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युवाओं का ध्यान-चुनाव पर जोर

योगी सरकार का अनुपूरक बजट


अनुपूरक बजट का विपक्ष इसलिए विरोध कर रहा है क्योंकि यह युवाओं को समर्पित है और विपक्ष युवा विरोधी है। समाजवादी पार्टी के लोग जब सरकार में थे तो नौकरियों को गिरवी रख दिया था। निवेश बंद हो चुका था। दंगे होते थे, नौजवान फंसा दिए जाते थे। झूठे मुकदमे लाद दिए जाते थे।

विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच योगी सरकार ने विधानमंडल में वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 7301.52 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया। अनुपूरक बजट आम बजट का 1.33 प्रतिशत है। खास बात है कि युवाओं को केन्द्र में रखते हुए सरकार ने उन्हें डिजिटल तकनीक में सक्षम बनाने का इरादा जताया है। इसके लिए अनुपूरक बजट में 3000 करोड़ रुपये का कोष स्थापित करने का ऐलान किया गया है। बजट में ढांचागत विकास के लिए भी इंतजाम किया गया है। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने अनुपूरक बजट पेश करते हुए दावा किया कि इन साढ़े चार वर्षों के कार्यकाल में जनता का नजरिया बदला है। योगी सरकार ने कई नए रिकार्ड बनाए और कई रिकार्ड तोड़े गए हैं।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए
    17.23
    राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण के तहत मिले ऋण के ब्याज के लिए
  • 1500
    उदय विद्युत वितरण कंपनियों की हानियों की देनदारी के लिए
  • 13.54
    राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए मिले ऋण की अदायगी के लिए
  • 66.50
    एनपीके उर्वरक पर भुगतान किए गए वैट के लिए
  • 12.83
    प्रशिक्षु आईएएस के वेतन के भुगतान के लिए
  • 1.83
    महाधिवक्ता, उत्तर प्रदेश के कार्यालय के लिए आउटसोर्सिंग के भुगतान के लिए
  • 5.01
    उत्तर प्रदेश राज्य विधि विश्वविद्यालय प्रयागराज की स्थापना के लिए
  • 90
    अधिवक्ताओं को 30 वर्ष की सदस्यता पूरी करने पर 5 लाख रुपये देने के लिए
  • 2.08
    विधान परिषद सचिवालय में नियुक्ति परीक्षा कराने के भुगतान के लिए
  • 44.91
    विधान परिषद सचिवालय में ई-आफिस के लिए

अनुपूरक बजट में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर प्रोजेक्ट और ‘नव्य अयोध्या’ के लिए भी खजाना खोला गया है। प्रदेश के 7.85 लाख कार्मिकों का मानदेय बढ़ाने का इंतजाम कर उन्हें सौगात दी है। छुट्टा गोवंश की समस्या को लेकर किसानों की सुध ली गई है, वहीं गन्ना किसानों के जख्मों पर भी मरहम लगाने का प्रयास किया गया है। इसी तरह सरकार ने अधिवक्ताओं की सामाजिक सुरक्षा के प्रति सरोकार जताने के साथ अनुसूचित जातियों को लुभाने का दांव भी चला है।

मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे प्रदेश के लगभग 7.85 लाख मानदेय कार्मिकों की सरकार ने मुराद पूरी करने की कोशिश की है। अनुपूरक बजट में रोजगार सेवकों, प्रांतीय रक्षक दल के जवानों, ग्राम प्रहरी-चौकीदारों, आशा (ग्रामीण व शहरी) व आशा संगिनी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आंगनबाड़ी सहायिकाओं, शिक्षामित्रों, रसोइयों और अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने के लिए 699.16 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। सरकार के निर्णय के मुताबिक 01 जुलाई, 2021 से 16 लाख सरकारी कर्मचारियों एवं 12 लाख पेंशनर्स को 28 प्रतिशत महंगाई भत्ता और महंगाई राहत का भुगतान किया जाएगा।

इसके साथ ही छुट्टा गोवंश की समस्या से निजात दिलाने के लिए 300 करोड़ रुपये का इंतजाम किया गया है। वहीं बकाया गन्ना मूल्य के भुगतान को लेकर भी व्यवस्था की गई है। इसी तरह उप्र सहकारी चीनी संघ की मिलों के बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए 200 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। चुनावी वर्ष में सरकार ने सामाजिक सुरक्षा निधि योजना के तहत 30 वर्ष की सदस्यता पूरी करने वाले अधिवक्ताओं को पांच लाख रुपये की रकम देने के लिए 90 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई है।

सरकार पौराणिक एवं ऐतिहासिक परम्परा के स्थानों का सुन्दरीकरण करा रही है। इसी कड़ी में श्री राम मंदिर निर्माण के मद्देनजर ‘नई अयोध्या’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए पांच स्थानों पर जनसुविधाओं और पार्किंग स्थल के विकास की खातिर 209.69 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं वाराणसी में गंगा नदी से श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर तक के मार्ग को चौड़ा करने व उसकी मरम्मत के लिए और 40 करोड़ रुपये का इंतजाम किया गया है। चुनाव को देखते हुए सरकार छह महीने में अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए कमर कसे हुए है। अनुपूरक बजट में बुन्देलखण्ड एक्सप्रेसवे के लिए और 100 करोड़ तथा बलिया लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

