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राजस्थान में पानी और चारे का संकट गहराने की आशंका, अशोक गहलोत ने सरकार को चेताया; पहले से तैयारी करने की दी सलाह

जयपुर: राजस्थान में संभावित जल संकट, चारे की कमी और ग्रामीण रोजगार पर पड़ने वाले असर को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार को समय रहते जरूरी कदम उठाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई इलाकों में सूखे जैसे हालात हैं। बांधों में पानी की आवक नहीं हुई है और फसलें भी प्रभावित हुई हैं। चारे का पर्याप्त उत्पादन नहीं होने से पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। गहलोत ने पेयजल, पशुधन संरक्षण और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को लेकर पहले से योजना बनाने पर जोर दिया।

पानी, चारा और रोजगार पर मंडरा रहा संकट

सोमवार को जोधपुर दौरे पर रहे गहलोत ने जयपुर रवाना होने से पहले हवाई अड्डे पर मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि इस बार परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। जोधपुर में अभी से पानी की समस्या सामने आने लगी है और आने वाले समय में प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी परेशानी बढ़ सकती है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार से कहा कि संकट गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय अभी से सभी जरूरी इंतजाम किए जाएं। उन्होंने दूसरे राज्यों से पानी और चारे की व्यवस्था करने सहित संभावित विकल्पों पर काम शुरू करने की जरूरत बताई, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को समय पर राहत मिल सके।

सूखाग्रस्त इलाकों की पहचान कर खोले जाएं चारा डिपो

गहलोत ने सूखे की आशंका को देखते हुए प्रभावित तहसीलों और गांवों की पहचान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों को अकालग्रस्त घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। इसके बाद चारा डिपो खोलने, चारे की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और पशुओं के लिए शिविर लगाने की व्यवस्था की जाए।

उन्होंने चारे की कीमतें बढ़ने की स्थिति में पशुपालकों को आर्थिक राहत देने के लिए अनुदान सहित अन्य उपायों पर विचार करने की भी जरूरत बताई। राजस्थान में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। ऐसे में चारे की कमी से पशुओं के सामने भोजन का संकट खड़ा होने के साथ पशुपालकों की कमाई भी प्रभावित हो सकती है।

फसलें प्रभावित हुईं तो मजदूर परिवारों की बढ़ेंगी मुश्किलें

गहलोत ने ग्रामीण रोजगार को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि फसलें प्रभावित होने से उन गरीब परिवारों की आजीविका पर असर पड़ सकता है, जिनके पास अपनी जमीन नहीं है और जो मजदूरी करके परिवार चलाते हैं।

खेती पर असर पड़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी के अवसर कम हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में प्रभावित परिवारों को राहत देना और उनके लिए रोजगार की व्यवस्था करना सरकार के सामने चुनौती बन सकता है। गहलोत ने पानी और चारे के साथ ग्रामीण आजीविका को सुरक्षित रखने के लिए भी ठोस तैयारी करने की जरूरत बताई।

पंचायत चुनाव के बीच नगर निगम चुनावों पर भी उठाए सवाल

पंचायत चुनावों के बीच गहलोत ने नगर निगम चुनावों में कथित अनियमितताओं और पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि जोधपुर और जयपुर सहित कुछ जगहों पर कांग्रेस को अधिक वोट मिलने के बावजूद बोर्ड गठन की स्थिति अलग रही।

गहलोत ने ग्रामीणों से पंचायत और जिला परिषद चुनावों में सक्रिय रूप से भाग लेने और अपने प्रतिनिधियों को चुनने की अपील की। इस तरह उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं के साथ चुनाव से जुड़े मुद्दों को भी उठाया।

एफआईआर दर्ज करने में देरी पर भी जताई नाराजगी

गहलोत ने एक मामले में एफआईआर दर्ज करने में देरी को लेकर सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने के बाद समय पर एफआईआर दर्ज कर ली जाती तो ऐसी स्थिति नहीं बनती और कांग्रेस नेताओं को धरने पर बैठने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता।

उन्होंने बताया कि हालात ऐसे बने कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को खुद धरने पर बैठना पड़ा। गहलोत ने इस घटनाक्रम का जिक्र करते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

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