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₹12 हजार कमाने वाले के खाते में आया ₹165 करोड़! CBI की जांच में बड़ा खुलासा, हाईकोर्ट को दी अहम जानकारी

भिलाई: छत्तीसगढ़ के चर्चित 165 करोड़ रुपये के संदिग्ध बैंक लेनदेन मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने हाईकोर्ट के समक्ष अहम जानकारी पेश की है। खुर्सीपार निवासी अनिमेष सिंह के बैंक खाते में वर्ष 2020 में हुए करोड़ों रुपये के लेनदेन की जांच कर रही एजेंसी ने बताया है कि उसे धनराशि के स्रोत और उसके आगे हुए हस्तांतरण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिल चुकी हैं।

मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की खंडपीठ में हुई, जिसमें मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति आर.के. अग्रवाल शामिल रहे। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान बैंकिंग रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है और अब कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।

राशि कहां से आई और कहां गई, CBI को मिले सुराग

सीबीआई ने अदालत को जानकारी दी कि एजेंसी को यह पता चल गया है कि संबंधित राशि किन माध्यमों से बैंक खाते में पहुंची और बाद में उसका उपयोग या हस्तांतरण किस प्रकार किया गया। एजेंसी ने कहा कि मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट आगामी सुनवाई में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई के अंतिम सप्ताह में निर्धारित की है। अब इस सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

2020 में सामने आया था चौंकाने वाला मामला

यह मामला वर्ष 2020 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब खुर्सीपार निवासी अनिमेष सिंह के यस बैंक खाते में 165 करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी सामने आई थी। बताया गया था कि अनिमेष सिंह की मासिक आय करीब 12 हजार रुपये थी, ऐसे में उनके खाते में इतनी बड़ी रकम का लेनदेन कई सवाल खड़े कर गया था।

मामले के सार्वजनिक होने के बाद धनराशि के स्रोत और लेनदेन की प्रकृति को लेकर विभिन्न स्तरों पर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं।

हाईकोर्ट में दायर हुई थी जांच की याचिका

इस मामले में अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी और सामाजिक कार्यकर्ता प्रभु नाथ मिश्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है ताकि करोड़ों रुपये के इस लेनदेन की वास्तविकता सामने आ सके।

जांच को लेकर सरकार के रुख पर उठे सवाल

याचिकाकर्ता अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी का कहना है कि शुरुआत से ही मामले को लेकर राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई। उनके अनुसार, प्रारंभिक चरण में अदालत को बताया गया था कि मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो द्वारा की जा रही है, लेकिन जांच की प्रगति और निष्कर्षों को लेकर लगातार अस्पष्टता बनी रही।

उन्होंने आरोप लगाया कि अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में भी अदालत के समक्ष मामले से जुड़ी पूरी जानकारी प्रस्तुत नहीं की गई, जिससे जांच प्रक्रिया लंबी खिंचती चली गई।

जुलाई की सुनवाई पर टिकी निगाहें

मामले में अब सीबीआई की जांच आगे बढ़ने के साथ नए तथ्यों के सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है। याचिकाकर्ताओं का मानना है कि जांच की परतें खुलने के साथ कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।

फिलहाल पूरे मामले में जुलाई के अंतिम सप्ताह में होने वाली सुनवाई का इंतजार है, जब सीबीआई अपनी विस्तृत रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करेगी।

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