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महागठबंधन बनाकर भाजपा का विजय रथ रोकना की तैयारी में कांग्रेस

नई दिल्ली: 2019 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन बनाकर भाजपा का विजय रथ रोकने की तैयारी में लगी कांग्रेस पार्टी की कोशिशों को एक और बड़ा झटका लगा है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनाव में बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के किनारा करने के बाद अब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के साथ किसी भी तरह का गठबंधन करने से इंकार कर दिया है। दिल्ली में आयोजित सीपीएम की तीन दिवसीय अहम बैठक में यह फैसला लिया गया। दिल्ली में बीते शनिवार से चल रही तीन दिवसीय केंद्रीय समिति की बैठक में सीपीएम नेताओं ने फैसला लिया है कि लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं किया जाएगा। हालांकि इस बैठक में लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के साथ सभी तरह के विकल्पों को खुला रखने की बात कही गई है। इससे पहले अप्रैल महीने में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भी फैसला लिया गया था कि लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं किया जाएगा। सीपीएम के इस फैसले को कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। आपको बता दें कि हाल ही में बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने पहले छत्तीसगढ़ और उसके बाद मध्य प्रदेश-राजस्थान में कांग्रेस को झटका देते हुए विधानसभा चुनाव में अकेले उतरने का ऐलान किया। इन तीनों राज्यों में से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में बसपा के साथ चुनाव लड़कर कांग्रेस सत्ता में वापसी का सपना देख रही थी। मायावती ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में गठबंधन ना हो पाने के लिए दिग्विजय सिंह समेत कांग्रेस के स्थानीय नेताओं को जिम्मेदार बताया। मायावती के बाद कांग्रेस को दूसरा झटका सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दिया। अखिलेश यादव ने भी मध्य प्रदेश में कांग्रेस से अलग होकर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। ऐलान के साथ अपने प्रत्याशियों की दो सूची जारी करते हुए अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश कांग्रेस के बागी नेताओं को ऑफर दिया है कि समाजवादी पार्टी उन्हें टिकट दे सकती है। अखिलेश यादव ने अलग चुनाव लड़ने के फैसले के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि गठबंधन पर फैसला लेने में कांग्रेस ने काफी इंतजार कराया।

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