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ओलिंपिक में भारत की असफलता के चीनी मीडिया ने बताया कारण

नई दिल्ली। दुनिया में आबादी के लिहाज से भारत का दूसरा नंबर है। दुनिया की कुल आबादी का करीब छठवां हिस्‍सा भारत में रहता है, बावजूद इसके ओलिंपिक खेलों में भारत की ओर से पदक जीतने वालों की संख्‍या बहुत कम है।olympic-india-fails_12_08_2016

चीन की मीडिया में बताया गया है कि दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजन में भारत क्‍यों बार-बार फेल होता रहा है। चीन की Toutiao.com पर प्रकाशित लेख में कहा गया है कि साल 2012 के ओलिंपिक में भारत को महज छह मेडल मिले थे, जिनमें से एक भी स्‍वर्ण पदक नहीं था।

आबादी के लिहाज से देखा जाए तो ओलिंपिक खेलों में भारत को सबसे कम पदक मिलते हैं। क्‍या आपने कभी सोचा है फिर ऐसा क्‍यों है कि भारत में ओलिंपिक के पदक जीतने वालों के नाम उंगलियों पर गिने जा सकते हैं।

चीन की सरकारी म‍ीडिया में एक खबर प्रकाशित हुई है, जिसमें बताया गया है कि भारत में ओलिंपिक पदक जीतने वालों की संख्‍या कम क्‍यों है। चीनी मीडिया के अनुसार, भारत में बुनियादी सुविधाओं की कमी, खराब स्वास्थ्य, गरीबी, खेलों में लड़कियों को शामिल नहीं होने देने की इजाजत, लड़कों में डॉक्टर और इंजीनियर बनने का जुनून अधिक है।

इसके अलावा अन्य खेलों की जगह क्रिकेट की अधिक लोकप्रियता, भारत में कम होता हॉकी का वैभव और ग्रामीण इलाकों में ओलिंपिक के बारे में सूचनाओं की कमी के कारण ओलिंपिक में भारत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं।

लेख में आगे कहा गया है कि अमीरों और गरीबों के बीच में बहुत बड़ा अंतर है। ऐसे में गरीबों के लिए यह बहुत मुश्किल हो जाता है कि वे अपनी जिंदगी चला सकें। वे खेलों की प्रैक्‍िटस के लिए अपनी सारी ऊर्जा लगा देते हैं। सरकार भी खेलों की बुनियादी सुविधाओं के लिए बहुत कम निवेश करती है।

Chinanews.com के अनुसार, मास स्‍पोर्ट्स और कॉम्‍पीटीटिव स्‍पोर्ट्स दोनों में भारत बहुत पीछे है। भारत में स्‍पोर्ट्स कल्‍चर की कमी के करण ओलिंपिक में भारत का प्रदर्शन खराब है। अधिकांश परिवार चाहते हैं कि उनके बच्‍चे डॉक्‍टर या एकाउंटेंट बनें। परिवार और रिश्‍तेदारों द्वारा स्‍पोर्ट्स टैलेंट को दबाया जाता है। उन्‍हें उच्‍च स्‍तरीय प्रतिस्‍पर्धाओं में शामिल होने से रोका जाता है।

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