जालंधर में सीजन का सबसे गर्म दिन रिकॉर्ड: तापमान 37.2 डिग्री पार, आने वाले दिनों में और बढ़ेगी तपिश

जालंधर में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है और इस सीजन का अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया है। महानगर में वीरवार को अधिकतम तापमान 37.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा।
सुबह की हल्की हवा के बाद दिनभर तेज धूप का असर
दिन की शुरुआत भले ही तेज हवाओं के साथ हुई थी, लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ा, आसमान पूरी तरह साफ हो गया और तेज धूप ने तापमान में लगातार बढ़ोतरी कर दी। दोपहर होते-होते गर्मी का असर और तेज हो गया, जिससे जनजीवन प्रभावित नजर आया।
न्यूनतम तापमान में भी बढ़ोतरी, मौसम विशेषज्ञों ने जताई चेतावनी
इस दौरान न्यूनतम तापमान भी बढ़कर 20.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम विभाग ने चार दिन पहले ही अनुमान जताया था कि तापमान 37 डिग्री के पार जा सकता है, जो अब सही साबित हुआ है। विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में गर्मी का असर और बढ़ सकता है।
24 घंटे में तापमान में तेज उछाल
अगर पिछले 24 घंटे के आंकड़ों पर नजर डालें तो अधिकतम तापमान 34.1 डिग्री से बढ़कर 37.2 डिग्री हो गया, यानी 3.1 डिग्री की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं न्यूनतम तापमान में भी 4 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है, जो 16.4 डिग्री से बढ़कर 20.4 डिग्री तक पहुंच गया है।
आने वाले दिनों में और बढ़ेगी गर्मी
मौसम विशेषज्ञ डॉ. दलजीत सिंह के अनुसार अगले छह दिनों तक मौसम साफ बना रहेगा। सुबह के समय हल्की से तेज हवाएं चल सकती हैं, लेकिन दिन में तेज धूप के कारण तापमान में लगातार बढ़ोतरी होने की संभावना है।
गेहूं की कटाई पर मौसम का असर, मंडियों में बढ़ी आवक
मौसम में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता का असर फसलों पर भी देखने को मिला है। इस बार गेहूं की कटाई में भले ही देरी हुई हो, लेकिन अब इसमें तेजी आई है। किसानों ने मौसम खराब होने और बारिश की आशंका के चलते जल्द कटाई कर फसल मंडियों तक पहुंचानी शुरू कर दी है।
पिछले साल से लगभग दोगुनी गेहूं की आवक
इस तेजी का असर यह हुआ कि जिले की दाना मंडियों में गेहूं की आवक पिछले साल की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई है। अब तक 41,909 मीट्रिक टन गेहूं मंडियों में पहुंच चुका है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 25,623 मीट्रिक टन था।
किसानों की जल्दबाजी से बढ़ी आवक
किसानों का कहना है कि खराब मौसम, तेज हवाओं और बारिश की आशंका को देखते हुए उन्होंने फसल जल्दी काटकर सुरक्षित करने का निर्णय लिया, जिससे मंडियों में एक साथ भारी मात्रा में गेहूं पहुंच रहा है।



