मध्य प्रदेशराज्य

खर्चों पर चला मोहन सरकार का बड़ा ‘कैंची प्लान’, अफसरों के विदेश दौरे बंद, हवाई यात्रा से होटल बैठकों तक सख्त नियम लागू

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के लिए सरकारी खर्चों पर बड़ी सख्ती लागू कर दी है। वित्त विभाग ने अगले दो वर्षों तक होटलों और व्यावसायिक परिसरों में सरकारी कार्यशालाओं, बैठकों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही अधिकारियों की सरकारी खर्च पर होने वाली विदेश यात्राओं पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। आवश्यक सरकारी यात्रा की स्थिति में अधिकारियों को केवल इकोनॉमी क्लास में ही हवाई सफर करने की अनुमति होगी। इस संबंध में वित्त विभाग ने सभी विभागों और सरकारी संस्थाओं के लिए आदेश जारी कर दिए हैं।

सरकारी खर्च पर विदेश यात्राओं के लिए कड़े नियम

वित्त विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों, प्रबंध संचालकों, निगम-मंडलों, विश्वविद्यालयों और अन्य सरकारी संस्थाओं को निर्देश जारी किए हैं कि अब केवल अत्यावश्यक परिस्थितियों में ही सरकारी खर्च पर विदेश यात्रा की अनुमति दी जाएगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बिना जरूरी कारण के किसी भी अधिकारी की विदेश यात्रा स्वीकृत नहीं होगी।

अधिकारियों की हवाई यात्रा को लेकर लिए गए इस फैसले पर सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में हवाई यात्राओं पर प्रतिदिन 21 लाख रुपये खर्च होने को लेकर सवाल उठे थे, जिस पर सरकार को विधानसभा में जवाब भी देना पड़ा था।

सरकारी कैलेंडर, डायरी और उपहारों पर भी रोक

मितव्ययिता अभियान के तहत वित्त विभाग ने कई गैर-जरूरी खर्चों पर रोक लगा दी है। आगामी आदेश तक अनिवार्य परिस्थितियों को छोड़कर राज्य सरकार और उसके उपक्रमों की ओर से होने वाली विदेश यात्राएं स्थगित रहेंगी। इसके अलावा सरकारी कैलेंडर, डायरी की छपाई, वीआईपी उपहार और स्वागत समारोहों पर होने वाले खर्च भी बंद कर दिए गए हैं।

अब सरकारी अधिकारियों को किसी भी सरकारी यात्रा में इकोनॉमी क्लास से ऊपर की श्रेणी में यात्रा की अनुमति नहीं होगी। कार्यशालाएं, बैठकें और प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल सरकारी भवनों में आयोजित किए जाएंगे। जहां संभव होगा, वहां वर्चुअल माध्यम और वेबिनार को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही कार्यालयों की आंतरिक साज-सज्जा पर होने वाले गैर-जरूरी खर्चों पर भी रोक लगा दी गई है।

वाहन पूलिंग व्यवस्था होगी अनिवार्य

सरकार ने परिवहन खर्च कम करने के लिए वाहन पूलिंग व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। यदि किसी अधिकारी को अतिरिक्त विभाग का प्रभार मिलता है तो उस विभाग का वाहन किसी अन्य पात्र अधिकारी को आवंटित किया जाएगा, ताकि किराये के वाहनों पर होने वाला खर्च कम किया जा सके।

विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि किराये के वाहनों की संख्या सीमित रखी जाए और दो या उससे अधिक अधिकारियों के बीच एक ही वाहन साझा करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

राजस्व में 10 हजार करोड़ रुपये की कमी का अनुमान

सरकार का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में राज्य की आय बजट अनुमान से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये कम रह सकती है। वित्त विभाग ने राजस्व प्राप्ति के आधार पर यह आकलन सरकार को सौंपा है। इसी वजह से प्रथम अनुपूरक बजट में राजस्व व्यय बढ़ाने के बजाय पूंजीगत कार्यों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए कार्यों के लिए अतिरिक्त राशि केवल उन्हीं मामलों में उपलब्ध कराई जाएगी, जहां केंद्र सरकार या अन्य स्रोतों से धन प्राप्त हो रहा हो और उसमें राज्यांश देना अनिवार्य हो।

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में 3,89,397 करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति और 3,88,925 करोड़ रुपये के व्यय का अनुमान रखा गया है।

मुख्यमंत्री पहले ही शुरू कर चुके हैं मितव्ययिता अभियान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मितव्ययिता संबंधी आह्वान के बाद मध्य प्रदेश सरकार पहले से ही कई कदम उठा चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने काफिले में वाहनों की संख्या 13 से घटाकर 8 कर चुके हैं। उन्होंने अपने उपयोग में इलेक्ट्रिक वाहन भी शामिल किया है। इसके अलावा वित्त विभाग नई सरकारी गाड़ियों की खरीद पर पहले ही रोक लगा चुका है।

होटलों की जगह सरकारी भवनों और वर्चुअल बैठकों को प्राथमिकता

वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि होटल और अन्य व्यावसायिक संस्थानों में होने वाले सरकारी कार्यक्रम, प्रशिक्षण और कार्यशालाएं अब आयोजित नहीं की जाएंगी। ऐसे सभी आयोजन सरकारी परिसरों में होंगे और जहां संभव होगा, वहां वर्चुअल प्रशिक्षण तथा वेबिनार को प्राथमिकता दी जाएगी। विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि इन गतिविधियों पर अनावश्यक खर्च से बचा जाए।

किराये के वाहनों और कार्यालयी खर्चों में भी होगी कटौती

सभी विभागों को किराये के वाहनों की संख्या कम करने और वाहन साझा व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। दो या अधिक अधिकारियों को अलग-अलग वाहन उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे। इसके साथ ही कार्यालयों की सजावट और अधिकारियों के केबिन के इंटीरियर पर होने वाले अतिरिक्त खर्चों पर भी रोक लगा दी गई है।

अतिरिक्त प्रभार मिलने की स्थिति में भी संबंधित अधिकारी को दूसरे विभाग का अलग वाहन उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। उन्हें केवल पात्रता के अनुसार निर्धारित वाहन का ही उपयोग करना होगा।

निगम-मंडलों को जमा करनी होगी अधिकतम लाभांश राशि

वित्त विभाग ने नई कंसल्टेंसी सेवाओं के अनुबंधों पर भी रोक लगाने का फैसला किया है। साथ ही सभी निगम-मंडलों और सरकारी उपक्रमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी अधिकतम संभव लाभांश राशि राज्य सरकार के खाते में जमा कराएं, ताकि सरकारी वित्तीय संसाधनों को मजबूत किया जा सके। इससे पहले सामान्य प्रशासन विभाग भी गैर-जरूरी सरकारी खर्चों में कटौती के निर्देश जारी कर चुका है।

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