उत्तराखंड

जल संरक्षण कार्यों की धीमी रफ्तार पर मुख्य सचिव सख्त, एक साल की टाइमलाइन और प्राथमिकता तय करने के निर्देश

देहरादून, 30 अप्रैल 2026। उत्तराखंड में जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन कार्यों की समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए सख्त रुख अपनाया है। गुरुवार को सचिवालय में आयोजित बैठक में स्प्रिंग एंड रिवर रिज्युविनेशन अथॉरिटी (SARRA) द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्यों की विस्तृत सूची तैयार कर शीघ्र उपलब्ध कराई जाए।

एक साल की कार्ययोजना और स्पष्ट टाइमलाइन बनाने के निर्देश

मुख्य सचिव ने सारा को अगले एक वर्ष की ठोस कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रस्तावित कार्यों की प्राथमिकता तय की जाए और प्रत्येक कार्य के लिए स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की सभी नदियों पर एक साथ काम करने के बजाय चयनित नदियों को प्राथमिकता देकर चरणबद्ध तरीके से कार्य शुरू किया जाए।

चेकडैम श्रृंखला को लेकर तेजी लाने पर जोर

बैठक में चेकडैम निर्माण को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने टिहरी जिले में तैयार की गई चेकडैम श्रृंखला के मॉडल को अन्य जिलों में भी लागू करने के निर्देश दिए। साथ ही, चेकडैम्स के नियमित मेंटेनेंस और डिसिल्टिंग को योजना का अनिवार्य हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया, ताकि उनकी उपयोगिता लंबे समय तक बनी रहे।

30 जून तक ग्राउंड वाटर रिचार्ज कार्य पूरे करने के निर्देश

मुख्य सचिव ने ग्राउंड वाटर रिचार्ज से जुड़े सभी चिन्हित कार्यों को 30 जून 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने विशेष रूप से नैनीताल और देहरादून में भूमिगत जल संवर्धन से जुड़े कार्यों को अगले दो महीनों के भीतर पूर्ण करने को कहा। साथ ही, सभी कार्यों की प्रगति को जल संचय जन भागीदारी पोर्टल पर अपलोड करने के भी निर्देश दिए गए।

जिलास्तर पर जवाबदेही और नियमित मॉनिटरिंग पर फोकस

उन्होंने सारा को निर्देशित किया कि जनपद स्तर पर अधिकारियों को स्पष्ट लक्ष्य देकर जिम्मेदारी तय की जाए। जिलाधिकारियों को भी योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि कार्यों की गति और गुणवत्ता दोनों बनी रहे।

“वन डिस्ट्रिक्ट, वन रिवर” योजना के तहत तेज हो रहा काम

बैठक में जानकारी दी गई कि राज्य में जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन के लिए सारा की पहल अब गति पकड़ रही है। “वन डिस्ट्रिक्ट, वन रिवर” योजना के तहत विभिन्न जिलों में नदियों, धारा-नौला और भूजल स्रोतों को वैज्ञानिक तरीके से पुनर्जीवित किया जा रहा है। प्रदेश में अब तक 5775 जल स्रोतों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें 2664 स्प्रिंग, 1701 नौले और 1282 क्रिटिकल स्ट्रीम्स शामिल हैं। इन स्रोतों के संरक्षण और पुनर्भरण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर कार्य शुरू किया जा चुका है।

कुमाऊं और गढ़वाल मंडलों में शिप्रा, गौड़ी, सोंग, नयार और पूर्वी रामगंगा जैसी नदियों को प्राथमिकता में रखते हुए पुनर्जीवन कार्य जारी है। इस अभियान में स्थानीय समुदाय की भागीदारी को भी विशेष महत्व दिया जा रहा है। ग्राम पंचायत स्तर पर समितियां गठित कर लोगों को जल संरक्षण, पौधरोपण और जल बचत के प्रति जागरूक किया जा रहा है, साथ ही राष्ट्रीय संस्थानों का तकनीकी सहयोग भी लिया जा रहा है।

वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी

बैठक में अपर सचिव हिमांशु खुराना और कहकशा नसीम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने विभिन्न योजनाओं की प्रगति और चुनौतियों पर विस्तार से जानकारी दी।

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