उत्तर प्रदेशराज्य

यूपी में ट्रिपल M पर भारी पड़ेंगी Priyanka

phpThumb_generated_thumbnail (32)दस्तक टाइम्स एजेंसी/लखनऊ.यूपी में कांग्रेस की किश्मत चमकाने का बीड़ा उठा रहे प्रशांत किशोर (पीके) के सामने ट्रिपल एम यानी मोदी, मुलायम और मायावती की चुनौती है। इनको काटने के लिए उन्हें एक ऐसे चेहरे की जरूरत है जो इन तीनों पर भारी पड़े। इसके लिए पीके कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी को मैदान में उतारना चाहते हैं। कांग्रेस के राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साथ जो बैठक की उसमें यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार की गई। बैठक में प्रियंका को भी लेकर चर्चा हुई, लेकिन इस पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। कांग्रेसी नेताओं की मानें तो यदि प्रियंका को चेहरा बना कर यूपी में 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ा गया, तो कांग्रेस को सफलता जरूर मिलेगी।

सांप्रदायिकता भड़काती है भाजपा
बैठक में मौजूद कांग्रेसी नेताओं ने बताया कि अब कांग्रेस के सामने तीन एम यानी भाजपा के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सपा के नेशनल प्रेसिडेंट मुलायम सिंह यादव और बसपा प्रमुख मायावती की चुनौती है। जिसे प्रशांत किशोर की विशेषज्ञता की मदद से तोड़ा जाएगा। बैठक में शामिल प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री ने बताया कि बैठक में तय हुआ कि भाजपा की सांप्रदायिकता भड़काने की कोशिश, महंगाई, कानून-व्यवस्था आदि मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

प्रियंका पहले भी संभाल चुकी हैं चुनावी कमान
यूपी के कांग्रेसियों को राहुल से ज्यादा प्रियंका गांधी पर भरोसा है, जिसकी मांग पहले भी कई बार उठ चुकी है। प्रियंका कई बार अपनी मां सोनिया गांधी के निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली और अमेठी में जाती रही हैं। इन क्षेत्रों में उनकी स्वीकार्यता भी है। इसलिए लोगों को लगता है कि यदि 2017 के चुनाव में उनकी ही अगुवाई में चुनाव मैदान में जाया जाए तो बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है। प्रियंका गांधी द्वारा बार-बार राजनीति में न आने की घोषणा के बाद भी पार्टी के कार्यकर्ता उनसे लंबे समय से यूपी में सक्रिय होने की बात कह रहे है। प्रियंका गांधी भले चुनाव न लड़ी हों, लेकिन सोनिया और राहुल गांधी के चुनाव प्रबंधन का काम वे स्वयं संभालती आई हैं। 2004 के लोकसभा चुनाव में प्रियंका सोनिया गांधी की कैंपेन मैनेजर थीं, 2014 के लोकसभा चुनाव में सोनिया और राहुल का चुनावी कैंपेन भी उन्होंने ही संभाला था।

 
 

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