उत्तराखंडदस्तक-विशेष

मोदी के सपनों को पंख लगाएंगे त्रिवेंद्र सिंह रावत

-गोपाल सिंह पोखरिया
देवभूमि उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी की ओर से चुनाव के दौरान नारा दिया था कि ‘अटल जी ने बनाया है, अब मोदी जी संवारेंगे’। इस पर कई सवाल भी उठे कि पूर्व में भी यहां पांच साल भाजपा सरकार रही है तो फिर क्या उसने उत्तराखंड में कुछ नहीं किया। बहरहाल जनता को प्रधानमंत्री की डबल इंजन वाली बात भा गयी। बताते चलें कि प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड की चुनावी सभाओं में यहां की जनता को कहा था कि इसके विकास के लिए डबल इंजन (यानि उत्तराखंड व केंद्र में दोनों ही जगह भाजपा की सरकार) लगाने को कहा था। जनता ने मोदी जी को डबल इंजन भी दे दिया। अब यहां की जनता उम्मीद कर रही है कि मोदी जी ने जो उनको सपना दिखाया था, उसे पूरा करें। अभी कुछ भी कहना बेहद मुश्किल है, लेकिन त्रिवेंद्र रावत की नई नवेली सरकार ने जिस प्रकार से कार्य शुरू किए हैं उससे कहीं न कहीं लगता है कि देवभूमि में वास्तव में देवों की भूमि बन सकेगी। भ्रष्टाचार के लिए पूरे देश में कुख्यात हो चुके उत्तराखंड की नई त्रिवेंद्र रावत सरकार ने जीरो टॉलरेंस पर जो कार्य शुरू किए हैं, उससे उम्मीद जग रही है। सत्ता में आने के बाद महज तीन दिनों के सत्र में त्रिवेंद्र सरकार सदन में दो महत्वपूर्ण विधेयक (लोकायुक्त व तबादला एक्ट) लेकर आई है। इन दोनों का इसलिए भी महत्व है कि प्रदेश में भ्रष्टाचार को लेकर काफी अधिक आवाज उठती रही। वहीं दूसरी ओर तबादलों को लेकर तो बार-बार आरोप लगते हैं कि यहां जमकर रिश्वत ली जाती है। शिक्षा विभाग में भी इसका सबसे अधिक असर दिखता है। यही कारण है कि दुर्गम क्षेत्र के स्कूल शिक्षक विहीन रहते हैं, जबकि सुविधाजनक स्थानों पर आवश्यकता से अधिक शिक्षक। इसके अलावा भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की उम्मीद इसलिए भी दिख रही है जिस प्रकार से मुख्यमंत्री ने एन एच-74 घोटाले में पीसीएस रैंक के छह अफसरों को निलंबित करते हुए सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है, वह भी काबिलेतारीफ है। वहीं खनन को लेकर प्रदेश में बड़ा आरोप सरकारों पर लगता रहा है। इस पर भी उन्होंने सख्त कदम उठाने की बातें कही है। हालांकि इसी बीच खनन को लेकर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पूरे प्रदेश की नदियों पर वैध अवैध सारे खनन पर रोक लगा दी है। बहरहाल सीएम त्रिवेंद्र रावत व उनके कैबिनेट सहयोगियों ने जिस प्रकार की तेजी दिखाई है उससे उम्मीद तो जगी है।
सबसे पहले बात ऊधमसिंह नगर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 74 के लिए भूमि अधिग्रहण व मुआवजे में की गई अनियमितताओं की। इसमें बताया जा रहा है कि अधिकारियों ने कृषि भूमि को कृषि दिखाकर मुआवजा अधिक दिलवा दिया। प्रारंभिक जांच में इसमें करीब ढाई सौ करोड़ के घोटाले की बात सामने आ रही है। इस पर सीएम त्रिवेंद्र रावत ने कड़ा फैसला लेते हुए सी.बी.आई की जांच के निर्देश कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ धर्मयुद्व की तरह लड़ाई लड़ी जाएगी। इसमें शामिल सभी दोषी व्यक्तियों को चाहे कितना ही बड़ा क्यों न हो, बच नहीं पाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि कमिश्नर कुमायूं सैंथिल पांडियन द्वारा की गई जांच में अभी तक 18 से अधिक मामलों में 240 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। अभी और अधिक मामले सामने आएंगे। कहा सीबीआई अंतिम दोषी व्यक्ति तक पहुंचेगी। उन्होंने बताया कि माफिया और भ्रष्ट अफसरों के गठजोड़ ने करीब बीस गुना तक अधिक मुआवजा दिलवा दिया। इसमें तहसील, एसडीएम कार्यालय, चकबंदी, भूमि अध्याप्ति, एनएच प्राधिकरण, सब रजिस्ट्रार सहित अन्य व्यक्ति शामिल रहे हैं। कमिश्नर की प्रारम्भिक जांच में दोषी पाए गए अधिकारी जांच को प्रभावित न कर सकें, इसलिए सीबीआई जांच पूरी होने तक 6 अधिकारियों तत्कालीन भूमि अध्याप्ति अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह, अनिल कुमार शुक्ला, तत्कालीन उपजिलाधिकारी सुरेंद्र सिंह जंगपांगी, जगदीश लाल, भगत सिंह फोनिया, एन एस नगन्याल को तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया गया है। एक अन्य तत्कालीन उपजिलाधिकारी हिमालय सिंह मर्तोलिया सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उधर, प्रदेश में बढ़ते अवैध खनन को सख्ती से रोकने की बात भी उन्होंने कही। पूर्ववर्ती हरीश रावत सरकार पर खनन को लेकर काफी आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में सीएम चाहते हैं कि ऐसे आरोप उनकी सरकार पर न लगें। बताते चलें कि कुछ दिन पहले ही रामनगर में खनन माफिया ने एक वन कर्मी को ट्रैक्टर ट्रॉली से रौंद दिया। इस परिप्रेक्ष्य में उन्होंने कहा कि अवैध खनन पर लगाम कसी जाएगी।
उधर दूसरी ओर चारधाम यात्रा को लेकर स्वयं प्रधानमंत्री भी चिंतित रहते हैं। उन्होंने यहां चुनाव से ठीक पहले चारधाम यात्रा के लिए ऑल वीदर रोड का भी शिलान्यास किया। इसके चलते ही मुख्यमंत्री ने यात्रा से पहले ही अधिकारियों को पूरे मार्ग की व्यवस्थाएं चाक चौबंद रखने की बातें कही है। उन्होंने कहा कि रास्तों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध रहें। किसी भी यात्री को परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान को गति देने के लिए मुख्यमंत्री व उनकी पूरी कैबिनेट ने स्वच्छता का संकल्प दोहराया। उनकी पूरी कैबिनेट ने शपथ ग्रहण के दूसरे दिन ही प्रदेश के विभिन्न शहरों में स्वच्छता अभियान भी चलाया। यानि कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि अभी तक सीएम त्रिवेंद्र रावत की ओर से जो भी कदम उठाए गए हैं उससे लगता है कि प्रधानमंत्री के उत्तराखंड को देवों की भूमि बनाने का वादा साकार होगा। बहरहाल अभी तो शुरूआत है। अब आगे देखना होगा कि क्या कुछ निर्णय सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत लेते हैं।

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