अनुसूचित जातियों को साधने के मकसद से सरकार ने राजधानी लखनऊ में डॉ.भीमराव आंबेडकर स्मारक व सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रविधान किया है। इसके साथ ही उदय योजना के तहत विद्युत वितरण कंपनियों के घाटे की भरपाई के लिए 1500 करोड़ रुपये का इंतजाम किया गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2021-22 का अनुपूरक बजट प्रदेश के कोरोना वॉरियर्स और युवाओं को समर्पित है। प्रदेश सरकार ने अपने कार्यकाल में अब तक साढ़े चार लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी से जोड़ा है। आज प्रदेश में बेरोजगारी की दर 17.5 प्रतिशत से घटकर 5 प्रतिशत से नीचे आ गई है। उन्होंने कहा कि नौजवानों के लिए 03 हजार करोड़ रुपये की निधि के जरिए 01 करोड़ युवाओं को टैबलेट-स्मार्टफोन की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। उन्होंने कहा कि एक नौजवान को कम से कम 03 प्रतियोगी परीक्षाओं में जाने के लिए राज्य सरकार भत्ता देगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के प्रयासों एवं बढ़ते निवेश से रोजगार में वृद्धि हुई है। प्रदेश में 1.61 करोड़ नौजवानों को निजी क्षेत्र में रोजगार प्राप्त हुआ है तथा 60 लाख से अधिक युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया है। पिछले पांच वर्षों के दौरान प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय लगभग दोगुनी हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रदेश कानून व्यवस्था की स्थिति में देश में एक रोल मॉडल बनकर उभरा है। अब दौर बदल गया है अब माफिया को जो भी साथ लेकर जाएगा उसे मालूम है कि पीछे-पीछे बुलडोजर भी आएगा। प्रदेश में माफियाराज को समाप्त करते हुए सरकार ने 1500 करोड़ रुपये की अवैध सम्पत्ति जब्त की है। इस सम्पत्ति पर गरीबों के लिए आवास निर्मित किए जाएंगे। अब माफियाओं द्वारा कब्जा की गई जमीन पर गरीब और दलितों के आवास बनाए जाएंगे, यह सामाजिक न्याय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुपूरक बजट का विपक्ष इसलिए विरोध कर रहा है क्योंकि यह युवाओं को समर्पित है और विपक्ष युवा विरोधी है। समाजवादी पार्टी के लोग जब सरकार में थे तो नौकरियों को गिरवी रख दिया था। निवेश बंद हो चुका था। दंगे होते थे, नौजवान फंसा दिए जाते थे। झूठे मुकदमे लाद दिए जाते थे।

औसत तीसरे दिन उत्तर प्रदेश में दंगा होता था लेकिन आज दंगा मुक्त प्रदेश है। उन्होंने कहा कि जो लोग अयोध्या की तरफ झांकते नहीं थे, आज वे लोग कह रहे हैं कि राम तो हमारे भी हैं। वर्ष 2017 के पहले लोग कहते थे कि हम कंस की मूर्ति लगाएंगे लेकिन आज जब लगता है कि वृहद समाज माफ नहीं करने वाला है तो दंडवत होकर कहते हैं कि हम भी राम और कृष्ण के भक्त हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों को लगता था कि अगर कुम्भ के लिए कुछ कर देंगे तो टोपी लगाकर मुबारकबाद नहीं दे पाएंगे। लेकिन आज सबकी टोपियां उतर गई हैं। विपक्ष पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें गरीबों के घर में दीया जलाना पसंद है, जबकि आपको अंधेरा पसंद है और आपने वह काम किया है।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपना स्मारक बनाना पसंद करते हैं जबकि हम लोग देश की प्रतिष्ठित हस्तियों के स्मारक बनाते हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने अनुपूरक बजट को प्रदेश की गरीब जनता के लिए दिल दुखाने वाला करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार तमिलनाडु की तरह पेट्रोल की कीमत तीन रुपये कम कर देती तो जनता को जरूर राहत मिलती। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने जिस तरह से अंधाधुंध वादे व घोषणाएं की हैं। उसके अनुसार प्रबंधन न होने से ये घोषणाएं सिर्फ कागज पर ही रह जाएंगी जबकि बसपा की सरकार में घोषणाओं से पहले वित्तीय प्रबंधन करना जरूरी था। उन्होंने कहा कि बसपा की व दूसरी सरकारों में यही एक फर्क है।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राम गोविन्द चौधरी ने कहा कि अनुपूरक बजट सत्य से परे और जनता को भटकाने वाला है। उन्होंने कहा कि अगस्त 2021 तक पूंजीगत मद में सिर्फ 18.07 प्रतिशत वित्तीय स्वीकृति जारी हुई है और पंचायत राज, नगरीय विकास, बाल विकास आदि कई विभागों में तो पूंजीगत मद में जीरो प्रतिशत वित्तीय स्वीकृति हुई है। ऐसे में अनुपूरक बजट का कोई औचित्य नहीं है। सरकार सिर्फ अपना झूठा प्रचार कर रही है। इस अनुपूरक बजट से जनता को कोई लाभ नहीं है और यह सिर्फ चुनावी है। चौधरी ने सरकार पर आरोपों की झड़ी लगा दी।

विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी के दल नेता शाह आलम ने कहा कि इस अनुपूरक बजट की कोई आवश्यकता नहीं है और सच यह है कि जमीन पर हर आदमी परेशान है। उन्होंने कहा कि अगर मेरिट (गुणदोष) के आधार पर विधानसभा चुनाव होगा तो भाजपा को 2022 में 50 सीटें भी जीतनी मुश्किल होंगी। उन्होंने कहा कि यह इस देश की बीमारी है कि लोग मेरिट पर नहीं जाति और धर्म पर चुनाव लड़ते हैं।

कांग्रेस दल नेता की आराधना मिश्र ने कहा कि अनुपूरक बजट जनहित के लिए होता है न कि राजनीतिक हित के लिए। इस बजट में कोई जनहित का विषय नहीं है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद किसानों का सर्वाधिक अपमान भाजपा की सरकार में हुआ है। =

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