
यूपी के गांवों में अबकी बार युवा सरकार
प्रधानी चुनाव के नतीजों के साथ ही सूबे के गांवों में नई सरकार अस्तित्व में आ गई। इस बार गांवों में नौजवानों की सरकार बनी है। अनुमान है कि 50 फीसदी से अधिक युवा प्रधान हैं। महिला प्रधानों की संख्या भी पिछली बार से बढ़ी है। सूबे की 58,909 ग्राम पंचायतों के मुखिया पद की इस जंग में चार लाख 77 हजार 677 उम्मीदवार थे। आधी रात तक इक्का-दुक्का छोड़ ज्यादातर नतीजे घोषित कर दिए गए।
इस बार गांवों की सरकार की सूरत बदली नजर आएगी। एक तिहाई से ज्यादा 45 साल तक के प्रधानों की जीत से यह मुमकिन हुआ है। इन युवाओं में उच्च शिक्षित भी हैं, तो प्रोफेशनल्स व टेक्नोक्रेट्स भी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पैतृक गांव सैफई में दर्शन सिंह यादव तो पहले ही निर्विरोध आठवीं बार चुने जा चुके थे, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आदर्श गांव जयापुर में नारायण पटेल ने जीत हासिल की है।
38 फीसदी महिला उम्मीदवार जीतीं
प्रधानी चुनाव में करीब 38 फीसदी महिला उम्मीदवारों की जीत का अनुमान लगाया जा रहा है। चुनाव में करीब 44 प्रतिशत महिला उम्मीदवार थीं। ग्राम पंचायत चुनाव में 33 फीसदी महिलाओं का आरक्षण भी है।
बहराइच में महसी से बसपा विधायक केके ओझा की मां मंशा देवी पिपरा ग्राम पंचायत से चुनाव हार गई हैं। विधायक केके ओझा के घर में 40 साल से ग्राम प्रधानी चली आ रही थी। वहीं, महसी के पूर्व विधायक सुरेश्वर सिंह के भाई योगेश्वर सिंह सिसैया चूड़ामड़ि पंचायत से हार गए। बहराइच के सपा जिलाध्यक्ष रामतेज यादव का बेटा अमरदीप यादव हेमरिया से चुनाव हार गया।
वहां समर्थकों ने हलका बवाल भी किया। सीतापुर के ब्लॉक खैराबाद की ग्राम पंचायत बनका जलालपुर से सूबे के कारागार राज्यमंत्री रामपाल राजवंशी की समधिन सुमरिता देवी चुनाव हार गई हैं।
नहीं जीत पाई शीलू
बांदा में गैंगरेप पीड़ित शीलू निषाद ग्राम पंचायत करकोला से प्रधानी चुनाव हार गईं।
मौत के बाद भी जीत गए
चित्रकूट में मऊ ब्लाक के सुरौधा गांव में शनिवार को हार्टअटैक से मरे रामनारायण विजयी घोषित ह़ुए। डीएम नीलम अहलावत ने किसी को प्रमाण पत्र नहीं दिया और पद रिक्त माना गया।



