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सिर्फ भाई की कलाई नहीं, भाभी की चूड़ियों पर भी सजती है राखी, जानिए लुंबा राखी की खास परंपरा और महत्व

नई दिल्ली: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती है। हालांकि देश के अलग-अलग हिस्सों में इस पर्व से जुड़ी कई क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराएं भी निभाई जाती हैं। इन्हीं में एक खास परंपरा है भाभी को लुंबा राखी बांधने की। सामान्य राखी से अलग लुंबा राखी भाभी के लिए तैयार की जाती है और इसे कलाई पर बांधने के बजाय चूड़ियों या कंगन के साथ सजाया जाता है।

लुंबा राखी की सबसे बड़ी पहचान उसका खास डिजाइन होता है। इसमें मोतियों, लटकन, कुंदन, सजावटी धागों और दूसरी खूबसूरत वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाता है। इसे सीधे कलाई पर बांधने के बजाय भाभी की चूड़ियों या कंगन में लटकाया जाता है। यही वजह है कि यह राखी के साथ पारंपरिक आभूषण का सुंदर मेल नजर आती है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में इसके डिजाइन और पहनने का तरीका अलग हो सकता है।

भाभी को क्यों बांधी जाती है लुंबा राखी?

कुछ पारिवारिक और क्षेत्रीय परंपराओं में भाभी को परिवार का अहम हिस्सा माना जाता है। शादी के बाद भाई के जीवन में उसकी पत्नी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी रिश्ते को सम्मान देने के लिए कई परिवारों में बहन भाई के साथ भाभी को भी रक्षाबंधन के उत्सव में शामिल करती है। ननद की ओर से भाभी को लुंबा राखी देना दोनों के बीच स्नेह, अपनापन और पारिवारिक जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है।

ननद-भाभी के रिश्ते में बढ़ाती है अपनापन

लुंबा राखी की परंपरा का भावनात्मक पक्ष भी खास है। इसके जरिए भाई और उसकी पत्नी को परिवार में एक साथ सम्मान और अपनापन देने की भावना व्यक्त की जाती है। इस तरह रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार के दूसरे रिश्तों को भी प्रेम और स्नेह से जोड़ने का अवसर बन जाता है। लुंबा राखी इसी भावना का प्रतीक मानी जाती है।

पूरे देश में नहीं निभाई जाती यह परंपरा

यह समझना जरूरी है कि लुंबा राखी बांधने की परंपरा पूरे भारत में एक जैसी नहीं है। यह कुछ समुदायों, क्षेत्रों और परिवारों में ज्यादा प्रचलित है। इसलिए इसे रक्षाबंधन की अनिवार्य रस्म नहीं माना जाता, बल्कि क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपरा के रूप में समझा जाता है। जिन परिवारों में यह परंपरा निभाई जाती है, वहां यह रक्षाबंधन के उत्सव में एक अलग तरह की खुशी और अपनापन जोड़ती है।

इस तरह लुंबा राखी केवल सजावटी राखी नहीं, बल्कि रिश्तों को सम्मान देने और परिवार में प्रेम तथा अपनापन बढ़ाने की परंपरा भी है। भाई की कलाई पर बंधी राखी जहां भाई-बहन के रिश्ते की मजबूती का प्रतीक मानी जाती है, वहीं भाभी की चूड़ियों पर सजी लुंबा राखी ननद-भाभी के रिश्ते में स्नेह और सम्मान की एक खूबसूरत कड़ी जोड़ती है।

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