
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की किताबों को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। राज्य की भाजपा सरकार ने विधानसभा पुस्तकालय से उनके द्वारा ली गई 19 किताबों को वापस करने की मांग की है। सरकार के मंत्री गौरी शंकर घोष ने चेतावनी दी है कि तय समय पर किताबें नहीं लौटाने पर ममता बनर्जी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
मामला विधानसभा पुस्तकालय से जारी की गई उन किताबों का है, जिनकी वापसी की समयसीमा बीत चुकी है। मंत्री गौरी शंकर घोष के मुताबिक, पुस्तकालय की ओर से ममता बनर्जी को कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला।
19 किताबों की वापसी को लेकर विवाद
गौरी शंकर घोष ने कहा कि पुस्तकालय के नियमों के तहत तय समय पर किताबें वापस नहीं करने पर पाठक पर जुर्माना लगाया जा सकता है। जुर्माने की राशि संबंधित पुस्तकालय प्राधिकरण तय करता है। वहीं, किताब खो जाने या खराब होने की स्थिति में उसकी नई प्रति देकर भरपाई करनी होती है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के मामले में भी इसी तरह के नियम लागू किए जाएंगे।
मंगलवार को घोष ने दावा किया था कि 19 किताबों को लौटाने की निर्धारित अवधि समाप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि विधानसभा पुस्तकालय के अधिकारियों ने ममता बनर्जी से कई बार किताबें वापस करने को कहा, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि किताबें वापस नहीं किए जाने पर कानूनी कदम उठाया जा सकता है।
ममता बनर्जी के पास नहीं हैं किताबें?
इस बीच, सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि ममता बनर्जी ने अधिकारियों को बताया है कि संबंधित किताबें उनके पास नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, माना जा रहा है कि ये किताबें मुख्यमंत्री के कमरे में रखी हुई हैं। फिलहाल उस कार्यालय में भाजपा नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी बैठते हैं।
हालांकि, पुस्तकालय अधिकारियों का कहना है कि जब तक किताबें औपचारिक रूप से वापस नहीं की जातीं, तब तक उन्हें लौटाई गई नहीं माना जाएगा।
ममता की लिखी किताबों पर भी उठे सवाल
गौरी शंकर घोष ने सरकारी पुस्तकालयों में ममता बनर्जी की लिखी किताबें खरीदे जाने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने विशेष रूप से ‘एपांग ओपांग झपांग’ किताब का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी किताबों की कोई उपयोगिता नहीं है और उन्होंने इन्हें सरकारी पुस्तकालयों से हटाने के निर्देश दिए हैं।
घोष ने कहा कि सरकारी पुस्तकालयों में ऐसी किताबें नहीं रखी जाएंगी, जिन्हें वे गैरजरूरी मानते हैं। इसके बजाय प्राचीन भारतीय इतिहास और संस्कृति, स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, काजी नजरुल इस्लाम और श्यामा प्रसाद मुखर्जी से संबंधित किताबों को जगह दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से इन प्रमुख हस्तियों के योगदान को भुलाने की कोशिश की जाती रही है। अब उनके जीवन और कार्यों से जुड़ी पर्याप्त सामग्री पुस्तकालयों में उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर इन लोगों को ही भुला दिया गया, तो फिर बंगाली होने की पहचान किस आधार पर होगी।



