शंका करते हुए कहा कि झाड़ियों में क्यों बैठने जाएंगे?

बाघ ने कहा कि भाई तुम लोगों के चेहरे एक जैसे होते हैं इसलिए अगर कहीं चुपके से वापस टोली में आ गए तो हम कैसे पहचानेंगे कि तुम आउट हुए खिलाडी हो ?बाघ की बात से सभी संतुष्ट हो गए और खेल शुरू हो गया। जो भी खिलाड़ी किसी पाले में जाता और कबड्डी कबड्डी बोलते हुए जिसे भी छू लेता, वह खुद को मरा हुआ मानकर के झाड़ियों के पीछे चला जाता था। वहां पर बाघ परिवार के कई सदस्य थे जो उन्हें मार कर खा जाया करते थे धीरे-धीरे दोनों टोलियों के सदस्य कम पड़ने लगे। एक बार फिर एक नेत्रीय बंदर ने कहा कि जो लोग झाड़ियों में गए, वह वापस क्यों नहीं आए?

एकनेत्रीर बंदर की बात पर डांटते हुए बाघ बोला कि जो बंदर आउट हो गए हैं वह मारे शर्म के कॉलोनी में वापस चले गए। जो यहां मौजूद हैं उनमें ही कबड्डी करो या फिर आप लोग भी शर्म करते हुए अपने घर वापस चले जाओ। बाघ की बात से बाकी बचे बंदरों को ताव आ गया । एक बार फिर से कबड्डी शुरू हुई तो इस बार अंत में केवल दोनों टोलियों के सरदार बचे। बाघ ने कहा कि अब मुझे विजयी शासक की घोषणा करनी है इसलिए तुम दोनों आपस में कुश्ती लड़ जाओ । जो जीतेगा उसे मैं अपने कंधे पर बैठाकर पूरा जंगल घुमाऊंगा। बाघ की बात सुनते ही दोनों टोली के सरदार आपस में भिड़ गए।

धीरे-धीरे कुश्ती युद्ध में बदल चुकी थी और जबर टोली का सरदार मारा गया। गदर टोली के सरदार ने बाघ से कहा कि अब मुझे बंदरों का राजा घोषित करो। बाघ ने एक ही उछाल में गदर टोली के सरदार को मौत के घाट उतार दिया। बाघ ने दहाड़ते हुए कहा कि जो भी बाघ का पीछा करेगा, उसका यही हाल होगा। दोनों टोली की पूरी टीम समाप्त हो गई। हफ्त्तों तक जंगल में बाघ और उसके परिवार की पार्टी चलती रही। बचे खुचे मांस को बाघ ने सूअरों की टीम को दे दिया ताकि वह जंगल में इस मामले को न फैलाएं । लेकिन बंदरों के समाप्त हो जाने के कारण काफी दिनों तक कॉलोनी सुनसान रही।

इधर फिर से शहरों से पकड़े गए बंदरों के दो गुट कालोनी में वापस आ गए हैं। उनकी भाषा से लगता है कि दोनों अलग-अलग से शहर से आए हैं। एक बंदरों की टोली दूसरे बंदरों की टोली को गाली भी देती है लेकिन जी और आप कहकर, लेकिन बंदरों की दूसरी टोली सीधे अंग्रेजी गाली की भाषा में बात करती है। पता नहीं चल पा रहा है कि कौन से शहर से इन्हें लाया गया है?

(कहानी काल्पनिक है)

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