उत्तर प्रदेशराज्यवाराणसी

महाशिवरात्रि पर यूपीआई से बाबा को मिला रिकॉर्ड विवाह नेग

डिजिटल श्रद्धा का संगम, महाशिवरात्रि पर 18 घंटे में उमड़ा आस्था का सैलाब

सुरेश गांधी

वाराणसी : सनातन आस्था की विश्व राजधानी माने जाने वाले श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में इस वर्ष महाशिवरात्रि ने श्रद्धा, तकनीक और अर्थव्यवस्था, तीनों का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर मात्र 18 घंटे के भीतर 400 श्रद्धालुओं ने यूपीआई के माध्यम से बाबा विश्वनाथ को विवाह का नेग अर्पित करते हुए लगभग पांच लाख रुपये का रिकॉर्ड वर्चुअल चढ़ावा भेज दिया। यह आंकड़ा न केवल धार्मिक आस्था की गहराई को दर्शाता है, बल्कि बदलती डिजिटल संस्कृति में भक्तों की बढ़ती सहभागिता का भी सशक्त प्रमाण बन गया है।

महाशिवरात्रि पर उमड़ी डिजिटल श्रद्धा की बाढ़
महाशिवरात्रि के दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं ने मोबाइल के माध्यम से दान अर्पित करना शुरू किया, जो देर रात तक लगातार जारी रहा। भक्तों ने न्यूनतम एक रुपये से लेकर अधिकतम 50,001 रुपये तक की राशि बाबा के चरणों में समर्पित की। औसतन प्रत्येक श्रद्धालु ने लगभग 1200 रुपये दान किए। विशेष बात यह रही कि पिछले सात दिनों में जितना ऑनलाइन चढ़ावा प्राप्त हुआ था, उससे अधिक दान केवल महाशिवरात्रि के दिन ही प्राप्त हो गया। मंदिर प्रशासन के अनुसार फरवरी माह के पहले 15 दिनों में लगभग 1200 श्रद्धालुओं ने करीब 13 लाख रुपये ऑनलाइन दान किए। इसमें औसत दान राशि 1092 रुपये रही। वहीं महाशिवरात्रि को अलग कर दें तो 14 दिनों में 800 भक्तों ने लगभग आठ लाख रुपये यूपीआई के माध्यम से अर्पित किए।

कॉरिडोर से बदली दर्शन व्यवस्था और आर्थिक तस्वीर
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के बाद मंदिर की व्यवस्थाओं में व्यापक बदलाव आया है। कॉरिडोर ने श्रद्धालुओं को सहज और भव्य दर्शन सुविधा प्रदान की है, जिससे धाम में आने वाले भक्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। धार्मिक पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि कॉरिडोर बनने के बाद मंदिर से जुड़ी स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है। होटल, धर्मशालाएं, परिवहन, हस्तशिल्प, प्रसाद व्यवसाय, फूल व्यापार और स्थानीय रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

धार्मिक पर्यटन का वैश्विक केंद्र बनती काशी
प्राचीन आध्यात्मिक नगरी वाराणसी अब धार्मिक पर्यटन के अंतरराष्ट्रीय नक्शे पर तेजी से उभर रही है। देश के विभिन्न राज्यों के साथ विदेशों से आने वाले श्रद्धालु भी डिजिटल भुगतान के माध्यम से मंदिर से जुड़े रह रहे हैं। इससे पारदर्शी आर्थिक व्यवस्था के साथ मंदिर प्रशासन को विकास कार्यों में भी सुविधा मिल रही है। पर्यटन विभाग के अनुसार, धार्मिक आयोजनों के दौरान शहर में होटल व्यवसाय, परिवहन सेवाएं, स्थानीय बाजार और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे काशी की अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती मिल रही है।

युवाओं में बढ़ रहा डिजिटल भक्ति का आकर्षण
युवा पीढ़ी तेजी से डिजिटल भक्ति संस्कृति से जुड़ रही है। मोबाइल ऐप और यूपीआई के माध्यम से दूर बैठे श्रद्धालु भी बाबा विश्वनाथ को दान अर्पित कर आध्यात्मिक जुड़ाव महसूस कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति भविष्य में धार्मिक आयोजनों को और व्यापक तथा वैश्विक स्वरूप प्रदान करेगी।

आस्था से विकास तक का मजबूत सेतु
डिजिटल दान व्यवस्था ने मंदिर प्रशासन को पारदर्शी और व्यवस्थित आर्थिक प्रबंधन का मजबूत आधार दिया है। प्राप्त धनराशि श्रद्धालु सुविधाओं के विस्तार, धाम सौंदर्यीकरण, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक सेवा कार्यों में उपयोग की जा रही है। इससे काशी की धार्मिक विरासत के साथ आर्थिक विकास को भी नई गति मिल रही है।

परंपरा और तकनीक का संगम बना नई पहचान
महाशिवरात्रि पर रिकॉर्ड डिजिटल दान ने यह साबित कर दिया कि आस्था समय के साथ बदलती नहीं, बल्कि नए रूप में और व्यापक होती जाती है। बाबा विश्वनाथ के प्रति श्रद्धालुओं का समर्पण अब तकनीक के माध्यम से वैश्विक स्तर पर फैल रहा है और काशी आध्यात्मिकता के साथ डिजिटल युग की नई मिसाल बनती जा रही है।

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