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आखिरी बजट में किसानों के लिए खजाना खोलेगी मोदी सरकार

1 फरवरी को पेश होने वाले बजट का मुंह अबकी बार किसानों की तरफ होगा। केंद्र सरकार अपने आखिरी बजट में सबसे ज्यादा किसानों को खुश करने की कोशिश करेगी। इसके लिए सरकार ने सारी तैयारियां भी कर लीं हैं।

खर्च करेगी 9.8 बिलियन डॉलर

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार किसानों को खुश करने के लिए 70 हजार करोड़ रुपये (9.8 बिलियन डॉलर) की राशि को खर्च करने का एलान कर सकती है। हालांकि किसानों को इस सुविधा के बाद अन्य तरह की सब्सिडी को वापस लिया जा सकता है।

खाते में एकमुश्त ट्रांसफर होगी रकम

सरकार सभी तरह के किसानों, बेरोजगारों और गरीब लोगों को एकमुश्त 30 हजार रुपये की मदद देने का एलान कर सकती है। यह रकम सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक इस मदद को यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम (यूबीआई) के तहत दिया जाएगा।

खत्म हो जाएगी सब्सिडी

हालांकि इस स्कीम के लागू होने के बाद लोगों को राशन और एलपीजी सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी का फायदा नहीं मिलेगा। इसमें वो किसान भी शामिल होंगे, जो दूसरों के यहां मजदूरी करते हैं। नए प्रस्ताव के मुताबिक किसानों को खेती के लिए अब सरकार सीधे खाते में पैसे देगी। खास बात यह है कि जिन किसानों के पास अपनी जमीन नहीं है, सरकार उन्हें भी इस स्कीम में शामिल करके फायदा पहुंचाएगी।

प्रत्येक महीने मिलेगी इतनी रकम

मोदी सरकार के प्लान के मुताबिक गरीब किसानों व बेरोजगारों को प्रत्येक महीना 2500 हजार रुपया दिया जाएगा। यह राशि हर महीने के बजाए एकमुश्त दी जाएगी।  किसान के परिवार को भी मदद पहुंचाई जा सकती है।  राहत पैकेज में बीमा, कृषि लोन, आर्थिक मदद दी जा सकती है। स्कीम में छोटे, सीमांत और बटाईदारों या किराया पर किसानी करने वाले किसानों को फायदा देने पर जोर है।

क्या है मोदी सरकार की स्कीम

किसानों को राहत देने के लिए मोदी सरकार ने जिन दो मॉडल का अध्ययन किया है उसमें ओडिशा का मॉडल ज्यादा दमदार है। ओडिशा के कालिया मॉडल में किसानों को 5 क्रॉप सीजन में 25000 रुपये दिए जाते हैं।  हालांकि, मोदी सरकार किसान को सालाना एक मुश्त आर्थिक मदद देने पर विचार कर रही है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने तेलंगाना सरकार के मॉडल का भी अध्ययन किया है।

किसानों को 3 लाख तक ब्याज मुक्त लोन

एनडीए सरकार संकटग्रस्त कृषि क्षेत्र के लिए एक ऐसा पैकेज देने के प्रस्ताव पर काम कर रही है जिसके तहत ब्याज रहित और बिना गारंटी के कर्ज दिया जाएगा और आय बढ़ाई जाएगी। सूत्रों का कहना है कि कृषि मंत्रालय इस बारे में नीति आयोग के साथ बातचीत करके एक ऐसी योजना बनाने वाले है जिसमें छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने और वित्तीय राहत प्रदान करने के उपाय शामिल होंगे। इसमें 3 लाख रुपये तक का ब्याज रहित कर्ज भी शामिल है।

क्या है यूबीआई

संसद में वर्ष 2017-17 के लिए पेश आर्थिक सर्वेक्षण में इसका जिक्र किया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया था कि यूबीआई एक बेहद शक्तिशाली विचार है और यदि यह समय इसे लागू करने के लिए परिपक्व नहीं है तो इस पर गंभीर चर्चा तो हो ही सकती है।

इसमें कहा गया है कि सिर्फ केन्द्र सरकार की ही करीब 950 योजनाएं चलती हैं जिस पर सकल घरेलू उत्पाद की करीब पांच फीसदी राशि खर्च होती है। इसके अलावा मध्यम वर्ग को खाद्य, रसोई गैस और उर्वरक पर सकल घरेलू उत्पाद की तीन फीसदी राशि खर्च होती है। यह राशि लक्ष्य समूह तक पहुंच सके, इसमें यूबीआई सहायक हो सकता है।

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