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सुरक्षाबलों के लिए अब नया खतरा बन रहे हैं आतंकियों के कार बम

2018 में उच्च प्रशिक्षित स्नाइपर आतंकवादियों ने कश्मीर घाटी में विद्रोह के नियमों को बदल दिया था। जिसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के शार्पशूटरों को घाटी के लिए रवाना किया गया था। अब पुलवामा में एक बार फिर से आतंकियों ने विस्फोटकों से भरी गाड़ी को सीआरपीएफ के काफिले से टकरा दिया था। इस आत्मघाती हमले में 40 जवान शहीद हो गए हैं।

इस घटना के बाद से विस्फोटक से लदी कार (वीबीआईईडी) सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है। सुरक्षाबलों को जांच एजेंसियों से ऐसा इनपुट मिला है कि आतंकी इस तरह के और हमले कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि बम बनाने वाले एक से ज्यादा वाहन में विस्फोटकों को लगाना पसंद करते हैं क्योंकि यह प्रक्रिया काफी समय लेने वाली होती है और इसमें विशेषज्ञता की जरुरत है।

इसी वजह से आईईडी विशेषज्ञ अपने ठिकानों, संभवत: एलओसी के नजदीक पाकिस्तान नियंत्रित क्षेत्र में लौटने से पहले चार-पांच वाहनों को तैयार कर देते हैं। इस खतरे का सामना करने के लिए एजेंसियों ने एक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है जिससे कि आईईडी विशेषज्ञों का पता लगाया जा सके। जिसमें जैश-ए-मोहम्मद कमांडर और अफगान युद्ध का सेवानिवृत्त अब्दुल राशिद गाजी सूची में सबसे ऊपर हैं।

एक सूत्र ने कहा कि इस तरह के हमलों से निपटने के लिए जल्द ही एडवाइजरी जारी की जाएगी। खुफिया अधिकारियों के अनुसार, ‘वीबीआईईडी हथियारों के बाद आतंकियों द्वारा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।’ एक अधिकारी ने कहा, ‘इस तरह के हमलों में गाड़ी के हिस्से अतिरिक्त बम के टुकड़ों के तौर पर इस्तेमाल होते हैं। इसके अलावा गाड़ी में मौजूद डीजल और पेट्रोल भी बम धमाके को और ज्यादा शक्तिशाली बना देता है क्योंकि इसमें ईंधन भी जलता है।

वीबीआईईडी ज्यादा इस्तेमाल नहीं होती है क्योंकि उन्हें तैयार करने में काफी ज्यादा समय, विशेषज्ञता और अनुसंधान लगते हैं। इंटेलिजेंस के एक अधिकारी ने कहा, ‘इसकी तैयारी के लिए बहुत मात्रा में विस्फोटकों और दूसरे उपकरणों की आवश्यकता होती है। जिन्हें कि असेंबल किया जाता है और बड़े ही ध्यान से कारों के अंदर उन्हें तारों से बांधा जाता है ताकि थोड़ी सी भी छेड़छाड़ होने पर वह फट जाए।’

सुरक्षा अधिकारी काम करने में आए इस बदलाव से काफी चिंतित हैं क्योंकि वीबीआईईडी हमलों को रोकना काफी मुश्किल होता है। यदि सुरक्षाबल उन्हें चेकिंग के दौरान पकड़ भी लें तब भी उससे धमाका किया जा सकता है। कार बम धमाके इराक और अफगानिस्तान के लिए भी बुरा सपना रहे हैं। बम निरोधी दस्ते के इंजीनियर का कहना है कि यदि इस तरह बम को पकड़ भी लिया जाए तो इन्हें कई तरीकों से एक्टिवेट किया जा सकता है।

सुरक्षा अधिकारी के पास इस बम को विस्फोट करने से बचाने का बहुत कम समय होता है। एक अधिकारी ने कहा, ‘बम आमतौर पर रीयर सीट या बूट पर लगा होता है। इसे ड्राइवर की तरफ के साइड गेट को खोलकर, इंजन को ऑन या बंद करके भी उड़ाया जा सकता है। इसके अलावा एक्सीलेटर को कम या ज्यादा करके भी धमाका किया जा सकता है।’

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