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अभी भी जच्चा यहां साड़ियों की आड़ में जन्म देती हैं बच्चों को

हजारों करोड़ रुपए स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर खर्च करने के बाद भी यहां पर परिणाम शून्य ही है। जच्चा को आज भी साड़ियों की ओट में खुले में ही बच्चे को जन्म देना पड़ रहा है, तो बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाओं के दावे झूठे ही साबित माने जाएंगे। पहले जयपुर और अब अलवर के बहरोड़ में कुछ ऐसा हुआ है। जहां चिकित्सकों की लापरवाही के चलते कस्बे के रैफरल अस्पताल के अहाते में साड़ियों की ओट में प्रसूता ने बच्ची को जन्म दिया। परिजनों के अनुसार जच्चा व बच्चा दोनों ठीक हैं, लेकिन अस्पताल की लापरवाही के चलते काफी परेेशानी उठानी पड़ी।

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अभी भी जच्चा यहां साड़ियों की आड़ में जन्म देती हैं बच्चों को दरअसल रविवार दोपहर को बहरोड़ के नजदीक स्थित एक गांव की ​निवासी प्रसूता नेहा को उसके परिजन इस अस्पताल में लाए थे। परिजनों का कहना है कि नेहा को काफी दर्द हो रहा था। 

डॉक्टरों ने नहीं दिखाई गम्भीरता

लेकिन अस्पताल में मौजूद  चिकित्सकों ने उसे इंजेक्शन लगाया और कहा कि अभी डिलीवरी नहीं होगी इसे बाहर टहलने दो। इस दौरान नेहा की प्रसव पीड़ा बढ़ती चली गई। घबराए परिजन सूचना देने के लिए दौड़कर अस्पताल कर्मियों के पास पहुंचे।

परिजनों ने इसकी जानकारी कई बार अस्पताल कर्मियों को दी, लेकिन उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया। प्रसव पीड़ा अधिक होने पर परिवार की महिलाओं ने ही अस्पताल के परिसर में एक ओर नेहा को ​जमीन पर लिटाया व उसके चारों और साड़ीयां लगाकर उसकी डिलीवरी कराई। जिसमें नेहा ने एक बच्ची को जन्म दिया।

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उठते रहें है सवाल

खुले में​ डिलीवरी की जानकारी मिलते ही अस्पताल में हड़कंप मच गया। इसके बाद अस्पताल प्रभारी डॉ सुरेश यादव व महिला चिकित्सक डॉक्टर प्रियंका यादव मौके पर पहुंचे।

इसके बाद जच्चा व बच्चा का वार्ड में शिफ्ट किया गया। गौरतलब है कि ​कुछ दिन पूर्व राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सर्राफ के विधानसभा क्षेत्र में स्थित एक सरकारी अस्पताल के बाहर सड़क पर ही प्रसूता ने एक बच्चे को जन्म दिया था।

 

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